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'धुरंधर' के सेट पर कंडोम का हुआ इस्तेमाल, खून के छींटे दिखाने थे एकदम असली, एक्शन डायरेक्टर ने बताया

आदित्य धर की फिल्म धुरंधर साल की बहुत ज्यादा चर्चा हुई. शूटिंग लोकेशन से लेकर पीक डिटेलिंग तक वाले सीन. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मूवी में खून-खराबे वाले सीक्वेंस कैसे बनाए गए थे? एक्शन डायरेक्टर ने किया खुलासा.

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फिल्म धुरंधर के एक्शन सीन कैसे शूट हुए? (Photo: x/@jiostudios)
फिल्म धुरंधर के एक्शन सीन कैसे शूट हुए? (Photo: x/@jiostudios)

फिल्मों में जब हम बड़े पर्दे पर गोलियां चलते और हीरो या विलेन के शरीर से खून निकलते देखते हैं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. अब हाल ही में फिल्म 'धुरंधर' के एक्शन सीन को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सबको हैरान कर दिया है. फिल्म के एक्शन डायरेक्टर एजाज गुलाब ने बताया कि स्क्रीन पर दिखने वाले 'बुलेट हिट' (गोली लगने के निशान) के पीछे कितनी तकनीकी मेहनत और अनोखे जुगाड़ छिपे होते हैं.

Digital Commentary संग बातचीत में उन्होंने खुलासा किया कि इस प्रभाव को असली जैसा दिखाने के लिए कंडोम और खास इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर्स का इस्तेमाल कैसे किया जाता है. यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन सिनेमाई दुनिया में सुरक्षा और रियलिटी के बीच बैलेंस बनाने का यह एक बेहद सटीक तरीका है.

बुलेट हिट के पीछे का असली साइंस
अक्सर लोगों को लगता है कि फिल्मों में गोली लगने के सीन किसी साधारण तरीके से फिल्माए जाते हैं, लेकिन एजाज गुलाब बताते हैं कि यह पूरी तरह से एक तकनीकी प्रक्रिया है. इसे 'बुलेट हिट इफेक्ट' कहा जाता है. इसमें एक्टर के कपड़ों के नीचे एक छोटा सा सेटअप लगाया जाता है. जब सीन में गोली चलती है, तो एक रिमोट कंट्रोल या इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर के जरिए उस सेटअप को ब्लास्ट किया जाता है, जिससे पर्दे पर ऐसा लगता है जैसे सच में गोली शरीर के आर-पार हुई हो.

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कंडोम का इस्तेमाल
एजाज ने बताया कि इस पूरे इफेक्ट को सुरक्षित और असरदार बनाने के लिए अक्सर कंडोम का इस्तेमाल किया जाता है. इनके अंदर नकली खून (लाल रंग का लिक्विड) भरा जाता है. चूंकि कंडोम का मटेरियल बहुत पतला और लचीला होता है, इसलिए जब इसके पीछे लगा छोटा सा पटाखा (स्क्विब) फटता है, तो यह बिना किसी मलबे या कठोर टुकड़ों के फट जाता है और खून के उड़ते छींटे एकदम असली जैसा दिखता है. यह तकनीक बरसों से फिल्म इंडस्ट्री में इस्तेमाल हो रही है क्योंकि यह सस्ती भी है और सुरक्षित भी.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
हालांकि एक्शन सीन फिल्माना जितना रोमांचक दिखता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है. एजाज के मुताबिक, एक्टर की त्वचा को किसी भी तरह के बिजली के झटके या जलने से बचाने के लिए कई सेफ्टी लेयर्स का इस्तेमाल किया जाता है. कपड़ों के नीचे मेटल की प्लेट्स या खास पैडिंग लगाई जाती है ताकि जब धमाका हो, तो उसका असर एक्टर के शरीर तक न पहुंचे. टाइमिंग का सही होना इस पूरे खेल की जान है; अगर ट्रिगर एक सेकंड भी इधर-उधर हुआ, तो पूरा सीन और सुरक्षा दोनों बिगड़ सकते हैं.

क्या पटाखे से चोट नहीं लगती?
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि क्या पटाखे फटने पर स्टंटमैन घायल नहीं होते? इस पर बॉलीवुड के मशहूर एक्शन डायरेक्टर और स्टंटमैन गुरबचन सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'सिर्फ छोटे पटाखों का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं होता. लेकिन हो सकता है कि कुछ खरोंचें आ जाएं, लेकिन वे सहने लायक होती हैं. वैसे भी, यह हमारे पेशे का एक हिस्सा है और उन दूसरी मुश्किलों के मुकाबले, जिनका सामना स्टंटमैन को शूटिंग के दौरान करना पड़ता है, यह तो एक बहुत छोटी सी बात है.' 'हां, कभी-कभी एक्सीडेंट हो जाते हैं, ऐसे मामलों में, प्रोड्यूसर्स के अलावा, स्टंटमैन की एसोसिएशन भी मेडिकल खर्च उठाती है.' 

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खैर, फिल्म धुरंधर में भारी खून खराबा और गोलीबारी देखने को मिली. जिसे लोगों ने काफी पसंद भी किया. इन सब के बीच एजाज गुलाब का यह खुलासा हमें बताता है कि पर्दे पर दिखने वाला हर खून का कतरा और हर धमाका केवल विजुअल इफेक्ट्स नहीं होता, बल्कि उसके पीछे स्टंट डायरेक्टर्स की बारीक सोच और सुरक्षा से जुड़े कड़े प्रोटोकॉल होते हैं.

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