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साउथ और बॉलीवुड में क्या है सबसे बड़ा फर्क? अदिति राव हैदरी ने दिया ये जवाब

अदिति ने कहा, "मैं उसके बाद ऐसे लोगों से भी मिली जिन्होंने मेरे लिए रोल लिखे. यदि मुझे परिधियों के परे नहीं धकेला जा रहा है तो इसका मतलब है कि मैं काम नहीं कर रही हूं. चुनौतीपूर्ण किरदार साउथ में ज्यादा होते हैं."

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अदिति राव हैदरी
अदिति राव हैदरी

बॉलीवुड एक्ट्रेस अदिति राव हैदरी ने इंडिया टुडे कॉनक्लेव साउथ 2021 में बताया कि साउथ और नॉर्थ इंडियन सिनेमा के फर्क को लेकर वह क्या सोचती हैं. उन्होंने कहा, "मैं एक डांसर थी और मैंने अपनी शुरुआत साउथ से की. जब से मैंने मणिरत्नम सर की फिल्म की, साउथ से मुझे काम के बहुत से ऑफर मिलने लग गए. काम और दिलचस्प हो गया और मुझे बहुत सारे चुनौतीपूर्ण किरदार मिलने लग गए."

अदिति ने कहा, "मैं उसके बाद ऐसे लोगों से भी मिली जिन्होंने मेरे लिए रोल लिखे. यदि मुझे परिधियों के परे नहीं धकेला जा रहा है तो इसका मतलब है कि मैं काम नहीं कर रही हूं. चुनौतीपूर्ण किरदार साउथ में ज्यादा होते हैं. मैंने उत्तर भारत में भी अच्छे लोगों के साथ काम किया है. अब मैं स्क्रिप्ट्स का चुनाव करने, फैसले लेने और काम की चुनौती को स्वीकार करने को लेकर ज्यादा निर्भीक महसूस करती हूं."

"जहां तक फर्क की बात है तो किसी सेट का मतलब है वो लोग जो इसे सेट बनाते हैं - निर्देशक और बाकी की पूरी टीम. इसका साउथ या नॉर्थ से कोई लेना देना नहीं है. इसका क्षमतावान या क्षमताहीन की भी नहीं है. फर्क इस बात से पड़ता है कि आप क्या बना रहे हैं. मैं पूरे विश्वास से कह सकती हूं कि सारा मामला इस बात का है कि आप लोगों को कैसा महसूस करा रहे हैं. भावनाओं की कोई भाषा, रंग या सीमा नहीं होती."

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संतुष्टि महसूस करना जरूरी

अदिति ने बताया, "बात ये नहीं है कि मेरे रोल या मैं संतुष्टि महसूस करूं. बात ये है कि आप अगली बार मुझे ढूंढते हुए आएंगे या नहीं. पद्मावत जैसी फिल्म जिसमें मुझे सिर्फ 25 मिनट के लिए दिखाया गया है, काट्रू वेलियिदि जितनी खूबसूरत हो सकती है. जिसके हर एक फ्रेम में मुझे दिखाया गया था. मुझे पद्मावत में काम करना बहुत अच्छा लगा था और मुझे पूरी प्रोसेस पसंद आई थी."

सेट पर बच्चे की तरह महसूस करना चाहती हूं

अदिति ने कहा कि जहां तक मात्रा की बात है तो साउत में मेरे द्वारा की गई हर एक फिल्म संतुष्टिजनक और चुनौतीपूर्ण रही है. दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोगों ने मुझे बेहतर बनाया है. हिंदी की बात करूं तो जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ी मैंने और नई चीजें सीखीं. Kaatru Veliyidai के बाद मैं ये समझी कि मुझे खुद को साबित करने की जरूरत नहीं है. सेट पर किसी बच्चे की तरह स्वतंत्र महसूस करना जरूरी है. अगर मैं गिरी तो कोई उठाकर मुझे फिर वहीं बिठा देगा.

 

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