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क्या इस वजह से ईद पर रिलीज का मौका नहीं चूकना चाहते थे 'धुरंधर 2' के मेकर्स?

‘धुरंधर 2’ ने जबसे ईद की रिलीज डेट अनाउंस की थी तबसे हंगामा मचा हुआ था. ये तब जाकर थमा जब 19 मार्च के लिए डेढ़ साल पहले से शिड्यूल 'टॉक्सिक' नहीं हट गई. आखिर ईद पर ही रिलीज के लिए इतना जोर देने की वजह क्या थी? इसका जवाब फिल्म के कंटेंट में छुपा है.

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'धुरंधर 2' को ईद पर रिलीज होने से क्यों होगा फायदा? (Photo: Instagram/@officialjiostudios)
'धुरंधर 2' को ईद पर रिलीज होने से क्यों होगा फायदा? (Photo: Instagram/@officialjiostudios)

थिएटर्स में रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' का पहला शो शुरू होने में अब करीब 24 घंटे ही बचे हैं. बुधवार शाम से इसके पेड प्रीव्यू शुरू होते ही सोशल मीडिया पर 'धुरंधरनामा' की बाढ़ आ जाएगी. ये फिल्म ईद पर जैसा धमाका करने की तैयारी में नजर आ रही है, उससे बार-बार ये बात याद आती है कि इस 19 मार्च की रिलीज डेट पर 'धुरंधर 2' के मेकर्स ने कैसे अंगद की तरह पांव जमाए थे. सुपरस्टार यश की 'टॉक्सिक' से क्लैश के लिए भी मेकर्स तैयार थे, जबकि उससे खुद की ही फिल्म का पोटेंशियल थोड़ा कमजोर होता. लेकिन आखिर 'धुरंधर 2' को ईद पर ही आने की ऐसी क्या जिद थी? इसका जवाब फिल्म के कंटेंट में छुपा है.

क्यों 'धुरंधर 2' के लिए परफेक्ट है ईद रिलीज?
हर फिल्म की कहानी का एक कल्चर होता है. बॉलीवुड ज्यादातर अर्बन ड्रामा बनाता है. शहरी माहौल में घटने वाली ऐसी कहानियां जो कल्चर के हिसाब से बहुत पक्की नहीं होतीं, इसलिए कभी भी रिलीज हो सकती हैं. लेकिन कहानी में कल्चर जुड़ते ही उसकी वैल्यू अलग हो जाती है, जो फिल्म की मार्केटिंग में भी एक नेचुरल टूल का काम करता है.

जैसे देओल्स की फिल्म 'यमला पगला दीवाना' (2011) बहुत पंजाबी कल्चर में सेट थी. तभी इसके लिए 14 जनवरी को लोहड़ी के पास रिलीज होना ज्यादा सेंसिबल था. पंजाब में हुए सारागढ़ी की लड़ाई में कुर्बानी देने वाले सिखों की कहानी कहती 'केसरी' का बैसाखी पर आना एक कल्चरल हुक बनता है. 'पठान' (2023) जैसी देशभक्ति की सेंट्रल थीम वाली फिल्म के लिए गणतंत्र दिवस के करीब 25 जनवरी की डेट परफेक्ट थी.

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ईद मुस्लिम समुदाय के लिए साल का सबसे बड़ा त्योहार होता है. सलमान खान इंडिया के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं और सुपरस्टार हर जाति-धर्म वाले फिल्म दर्शक के सपोर्ट से ही बनते हैं. लेकिन 'भाईजान' सलमान का ईद पर फिल्म लेकर आना मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष रूप से एक कल्चरल कनेक्ट की वजह बनता है.

ऐसे ही 'धुरंधर' एक पूरे समुदाय के कल्चर को स्क्रीन पर सेलिब्रेट करती है. पहनावा, खानपान, बोली-बर्ताव की तहजीब, नमाज पढ़ते-कुरान का ज्ञान शेयर करते किरदार... 'धुरंधर' की कहानी में मुस्लिम कल्चर का सेलिब्रेशन बनता है. और हमजा आली मजारी (रणवीर सिंह का किरदार) जैसे हीरो को भला कौन अपना आइकॉन नहीं बनाना चाहेगा. इसलिए तीन दिन तक चलने वाला ईद का सेलिब्रेशन 'धुरंधर 2' के लिए एक तगड़ा कल्चरल कनेक्ट लेकर आएगा. मगर 19 मार्च की रिलीज से 'धुरंधर 2' के मेकर्स ने सिर्फ एक त्योहार या कल्चर को ही नहीं साधा है. इस रिलीज डेट का एक और फायदा है.

हिंदू नववर्ष की शुरुआत का भी फायदा
19 मार्च से नया विक्रमी संवत भी शुरू होगा, जिसे आम भाषा में लोग हिंदू न्यू ईयर भी बोलते हैं. इस न्यू ईयर को साउथ में उगादि और महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा जैसे त्योहारों के साथ सेलिब्रेट किया जाता है. दूसरी जगहों पर भी इस मौके को अलग-अलग त्योहारों के साथ सेलिब्रेट किया जाता है. कई जगहों पर इस दिन छुट्टी भी होती है. और छुट्टी वाले सेलिब्रेशन का मूड किसी फिल्म के लिए बहुत मायने रखता है. 'धुरंधर 2' को इसका भी फायदा होगा.

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इस बार फिल्म साउथ की चार बड़ी भाषाओं में डबिंग के साथ आ रही है और वहां के दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने की तगड़ी कोशिश में है. उगादि की रिलीज इसमें 'धुरंधर 2' के लिए फायदेमंद होगी. 19 मार्च को गुरुवार है और कई त्योहारों के सेलिब्रेशन वाले मूड के साथ-साथ फिल्म को लंबे वीकेंड का तगड़ा फायदा मिलेगा. इसीलिए कहानी के कल्चरल कनेक्ट के साथ बिजनेस के नजरिए से भी ईद-उगादि-गुड़ी पड़वा का कॉम्बिनेशन 19 मार्च को बहुत महत्वपूर्ण रिलीज डेट बना देता है.

शायद इसीलिए 'धुरंधर 2' के मेकर्स 19 मार्च की डेट छोड़ने के लिए हरगिज तैयार नहीं थे. उनकी इस जिद का फायदा फिल्म की एडवांस बुकिंग में ही नजर आने लगा है. अब देखना है कि रिलीज के बाद 'धुरंधर 2' कितने रिकॉर्ड्स तबाह करती है.

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