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पहलाज निहलानी, ज‍िसने इंडस्ट्री को दिया गोव‍िंदा, शराब पीने से जुड़ी चंकी पांडे की कास्ट‍िंग की कहानी

पहलाज निहलानी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन मेनस्ट्रीम बॉलीवुड में उनका एक बड़ा योगदान है. उन्होंने बॉलीवुड को गोविंदा, चंकी पांडे, डेविड धवन और अनीस बज़्मी जैसे कॉमेडी के दिग्गज दिए हैं. बिना स्क्रिप्ट और कॉन्ट्रैक्ट के फिल्में शुरू करने वाले पहलाज ने कैसे इन कॉमेडी जीनियस को मौका दिया, उसकी कहानी बहुत मजेदार है.

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पहलाज निहलानी ने बॉलीवुड को दिए थे कॉमेडी के ये दिग्गज (Photo: ITGD)
पहलाज निहलानी ने बॉलीवुड को दिए थे कॉमेडी के ये दिग्गज (Photo: ITGD)

पहलाज निहलानी कभी 'सिनेमा की सेवा' करने या 'फिल्ममेकिंग को नई तकनीकी ऊंचाई' देने वाले हिंदी फिल्ममेकर्स में नहीं गिने गए. लेकिन संसार को अलविदा कह चुके पहलाज, अपने आप में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के अलग ही आइकॉन रहे. आज उनकी फिल्मों को 'बी ग्रेड' की कैटेगरी में रखकर किनारे कर दिया जाता है, लेकिन उन्होंने कई ऐसी मल्टी-स्टारर और मसाला एंटरटेनर फिल्में बनाई थीं जो मास ऑडियंस में बहुत पॉपुलर हुईं. आंखें, शोला और शबनम, इल्जाम और आग ही आग जैसी उनकी फिल्में अपने आप में एक अलग तरह का कल्ट हैं.

अपने दौर में पहलाज निहलानी ऐसे नामी प्रोड्यूसर थे कि उन्हें कभी फिल्म शुरू करने के लिए एक्टर्स को साइनिंग अमाउंट देने, कान्ट्रैक्ट बनाने या स्क्रिप्ट तक रेडी रखने के तामझाम की जरूरत नहीं पड़ी. पहलाज ने इधर लोगों से बात की और उधर वो काम शुरू कर देते थे. आज भले ही पहलाज की फिल्मों के नामलेवा गिने-चुने लोग हों, मगर बॉलीवुड में उनका एक बहुत बड़ा योगदान है— इंडस्ट्री में कॉमेडी को जान देने वाले कलाकारों की एक पूरी खेप को पहलाज ने ही सबसे पहले जगह दी थी.

गोविंदा और चंकी पांडे को पहलाज निहलानी ने दिया था ब्रेक

फिल्म डिस्ट्रिब्यूटर से प्रोड्यूसर बने पहलाज ने अपनी पहली दो फिल्मों में शत्रुघ्न सिन्हा, शशि कपूर और मिथुन चक्रवर्ती जैसे स्टार्स के साथ काम किया था. अपनी तीसरी फिल्म इल्जाम (1986) के लिए भी वो मिथुन और शत्रुघ्न को ही कास्ट करना चाहते थे. लेकिन जब इन एक्टर्स की डेट्स नहीं मिलीं, तो पहलाज की मुलाकात गोविंदा से हुई.

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'लर्न फ्रॉम द लेजेंड' पॉडकास्ट में पहलाज ने बताया था कि गोविंदा की तस्वीरें तो उन्हें शुरुआत में बहुत खराब लगी थीं. लेकिन अगले दिन गोविंदा हार मानने के बजाय अपने डांस का एक वीडियो टेप लेकर उनके पास पहुंच गए. पहलाज ने कहा था, "माइकल जैक्सन की वजह से ब्रेक डांस उन दिनों बहुत पॉपुलर था." उन्होंने सिर्फ डांस और एक्शन में हाथ मजबूत देखकर गोविंदा को फिल्म में काम दे दिया था. इल्जाम बॉक्स ऑफिस पर चल पड़ी और इसी के साथ गोविंदा का करियर भी चल निकला.

डेविड धवन और अनीस बज़्मी भी पहलाज निहलानी की देन

कुछ साल बाद गोविंदा के रास्ते में जब स्पीड ब्रेकर आ गए, तब पहलाज ने उन्हें शोला और शबनम (1992) देकर फिर से स्टारडम की रफ्तार बढ़ा दी. इसी फिल्म से डायरेक्टर डेविड धवन को अपने करियर की पहली बड़ी हिट मिली थी, जो एडिटिंग से डायरेक्शन में आकर इससे पहले कई फ्लॉप फिल्में दे चुके थे. राइटर अनीस बज़्मी भी पिछले कुछ सालों से निहलानी के प्रोडक्शन हाउस के साथ काफी काम कर रहे थे, लेकिन उनके करियर की पहली बड़ी हिट भी शोला और शबनम ही बनी.

गोविंदा खुद पहलाज के पास काम मांगने पहुंचे थे, लेकिन चंकी पांडे उनसे बड़े मजेदार तरीके से टकराए थे. सायरस ब्रोचा के पॉडकास्ट में चंकी ने बताया था कि वो आजतक कपड़ों की गांठें बांधने और खोलने में कामयाब नहीं हो पाते हैं. इसका नतीजा ये हुआ था कि एक रात वो जमकर बीयर पी लेने के बाद जब टॉयलेट भागे, तो अपने पायजामे का नाड़ा नहीं खोल पा रहे थे. चंकी ने मदद के लिए चिल्लाना शुरू किया तो वहां मौजूद सबको वो बहुत फनी लगा. उनकी मदद के लिए आखिरकार जो शख्स आगे आया, वो प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी थे. पहलाज ने चंकी के इस फनी अंदाज को देखकर उन्हें अगले दिन अपने ऑफिस बुलाया और आग ही आग (1987) में डेब्यू का मौका दे दिया.

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ऐसे बनी ब्लॉकबस्टर 'आंखें'

एक रात संयोग से पहलाज के घर चंकी पांडे और गोविंदा की बैठक एक साथ जम गई. दोनों एक्टर्स की ट्यूनिंग सॉलिड बैठने लगी और बातें खत्म होते-होते सुबह के 4 बज गए. 'फिल्म सिटी' मैगजीन के साथ बातचीत में पहलाज ने बताया था कि जाते हुए चंकी ने उनसे कहा कि वो हम दोनों एक्टर्स को साथ में लेकर कोई फिल्म क्यों नहीं बनाते?

पहलाज को यह आइडिया बेहद पसंद आया. उनके दिमाग में तुरंत एक कहानी आई— एक बाप के दो बिगड़ैल लड़के कुछ ऐसा कमाल कर दें कि गर्व से बाप का सीना चौड़ा हो जाए. इस वन-लाइनर आइडिया के साथ, बिना किसी स्क्रिप्ट-स्क्रीनप्ले या डायरेक्टर के पहलाज ने कुछ ही दिन में नई फिल्म आंखें (1993) का भव्य मुहूर्त करवा दिया. डायरेक्टर का काम संभालने डेविड धवन भी इस फिल्म पर बाद में आए थे. वहीं स्क्रीनप्ले के लिए फिर से अनीस बज़्मी को बुलाया गया. आंखें ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई और बॉलीवुड को इसी के साथ नए कॉमेडी आइकॉन मिल गए.

उम्र के सेकंड हाफ में लोग पहलाज निहलानी को फिल्म सेंसर बोर्ड में उनके विचित्र और सख्त फैसलों के लिए आलोचना करते हुए याद करते हैं. मगर बतौर प्रोड्यूसर उनके लाए हुए गोविंदा ने लंबे समय तक बॉलीवुड की कॉमेडी का लेवल ऊंचा रखा. चंकी पांडे आज भी फिल्मों में कॉमेडी कर रहे हैं.

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पहलाज भले ही दुनिया से विदा ले चुके हैं, लेकिन उनके भरोसेमंद साथी रहे डेविड धवन और अनीस बज़्मी अभी भी इंडस्ट्री में कमाल कर रहे हैं. डेविड की आखिरी फिल्म है जवानी तो इश्क होना है बस रिलीज होने को है, और भूल भुलैया फ्रेंचाइजी से धमाके कर रहे अनीस बज़्मी फिर से अपने वेलकम (2007) को-स्टार अक्षय कुमार के साथ एक बड़ी फिल्म बना रहे हैं.

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