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Uttarakhand: सतपाल महाराज बनाम हरक सिंह, चौबट्टाखाल की जंग को रोमांचक बना सकती है कांग्रेस

Uttrakhand Elections 2022: सतपाल महाराज और हरक सिंह रावत उत्तराखंड के बड़े नेता माने जाते हैं. हरक सिंह रावत ने हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में घर वापसी की है.  

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चौबट्टाखाल क्षेत्र में सतपाल महाराज के परिवार का दबदबा रहा है. (फाइल फोटो) चौबट्टाखाल क्षेत्र में सतपाल महाराज के परिवार का दबदबा रहा है. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 4 बार के विधायक हैं हरक सिंह रावत
  • सतपाल महाराज हैं उत्तराखंड के बड़े नेता

उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अब राज्य के बड़े बीजेपी नेता सतपाल महाराज के खिलाफ चौबट्टाखाल सीट से हरक सिंह रावत को उतारने की तैयारी में है. बता दें कि हरक सिंह रावत ने हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में घर वापसी की है.  

शनिवार देर रात कांग्रेस अपने 53 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर चुकी है. हालांकि, इस सूची में हरक सिंह रावत का नाम शामिल नहीं है. सूत्रों की मानें तो पार्टी अब अपने इस नेता के जरिए बीजेपी के दिग्गज नेता और सीएम धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री सतापल महाराज को घेरेगी. 

पौड़ी गढ़वाल जिले का चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र  उत्तराखंड की हॉट सीटों में से एक है. इस पूरे क्षेत्र में महाराज के परिवार का दबदबा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत इस सीट से विधायक रह चुके हैं. इसके अलावा बीजेपी के एक और मुख्यमंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इसी  चौबट्टाखाल के मूल निवासी हैं. इसलिए भारतीय जनता पार्टी के लिए यह सीट काफी अहम है और कांग्रेस इसे हासिल करने के लिए भरसक प्रयास करने से नहीं चूकेगी.

मालूम हो कि उत्तराखंड में पूर्व बीजेपी नेता हरक सिंह रावत  कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियों के कारण रावत को पिछले हफ्ते बीजेपी ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया दिया था.  

2016 में बीजेपी में शामिल हुए थे रावत 

हरक सिंह रावत 2016 में कांग्रेस को छोडकर बीजेपी में गए थे. लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद भी कई मौकों पर उनकी नेतृत्व से तकरार देखने को मिली. अब हरक सिंह ने एक बार फिर कांग्रेस जॉइन कर ली है. 

4 बार से विधायक हैं हरक सिंह रावत

हरक सिंह उत्तराखंड के बड़े नेता माने जाते हैं. वह 2002 में उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद से लगातार चार बार के विधायक हैं. उन्होंने 2002 में लैंसडाउन से चुनाव जीता था. वे 2007 में भी इसी सीट से विधानसभा पहुंचे थे. 2012 में वे रुद्रप्रयाग से चुनाव जीते. बीजेपी के टिकट से कोटद्वार से चुनाव जीते थे. वे उत्तराखंड सरकार में मंत्री भी रहे हैं.   

 

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