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क्या रणवीर और आदित्य की धुरंधर जोड़ी ने बॉलीवुड का जुहू-बांद्रा वाला किला फतह कर लिया है?

जाकिर खान के एक जोक के बाद धुरंधर 2 की सफलता को लेकर बॉलीवुड में लीगेसी वर्सेज आउटसाइडर की बहस फिर शुरू हो गई है. बहुत लोग आदित्य धर और रणवीर सिंह को बॉलीवुड में जुहू-बांद्रा का किला फतह करने वाले योद्धा के रूप में देख रहे हैं. लेकिन क्या सच में इंडस्ट्री में ऐसा कोई महायुद्ध चलता है?

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क्या धुरंधर की कामयाबी ने जुहू-बांद्रा वाले बॉलीवुड को हिला डाला है? (Photo: ITGD)
क्या धुरंधर की कामयाबी ने जुहू-बांद्रा वाले बॉलीवुड को हिला डाला है? (Photo: ITGD)

आदित्य धर का नाम एक बार फिर विवादों में है. इस बार धुरंधर 2 की पॉलिटिक्स के लिए नहीं, बल्कि इस फिल्म पर शुरू हो रही पॉलिटिक्स को लेकर. वो भी आदित्य ने खुद नहीं शुरू की, उनकी तरफ से लोग शुरू कर रहे हैं. और इसकी वजह है जाकिर खान का एक जोक. 

हाल ही में एक अवॉर्ड फंक्शन होस्ट कर रहे जाकिर ने एक जोक किया, जिसका सार था कि धुरंधर की सक्सेस ने बॉलीवुड के पावर सेंटर को हिला कर रख दिया है. जाकिर के इस जोक ने फिर से सोशल मीडिया की फेवरेट बहस ट्रिगर कर दी है— इनसाइडर वर्सेज आउटसाइडर. वॉर-पठान बनाने वाले डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद  का इस जोक के खिलाफ बोलना, आग में घी का काम करने लगा. लोग एक के बाद एक पोस्ट दागने लगे. लेकिन क्या धुरंधर के मामले में इस बहस की कोई जरूरत भी है?

जाकिर का जोक और जुहू-बांद्रा का भूकंप!
जहां धुरंधर 2 इन दिनों थिएटर्स में धमाल मचा रही है, वहीं इसका पहला पार्ट एक अवॉर्ड शो की वजह से खूब चर्चा में आ गया जिसकी तीन बड़ी वजहें थीं— धुरंधर ने इस अवॉर्ड शो में दर्जन भर से ज्यादा अवॉर्ड जीते. धुरंधर की टीम की तरफ से ये अवॉर्ड लेने कोई नहीं गया. और धुरंधर की सक्सेस पर जाकिर के जोक से बॉलीवुड में काफी खलबली मच गई.

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जाकिर ने जोक करते हुए कहा, 'कितने ही बधाइयों वाले पोस्ट आप डाल दें, कितनी ही स्टोरी डाल दें, कितने ही पब्लिक इंटरव्यूज में कह दें कि मेरी फेवरेट फिल्म है... लेकिन सच तो ये है कि दोस्तों धुरंधर से सबकी जली तो है! बम फिल्म में फूटे लयारी में, और धुआं हुआ है बांद्रा से जुहू में!'

इस जोक में जुहू और बांद्रा सिर्फ मुंबई की दो लोकेशन नहीं हैं, बॉलीवुड का पावर सेंटर हैं. अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान तक तमाम सुपरस्टार और आदित्य चोपड़ा से लेकर करण जौहर तक तमाम बड़े प्रोड्यूसर, इसी जुहू-बांद्रा में रहते हैं. इन बड़े फिल्मी लोगों के घर-दफ्तर का होना और फिल्मी परिवारों की विरासत जुहू-बांद्रा को बॉलीवुड का पावर सेंटर बनाती है.

जाकिर के जोक ने सोशल मीडिया को फिर से बॉलीवुड के पावर सेंटर को घेरकर ट्रोल करने वालों को हौसला दिया. उनके जोक का ईंधन बनाकर बहुत लोग फिर से जुहू-बांद्रा सेलिब्रिटीज पर बरसने लगे जैसे कोई बदला लेना चाहते हों! लेकिन क्या सच में जाकिर के जोक पर सवार होकर बॉलीवुड के किले पर हमले करने की कोई जरूरत है?

धुरंधर की सक्सेस बॉलीवुड के फिल्ममेकिंग या स्टोरीटेलिंग स्टाइल को बदल देने वाली बड़ी घटना है. लेकिन ये इंडस्ट्री का पावर सेंटर हिला देने जैसी घटना नहीं है. इसकी दो बड़ी वजहें हैं— इंडस्ट्री का पावर सेंटर अब पहले जैसा नहीं रहा. और आज जो पावर सेंटर है, रणवीर सिंह और आदित्य धर भी उसी का हिस्सा ही हैं, उसके लिए चैलेंज नहीं.

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ऐसा इसलिए नहीं है कि आदित्य या रणवीर खुद भी उसी जुहू-बांद्रा इलाके में रहते हैं! बल्कि इसलिए कि जुहू-बांद्रा तभी पावर सेंटर था जब तक बॉलीवुड के बिजनेस पर फिल्मी लीगेसी वाले परिवारों का पूरा दबदबा था. पिछले 10-15 सालों में ये दबदबा कमजोर हुआ है. आदित्य चोपड़ा का यश राज फिल्म्स हो, करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शंस या साजिद नाडियाडवाला का नाडियाडवाला ग्रैंडसन्स... इंडस्ट्री के लीगेसी प्रोडक्शन हाउस पिछले एक दशक से स्ट्रगल करते नजर आ रहे हैं.

बॉलीवुड का पावर शिफ्ट
शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर इन लीगेसी प्रोडक्शन कंपनियों से नहीं निकली हैं. 2010 के बाद से शाहरुख की सबसे बड़ी फिल्में और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर जवान, उन्हीं की होम प्रोडक्शन हैं. आमिर भी अब अपनी ज्यादातर फिल्में खुद प्रोड्यूस करते हैं. सलमान का यश राज से की ब्लॉकबस्टर मिली हैं. लेकिन दोनों का आखिरी कोलेबोरेशन टाइगर 3 फ्लॉप होते-होते बचा है, ब्लॉकबस्टर होने की बात तो दूर है. करण जौहर की प्रोड्यूस की हुई कोई भी फिल्म कभी बॉलीवुड के चार्ट्स में टॉप पर नहीं रही.

इस बीच बैंकिंग की नौकरी छोड़कर आए दिनेश विजन का मैडॉक फिल्म्स आज बॉलीवुड के टॉप प्रोडक्शन हाउसेज में से एक है. फरहान अख्तर के एक्सेल एंटरटेनमेंट का जावेद अख्तर से कोई लेना देना नहीं है. टूथब्रश कंपनी से शुरुआत करने वाले रॉनी स्क्रूवाला का बैनर RSVP मूवीज, कुछ क्रांतिकारी फिल्में प्रोड्यूस कर चुका है और आज बड़ा नाम है. अब ये इंडस्ट्री कुछ गिने-चुने सुपरस्टार्स, प्रोड्यूसर्स या डायरेक्टर्स के इर्दगिर्द नहीं घूमती. बॉलीवुड में पावर का ईकोसिस्टम बहुत खुल चुका है.

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20 सालों से बॉलीवुड में मेहनत कर रहे आदित्य धर को उसी जुहू-बांद्रा पावर ईकोसिस्टम ने सपोर्ट किया था, जिसे ट्रोल करने के लिए लोग उनकी फिल्म का सहारा ले रहे हैं. 2016 में आदित्य धर की पहली फिल्म करण जौहर ही प्रोड्यूस कर रहे थे. उरी अटैक के बाद माहौल बदला तो पाकिस्तानी कलाकारों की एंट्री बंद हुई. इसलिए फवाद खान के साथ ये फिल्म नहीं बन सकती थी. लेकिन आदित्य की अगली स्क्रिप्ट, उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक को प्रोड्यूसर रॉनी स्क्रूवाला का साथ कुछ दिन बाद ही मिल गया था.

आदित्य की धुरंधर फ्रेंचाइजी को बड़े प्रोडक्शन हाउस जियो स्टूडियोज ने प्रोड्यूस किया. आदित्य के पहले हीरो विक्की कौशल, उरी से पहले ही जुहू-बांद्रा वालों के रडार पर आ चुके थे. करण जौहर के साथ उनका पहला कोलेबोरेशन राजी में हुआ था. उरी के प्रोड्यूसर रॉनी के साथ विक्की पहले, लव पर स्क्वायर फीट कर चुके थे.

आदित्य के दूसरे हीरो रणवीर सिंह तो निकले ही यश राज फिल्म्स से. रणवीर सिंह की पहली 10 फिल्मों में से 5 इस लीगेसी प्रोडक्शन हाउस से बनी थीं. एक्टर्स में रणवीर, विक्की का नाम; डायरेक्टर्स में आदित्य धर, संदीप रेड्डी वांगा और लक्ष्मण उतेकर का नाम लेकर सोशल मीडिया हैंडल्स जुहू-बांद्रा वाले लोगों को ट्रोल करने के लिए खूब इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इन नामों को जुहू-बांद्रा ने कितना सपोर्ट दिया है ये देखने के लिए नजर और सब्र रखना पड़ता है, जो लॉकडाउन के बाद से एक मुश्किल काम बन गया है. 

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बॉलीवुड हेट का दौर 
सुशांत सिंह राजपूत का दुखद तरीके से दुनिया से जाना, बॉलीवुड का समीर वानखेड़े काल और आर्यन खान का अरेस्ट इस बॉलीवुड हेट की जड़ बना था. रिसर्च बताती है कि लॉकडाउन में लोग सोशल मीडिया पर पहले से कहीं ज्यादा वक्त बिता रहे थे. ग्लैमर इंडस्ट्री की चमक-दमक को मोरल पुलिसिंग के चश्मे से देखने वाली साधारण जनता को, बॉलीवुड हेट फैलाने वालों ने खूब भुनाया. इन सभी मामलों में कुछ हासिल नहीं निकला. लेकिन नए-नए यूट्यूबर्स, इंफ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया हैंडल्स ने जमकर लाइक-कमेंट कमाए.

बॉलीवुड के प्रति नफरत बिक रही थी, लोग बेच रहे थे. दर्शकों का परसेप्शन ऐसा बदला कि कई एक्टर्स के करियर डूबने को आ गए थे. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री उस दौर से भी उबर आई. फिर भी बॉलीवुड हेट के कुछ बादल आज भी मंडराते रहते हैं. जाकिर खान के जोक ने उन्हीं बादलों में पिन मार दी. लेकिन वो बस एक जोक था, जो धुरंधर की तारीफ से बचते बॉलीवुड के बड़े नामों पर व्यंग्य था. 

इसकी वजह आदित्य धर या रणवीर को लेकर किसी जलन से ज्यादा, फिल्म की पॉलिटिक्स लगती है. और जुहू-बांद्रा वालों का ये रिकॉर्ड रहा है कि वो पॉलिटिकल होने से बचते हैं. इसी आदत ने उन्हें सालों-साल, बदलती सरकारों के बावजूद बिजनेस में ऊपर बनाए रखा है. ये इंडस्ट्री का सर्वाइवल इंस्टिंक्ट है, किसी आउटसाइडर से जलन नहीं. इसलिए असली फिल्मचियों को यही चाहिए कि फिल्म देखें, उसके अच्छे-बुरे पर जमकर चर्चा करें. लेकिन सोशल मीडिया की भट्टी से निकली तपती नेगेटिव कमेंट्री से बचें. हैप्पी मूवीज!

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