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जब चली गई थी नरेंद्र चंचल की आवाज, बोले मां ने दी सजा, सिर पर चढ़ गया शोहरत का नशा

नरेंद्र चंचल की लाइफ से जुड़ा एक बेहद रहस्यमयी और डराने वाला वाकया आज भी उनके फैंस के बीच चर्चा का विषय रहता है. कहते हैं कि सफलता पाने के बाद एक बार उनके मन में अहंकार ने दस्तक दी थी.

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नरेंद्र चंचल का फेमस किस्सा (Photo: ITG)
नरेंद्र चंचल का फेमस किस्सा (Photo: ITG)

भक्ति संगीत की दुनिया में जब भी माता के भजनों का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम जो जहन में आता है, वो है नरेंद्र चंचल. अपनी आवाज से करोड़ों भक्तों के दिलों में जगह बनाने वाले नरेंद्र चंचल सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि आस्था का एक प्रतीक बन गए थे. लेकिन उनकी सफलता की इस कहानी के पीछे कुछ ऐसे अनसुने और हैरान कर देने वाले किस्से भी छिपे हैं.

नरेंद्र चंचल ने न केवल धर्म और भक्ति के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई बल्कि बॉलीवुड की चकाचौंध में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया. लेकिन आज हम उनके लाइफ के उसी मोड़ की बात कर रहे हैं, जिसने उनके सोचने का नजरिया ही बदल दिया था.

रातों-रात स्टार बने नरेंद्र चंचल
नरेंद्र चंचल मुख्य रूप से माता रानी के भजनों और दुर्गा पूजा के गीतों के लिए घर-घर में फेमस थे, लेकिन उनकी प्रतिभा केवल भजनों तक सीमित नहीं रही. हिंदी सिनेमा में उन्हें असली पहचान मिली ऋषि कपूर की सुपरहिट फिल्म 'बॉबी' से. इस फिल्म का गाना 'बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो' इतना लोकप्रिय हुआ कि इसने नरेंद्र चंचल को रातों-रात फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा सितारा बना दिया.

इस गाने के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड भी मिला. इंडस्ट्री में इतना बड़ा नाम और स्टारडम मिलने के बाद उन्हें बॉलीवुड में काफी ऑफर मिलने लगे. देश-विदेश में कॉन्सर्ट होने लगे. लेकिन चंचल को सफलता रास नहीं आई.

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भजन गाने से किया इनकार
फिल्मों में काम मिलने के बाद नरेंद्र चंचल ने भजन और माता के गीत नहीं गाने का मन बनाया. एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा था, 'मुझे फिल्मी गानों से काफी शोहरत और पैसा मिल रहा था. इसके बाद मैंने फैसला किया कि अब भजन नहीं , सिर्फ फिल्मों के ही गाने गाऊंगा. सफलता का नशा सिर चढ़ गया था.'

नरेंद्र चंचल ने आगे कहा, 'एक दिन मैं फिल्म म्यूजिकल नाइट के लिए आगरा गया था. उससे पहले काली माता मंदिर के आगे माथा टेकने गया. यहां मैं माता के गीत भी गाता था. वहां कुछ भक्त-कीर्तन कर रहे थे. उन्होंने मुझसे एक भजन गाने के लिए कहा. तब मैंने तबीयत का बहाना बनाया और बिना गाना गाए वहां से लौट आया.  लेकिन उस रात ऐसा कुछ हुआ कि मेरी आवाज ही चली गई. मैं समझ गया कि माता रानी ने मुझे मेरी गलती और अहंकार की सजा दे दी है.' 

नरेंद्र चंचल इसके बाद कई महीनों तक बिना आवाज के रहे. उनका लंबा ट्रीटमेंट चला और जब चमत्कारिक रूप से वो ठीक हुए तो उन्होंने सिर्फ भजन गाने का ही फैसला किया. उन्होंने फिल्मों गानों को छोड़ दिया. जिसके बाद उन्होंने फिल्म 'आशा' का 'तूने मुझे बुलाया शेरा वालिए' और 'अवतार का 'चलो बुलावा आया है' गाए और खूब शोहरत पाई.

कौन थे नरेंद्र चंचल?
नरेंद्र चंचल का जन्म पंजाब के अमृतसर की नमक मंडी में 16 अक्टूबर 1940 को हुआ था.  वह धार्मिक पंजाबी परिवार से थे और धार्मिक वातावरण में पले बढ़े थे. उन्हें बचपन से ही भजन और आरती में दिलचस्पी थी और इसीलिए उन्होंने छोटी उम्र में जगरातों में गाना शुरू कर दिया था.  कई सालों तक स्ट्रगल करने के बाद वह बॉलीवुड की म्यूजिक इंडस्ट्री का हिस्सा बने थे. 22 जनवरी 2021 को उनका दिल्ली में निधन हो गया था.

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