सबसे आइकॉनिक वॉर फिल्मों में से एक 'बॉर्डर' के सीक्वल के लिए लोग सिर्फ उत्साहित ही नहीं थे, शक में भी थे— सिर्फ सीक्वल बनाने की होड़ कहीं पुरानी याद खराब ना कर दे! लेकिन 'बॉर्डर 2' उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर निकली. सनी देओल को फिर से फौजी अवतार में लेकर आई 'बॉर्डर 2' पहले दिन से ही ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस फतह कर रही है, बल्कि लोगों का दिल भी खूब जीत रही है.
लोग सनी देओल की तारीफ करते नहीं थक रहे कि उन्होंने कैसे पूरी फिल्म का वजन अपने मजबूत कंधों पर संभाला है. मगर 'बॉर्डर 2' देखकर निकला हर दर्शक सनी देओल के साथ-साथ फिल्म के एक और स्टार से इंप्रेस होकर घर लौट रहा है— दिलजीत दोसांझ.
फिल्म का दिल है दिलजीत का किरदार
दिलजीत दोसांझ 'बॉर्डर 2' में निर्मलजीत सिंह सेखों का किरदार निभा रहे हैं. उनका रोल, इंडियन एयर फोर्स के इतिहास में एकमात्र परमवीर चक्र विजेता रहे, रियल लाइफ शहीद ऑफिसर पर बेस्ड है. हालांकि, 'बॉर्डर 2' फिल्म है तो कुछ क्रिएटिव लिबर्टी भी ली ही गई होगी.
'बॉर्डर 2' का पूरा फर्स्ट हाफ किरदारों की आपसी बॉन्डिंग, पर्सनल लाइफ, दोस्ती और परिवार का प्यार दिखाता है. युद्ध वाले पोर्शन में जनता को किरदारों से जोड़े रखने में स्क्रीनप्ले की तैयार की हुई यही जमीन काम आती है. इस फर्स्ट हाफ में दिलजीत का किरदार पूरी फिल्म को एकसाथ बांधे रखता है. सनी देओल तो 'बॉर्डर 2' की जान हैं ही, वरुण धवन और अहान शेट्टी ने भी अपने काम से इंप्रेस किया है. मगर दिलजीत का किरदार और काम सिर्फ आपको इंप्रेस नहीं करता, दिल में घर कर जाता है.
कॉमेडी से हिम्मत तक, प्यार से परिवार तक— दिलजीत का रंग
'बॉर्डर 2' की कहानी फ्लैशबैक से शुरू होती है जहां फिल्म के तीनों यंग किरदार, ऑफिसर सनी के अंडर ट्रेनिंग ले रहे हैं. दिलजीत की शानदार नेचुरल कॉमिक टाइमिंग इस हिस्से को मजेदार बना देती है. वॉर फिल्मों के किरदार मोस्टली एक ही डायमेंशन में चलते हैं— युद्ध के लिए वो जिंदगी में क्या पीछे छोड़कर आए हैं, ये इमोशन फील कराने के लिए ही उनकी पर्सनल लाइफ दिखाई जाती है.
सेखों का किरदार भी इसी सफर से गुजरता है. लेकिन दिलजीत की नेचुरल कॉमिक टाइमिंग, उनके तेवर और दमदार एक्टिंग इस किरदार में कई डायमेंशन जोड़ देती है. एक पल में वो अपनी शादी की रात युद्ध की घोषणा रेडियो पर सुनकर गंभीर दिखते हैं. तो दूसरे ही पल उसी गंभीरता के साथ अपने दोस्तों से कहते हैं— 'पंजाबियों की शादी बिना लड़ाई के हो ही नहीं सकती.' थिएटर्स में बैठी जनता हंसने भी लगती है और कुछ देर पहले सहरा बांधकर, घोड़ी पर चढ़े दिखे लड़के के इमोशन को फील भी कर लेती है.
बात सिर्फ कॉमेडी की नहीं है, तेवर की भी है. इसी तेवर की वजह से सेखों की शादी हुई थी. रिश्तों से इनकार करते दिख रहे सेखों का पिघलना, उनके जट्ट तेवर और आत्मसम्मान को दिखाता है. 'लोग ऊपर देखते हैं तो आसमान दिखता है, दुश्मन ऊपर देखता है तो सेखों दिखता है' जैसे डायलॉग इस किरदार को यादगार बना देते हैं.
सेखों अपने यारों के बीच बच्चों की तरह मुस्कुराता हुआ सॉफ्ट भी दिखता है. और देश की रक्षा के लिए इतना डटा हुआ भी है कि पाकिस्तानी प्लेन जब एयरबेस पर हमला करते हैं, तो वो अकेले ही उड़ान भरने का फैसला करता है. दिलजीत की एक्टिंग इस जुर्रत को इतना भरोसेमंद बना देती है कि 1971 की इस रियल घटना को देखकर कहीं भी फिल्मी बनावट महसूस नहीं होती.
पिता के साथ उनका रिश्ता, पैसे लेने से मना करना और फिर प्यार से स्वीकार करना— ये सीन्स सिर्फ फिल्म का इमोशनल सेंटर नहीं हैं, दिलजीत की एक्टिंग का सॉलिड सबूत भी हैं.
'उड़ता पंजाब' (2016) और 'चमकीला' (2024) में दिलजीत अपनी एक्टिंग साबित कर चुके थे. लेकिन 'बॉर्डर 2' जैसी मास फिल्म उन्हें उन दर्शकों तक ले जाती है जहां शहरी सिनेमा नहीं पहुंच पाता. यही वजह है कि 'बॉर्डर 2' दिलजीत दोसांझ के स्टारडम की शुरुआत बन सकती है— ऐसा स्टारडम, जो हीरो के नाम भर से थिएटर्स तक भीड़ खींच लाता है.