राजनीति में कुर्सी की कसक ऐसी होती है कि नेता अपनों के खिलाफ भी दंगल में कूदने से नहीं कतराते. दिल्ली में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. तिलकनगर से चुनाव लड़ रहे ओ पी बब्बर की चालीस साल की राजनीति पर उनकी खुद की बहू झाड़ू फेरने के लिए मैदान में आ डटी हैं.