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पान मसाला विज्ञापन केस में सलमान खान केस में दस्तावेजों पर सवाल, कोर्ट ने कमियों को दूर करने के दिए निर्देश

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान से जुड़े पान मसाला विज्ञापन मामले में कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने FSL द्वारा लौटाए गए दस्तावेजों में सुधार करने को कहा है. हस्ताक्षर जांच फिलहाल रुकी हुई है और अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी.

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FSL ने साफ कहा कि जो दस्तावेज भेजे गए थे वे जांच के तय मानकों पर खरे नहीं उतरते (Photo: ITG)
FSL ने साफ कहा कि जो दस्तावेज भेजे गए थे वे जांच के तय मानकों पर खरे नहीं उतरते (Photo: ITG)

राजस्थान के कोटा की जिला उपभोक्ता अदालत में हिंदी फिल्म अभिनेता सलमान खान से जुड़े राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई के दौरान अहम मोड़ आ गया. अदालत ने हस्ताक्षरों की सत्यता को लेकर भेजे गए दस्तावेजों में कमियां पाई जाने पर उन्हें सुधारने के निर्देश दिए हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान साफ हुआ कि अदालत द्वारा राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, जयपुर भेजे गए दस्तावेजों को 8 अप्रैल को तकनीकी आपत्तियों के साथ वापस लौटा दिया गया. प्रयोगशाला ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेज जांच के मानकों पर खरे नहीं उतरते, इसलिए उनकी वैज्ञानिक जांच संभव नहीं है.

सुनवाई के दौरान अभिनेता की ओर से अधिवक्ता शिवांशु नवल और राजश्री पान मसाला की ओर से अधिवक्ता राकेश सुवालका उपस्थित रहे. वहीं परिवादी इंद्रमोहन सिंह हनी की ओर से शपथ-पत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया.

राजश्री पान मसाला के पक्षकार अधिवक्ता राकेश सुवालका ने दलील दी कि मौजूदा दस्तावेजों के आधार पर किसी प्रकार की जांच संभव नहीं है. इस पर अदालत ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि दस्तावेजों में बताई गई कमियों को दूर कर उन्हें दोबारा जांच के लिए भेजा जाए. मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तय की गई है.

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राजश्री पान मसाला की ओर से एडवोकेट राकेश सुवालका ने कहा कि कोर्ट ने फिल्म स्टार सलमान खान के डॉक्यूमेंट्स एफएसएल जांच के लिए भेजे थे, जिन्हें लैब ने 8 अप्रैल को कमियां बताते हुए रिजेक्ट कर दिया. इन डॉक्यूमेंट्स की एफएसएल जांच संभव नहीं है. जिस पर कोर्ट ने आज कमियों को पूरा करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई अब 21 अप्रैल को होगी.

इंद्रमोहन सिंह हनी के वकील ने बताया कि राज्य आयोग से रोक हटने के बाद डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कोर्ट ने अनुपालन सुनिश्चित करते हुए संबंधित डॉक्यूमेंट-फाइल एफएसएल, जयपुर को भेज दी. एफएसएल द्वारा पूर्व में कुछ आपत्तियां जताई गई थीं, जिनके संबंध में कोर्ट ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

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एडवोकेट इंद्र मोहन सिंह हनी और एडवोकेट रिपु दमन सिंह ने बताया कि कोर्ट का यह कदम सत्यता की जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. हमने शुरू से यह तर्क दिया है कि कोर्ट में पेश किए गए डॉक्यूमेंट्स पर सलमान खान के हस्ताक्षर संदिग्ध हैं. अब दूध का दूध और पानी का पानी एफएसएल रिपोर्ट के माध्यम से हो जाएगा.

दरअसल, यह विवाद 26 दिसंबर 2025 को सामने आया था, जब परिवादी इंद्रमोहन सिंह हनी ने अदालत में पेश वकालतनामा और जवाब पर किए गए हस्ताक्षरों को संदिग्ध बताते हुए उनकी जांच की मांग की थी. इस पर संज्ञान लेते हुए जिला उपभोक्ता अदालत ने हस्ताक्षरों की वैज्ञानिक जांच कराने के आदेश दिए थे और संबंधित पक्ष को स्वयं उपस्थित होकर हस्ताक्षरित शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए थे.

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बाद में इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग, जयपुर में अपील दायर की गई, जहां प्रारंभ में जांच प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी. हालांकि, हाल ही में आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह रोक हटा दी और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा.

अब इस मामले में आगे की दिशा दस्तावेजों में सुधार और उसके बाद होने वाली वैज्ञानिक जांच पर निर्भर करेगी. अदालत की निगरानी में होने वाली यह प्रक्रिया यह तय करेगी कि संबंधित दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर वास्तविक हैं या नहीं.

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