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जब शराब ने बिगाड़ी एक्टर की जिंदगी, नशे में महिलाओं को करता था अश्लील कॉल, बोला- काबू नहीं था

पीयूष मिश्रा ने उस दौर पर रोशनी डाली जिसने उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल, दोनों ही जिंदगियों को गहराई से प्रभावित किया था. उन्होंने अपनी शराब की लत पर खुलकर बात की और बताया कि कैसे इसकी वजह से न सिर्फ उनका रिश्ता अपनी मां से खराब हो गया था, बल्कि वो महिलाओं को अश्लील कॉल भी करते थे.

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पीयूष मिश्रा ने स्ट्रगल के दिनों को किया याद (Photo: ITG)
पीयूष मिश्रा ने स्ट्रगल के दिनों को किया याद (Photo: ITG)

पीयूष मिश्रा को अपने अलग-अलग टैलेंट के लिए जाना जाता है. पीयूष एक एक्टर और लेखक होने के साथ-साथ सिंगर भी हैं. अपनी जिंदगी में उन्हें कई मुश्किल दिन देखे हैं. इन्हीं में से एक थी उनकी शराब की लत. अब उन्होंने इसके बारे में खुलकर बात की है. पीयूष मिश्रा ने उस दौर पर रोशनी डाली जिसने उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल, दोनों ही जिंदगियों को गहराई से प्रभावित किया था.

शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट पर बात करते हुए पीयूष मिश्रा ने बताया कि कैसे धीरे-धीरे निर्भरता व्यक्ति पर हावी हो जाती है. उन्होंने अपनी शराब की लत को घातक बीमारी ही करार दिया. एक्टर ने कहा, 'एक वक्त ऐसा आता है जब आपको लगने लगता है कि शराब पीना जरूरी है. इसका असर ऐसा होता है कि इंसान और ज्यादा पीना चाहता है. शराब की लत एक घातक बीमारी है और शराबी को खुद भी यह एहसास नहीं होता कि वह शराबी है. मेडिकल साइंस के पास भी शराब की लत का कोई इलाज नहीं है. एक समय ऐसा आता है जब चाहे आप पीना चाहें या न चाहें, आपको शराब की जरूरत पड़ती है, आपका शरीर उसे मांगता है. मैंने खुद यह महसूस किया है.'

नशे में की अश्लील कॉल्स

अपने स्ट्रगल की इंटेंसिटी के बावजूद पीयूष मिश्रा ने साफ किया कि उन्होंने कभी काम के समय शराब नहीं पी. उन्होंने कहा, 'मैंने कभी शराब पीकर एक्टिंग नहीं की, न कभी नशे में सेट पर गया. हां, इसने मेरी जिंदगी को प्रभावित जरूर किया. मेरे दिमाग में शराब छाई रहती थी. हुस्ना गाना गाते समय भी मेरे दिमाग में शराब थी, गुलाल पर काम करते समय भी. लेकिन उस समय मैंने शराब नहीं पी थी. मैं फिजिकल क्रेविंग की वजह से पीता था और उस क्रेविंग को दबाया नहीं जा सकता.'

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एक्टर ने बड़ी ईमानदारी से बताया कि शराब ने उनके व्यवहार को कैसे बदल दिया था. इस लत ने पीयूष को अक्सर ऐसी हरकतें करने पर मजबूर कर दिया जिनके बारे में बाद में उन्हें खुद भी अफसोस होता था. उन्होंने बताया, 'शराब पीने के बाद मैंने कई ऐसी चीजें कीं, जिनके बारे में बाद में लगता था कि यह मैं नहीं हूं. मेरी मां से मेरे संबंध खराब थे और नशे में मैंने उनसे कई कड़वी और दिल दुखाने वाली बातें कहीं… भले ही मैं यह समझ चुका था कि मुझे उन्हें माफ कर देना चाहिए.'

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नशे में उन्होंने कई अनुचित फोन कॉल्स किए. उन्होंने कहा, 'मैंने कई महिलाओं को अनुचित और अश्लील फोन कॉल्स किए, और अगली सुबह मुझे उनमें से कुछ भी याद नहीं रहता था. उस समय मैं खुद पर काबू नहीं रख पाता था. मैं वो चीजें कर रहा था जो मैं करना नहीं चाहता था.'

पीयूष ने माना कि उनका यह व्यवहार उनके प्रोफेशनल रिश्तों पर भी असर डालने लगा था. उन्होंने बताया, 'प्रोफेशनली लोग मुझसे डरने लगे थे, क्योंकि मैं ऐसा व्यवहार करता था. इससे मेरे काम पर असर पड़ने लगा. लोग कहने लगे कि मेरे साथ काम करना बहुत मुश्किल है… अब मुझे थकान होने लगी है यह बार-बार समझाने से कि मैं अब वो व्यक्ति नहीं हूं. मैंने खुद को काफी हद तक कंट्रोल कर लिया है.'

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पीयूष को लगा था बड़ा झटका

2009 में पीयूष मिश्रा की जिंदगी में टर्निंग पॉइंट आया, जब उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ. इससे उनके शरीर के दाहिने हिस्से पर असर पड़ा था. इस अनुभव ने उन्हें अपनी लत का सामना करने के लिए मजबूर किया. एक्टर ने कहा, 'मैंने शराब को पूरी तरह छोड़ा नहीं है. मैं अभी भी कभी-कभी पीता हूं, लेकिन नियमित रूप से नहीं. स्पिरिचुअल साधनों से क्रेविंग काफी कम हो गई. उसके बाद मैंने विपश्यना का अभ्यास किया और अपनी क्रेविंग को नियंत्रित किया. लेकिन मैं अभी भी शराबी हूं. शराब की लत कभी पूरी तरह जाती नहीं है. आप रोज की मोहलत ले सकते हैं, लेकिन इसे जड़ से खत्म नहीं कर सकते.'

उस दौर पर विचार करते हुए पीयूष ने कहा, 'मैं पूरी तरह एंटी सोशल व्यक्ति बन गया था. मेरे काम ने मुझे बचाया. वरना जो कुछ मैंने किया था… लोग मुझे मार भी डालते.'

2024 में दिए एक इंटरव्यू में पीयूष मिश्रा ने यह भी बताया था कि शराब ने उनके क्रिएटिव प्रोसेस को कैसे प्रभावित किया था. साथ ही उन्होंने इस मिथक को खारिज किया कि नशा रचनात्मकता बढ़ाता है. उन्होंने कहा था, 'मैं बहुत बुरी हालत में था. यह मेरे नर्वस सिस्टम पर असर कर चुका था. शराब के प्रभाव में मैं बेवकूफी भरी बातें करने लगा था. मैं तबाही की कगार से वापस लौटा हूं. मुझे पता था कि अगर मैं ऐसे ही चलता रहा तो मेरी जिंदगी खत्म हो जाएगी.'

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आज वे दावा नहीं करते कि वे पूरी तरह ठीक हो गए हैं, मगर अपनी स्थिति को मैनेज कर रहे हैं. उनकी ये बातें लत की कड़वी सच्चाई और जिंदगी का नियंत्रण वापस हासिल करने की लंबी यात्रा पर एक साफ और बिना फिल्टर वाला नजरिया पेश करती हैं.

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