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Dharchula Assembly seat: कांग्रेस के हरीश धामी हैं विधायक, दोहरा पाएंगे 2017 का परिणाम?

धारचूला विधानसभा क्षेत्र दुर्गम है. यहां अब भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी समस्याएं हैं. यहां से लगातार दो बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है.

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धारचूला में स्थित नारायण आश्रम.   (File) धारचूला में स्थित नारायण आश्रम. (File)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में है धारचूला विधानसभा क्षेत्र
  • पिछले चुनावों में कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशी से हुई थी बीजेपी की हार
  • विधानसभा का अति दुर्गम क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे अहम मुद्दे

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले (Pithoragarh district of Uttarakhand) की 42 विधानसभा क्षेत्र धारचूला चीन और नेपाल सीमा (China and Nepal border) से सटी विधानसभा है. 2002 से 2007 तक एसटी रिजर्व रही सीट को 2012 में जनरल सीट में तब्दील किया गया था. 2012 में धारचूला विधानसभा क्षेत्र (Dharchula Assembly Constituency) से सूबे के दबंग और बाहुबली विधायक हरीश धामी पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे. धारचूला विधानसभा क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Former Chief Minister Harish Rawat) का भी विधानसभा क्षेत्र रहा है.

2014 में मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत ने धारचूला से विधानसभा का उपचुनाव भारी मतों से जीता था. तब से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का धारचूला क्षेत्र से विशेष लगाव भी रहा है. धारचूला विधानसभा क्षेत्र में उच्च हिमालयी वाले क्षेत्रों में रहने वाली भोटिया जनजाति भी निवास करती है. इस क्षेत्र में विभिन्न संस्कृतियों का समागम एक साथ देखने को मिलता है.

पहले चुनाव में निर्दलीय गगन ने कांग्रेस को हराया था

उत्तराखंड बनने के बाद अस्तित्व में आई धारचूला विधानसभा सीट 2002 से 2007 तक अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व रही. 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Elections) में धारचूला सीट से निर्दलीय उम्मीदवार गगन रजवार ने कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह को लगभग 7667 वोटों से हराकर सबको चौंका दिया था, क्योंकि गगन रजवार एक लकड़हारा का काम करते थे और राजनीति से उनका कोई भी वास्ता नहीं था. चप्पल पहनकर नामांकन करने पहुंचे थे. गगन रजवार पहली बार देहरादून के लिए रोडवेज की बस से रवाना हुए थे.

2007 में गगन ने बीजेपी को दी थी शिकस्त

इसे किस्मत ही कहा जाएगा कि 2007 में भी गगन रजवार ने एक बार फिर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में धारचूला विधानसभा से जीत दर्ज की. इस बार उन्होंने भाजपा (BJP) के कुंडल सिंह डोलिया को 5000 से अधिक वोटों से हराया था. 2007 में इस सीट पर कांग्रेस की शकुंतला दताल तीसरे स्थान पर रहीं थीं. 2012 में धारचूला विधानसभा सीट को अनारक्षित कर दिया गया. 

2012 के चुनाव में कांग्रेस से हार गई थी बीजेपी

2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के युवा उम्मीदवार हरीश धामी ने भाजपा के खुशाल सिंह पिपलिया को 5296 मतों से हराकर पहली बार विधानसभा का रास्ता तय किया. 2014 में हरीश धामी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए विधायकी से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा के बीडी जोशी को 13000 से अधिक मतों से हराकर चुनाव जीता था. हरीश रावत 3 साल धारचूला विधानसभा क्षेत्र (Dharchula Assembly Constituency) के विधायक रहे थे.
 
2017 में 3000 वोटों से चुनाव जीते थे कांग्रेस के हरीश धामी 

हरीश रावत सरकार में वन विकास निगम के अध्यक्ष रहे हरीश धामी ने 2017 में एक बार फिर से धारचूला विधानसभा सीट से ताल ठोंकी थी. तब तक हरीश धामी का कद पूरे प्रदेश में एक दबंग विधायक का हो चुका था. 2017 में हरीश धामी का मुकाबला भाजपा के नए उम्मीदवार वीरेंद्र पाल सिंह के साथ था. सूबे में मोदी लहर थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेता अपनी सीट हार चुके थे. ऐसे में हरीश धामी ने विपरीत परिस्थितियों में भी 3000 वोटों से चुनाव जीतकर कांग्रेस हाईकमान का भरोसा कायम रखा था, जिसके बाद हरीश धामी की लोकप्रियता अपने क्षेत्र में और बढ़ गई.

अति दुर्गम विधानसभा क्षेत्र है, चीन और Nepal से जुड़ी है सीमा  

धारचूला विधानसभा क्षेत्र चीन और नेपाल बॉर्डर से लगा एक अति दुर्गम विधानसभा क्षेत्र है. इस विधानसभा से लगभग 120 किलोमीटर का एरिया नेपाल से मिलता है, वहीं लगभग 200 किलोमीटर सीमा चीन सीमा से सटी हुई है. धारचूला विधानसभा क्षेत्र में हर गांव तक और हर व्यक्ति तक पहुंच पाना काफी कठिन काम है. ऐसे में यहां से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को एक बेहतर टीम बनाते हुए चुनाव का मैनेजमेंट करना होता है. क्षेत्र में व्यक्ति को सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर दूसरे इलाके में पहुंचना होता है.

धारचूला से होकर जाती है कैलाश मानसरोवर यात्रा

धारचूला विधानसभा क्षेत्र (Dharchula Assembly Constituency) में मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसीलों के साथ ही दो विकासखंड भी शामिल हैं. धारचूला विधानसभा क्षेत्र में ही महाकाली नदी का उद्गम स्थान भी है, जिसे लेकर नेपाल कई बार विवाद पैदा कर चुका है. धारचूला लिपुलेख से होकर जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा का अहम पड़ाव भी है. धारचूला विधानसभा क्षेत्र से होकर ही कैलाश मानसरोवर यात्रा चीन में प्रवेश करती है. धारचूला विधानसभा क्षेत्र (Dharchula Assembly Constituency) में ही हिंदुओं का पवित्र धाम आदि कैलाश और ओम पर्वत भी है, जिसे देखने हर साल हजारों यात्री यहां पहुंचते हैं.

व्यापार करने China की तकलाकोट मंडी पहुंचते हैं भारत के व्यापारी

धारचूला से भारत और चीन के बीच विपक्षी व्यापार भी होता है, जहां भारत से व्यापारी चीन की तकलाकोट मंडी पहुंचते हैं और वहां जाकर व्यापार करते हैं. हालांकि कोरोना के बाद से पिछले 2 सालों से यह व्यापार बंद पड़ा है. धारचूला के सीमांत इलाकों में एसएसबी, आइटीबीपी और सेना के जवान साल भर तैनात रहते हैं. वहीं हिमनगरी मुनस्यारी के नाम से विख्यात प्रमुख हिल स्टेशन भी धारचूला विधानसभा क्षेत्र के अंदर ही आता है. भारत नेपाल और चीन का पौराणिक महत्व का प्रमुख व्यापारिक मेला भी धारचूला विधानसभा क्षेत्र के जौलजीबी में लगता है, जो महाकाली नदी का संगम भी है. इस मेले में भारत और नेपाल के दूरदराज से भी लोग पहुंचते हैं. साथ ही यहां तीनों देशों की साझी सांस्कृतिक विरासत भी एक साथ देखने को मिलती है.
 
पूरी तरह से नेटवर्क विहीन है विधानसभा का 50 फ़ीसदी क्षेत्र

संचार क्रांति के इस युग में भी धारचूला विधानसभा क्षेत्र का लगभग 50 फ़ीसदी हिस्सा पूरी तरह से नेटवर्क विहीन है, जबकि यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है. संचार सुविधा का नमूना धारचूला विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा है, लेकिन इतने सालों के बाद बाद भी धारचूला विधानसभा क्षेत्र की समस्या का हल नहीं हो पाया. दूसरी तरफ धारचूला विधानसभा क्षेत्र एक आपदा ग्रस्त विधानसभा भी है. हर साल बरसात से धारचूला क्षेत्र में बारिश से सबसे अधिक नुकसान होता है. इसके अलावा स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा और रोजगार के साथ ही पलायन भी यहां की प्रमुख समस्याएं हैं.

कई गांव सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली से महरूम

इलाके के कई गांवों तक सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली तक नहीं पहुंच पाई है, जिसकी वजह से इन इलाकों में रहने वाले लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता है, साथ ही इन इलाकों में रोजगार का भी कोई संसाधन मौजूद नहीं है. स्थानीय विधायक हरीश धामी ने अपनी विधायक निधि से पैसा रिलीज कर कुछ क्षेत्रों में मोबाइल टॉवर तो अवश्य लगवाए, लेकिन अभी कई इलाके ऐसे हैं, जहां संचार की कोई सुविधा नहीं है. हालांकि 2002 से अब तक धारचूला क्षेत्र का उतना विकास नहीं हो पाया, जो होना चाहिए था.

अभी मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए हायर सेंटर जाना पड़ता है. विधायक हरीश धामी ने अपनी विधायक निधि से कई क्षेत्रों तक सड़क बनवाई है, पर अब भी वे इलाके शिक्षा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं. हालांकि इन 5 सालों के भीतर धारचूला में विकास का कोई भी बड़ा काम नहीं हुआ है.

हरीश धामी ने भाजपा सरकार लगाए अनदेखी के आरोप

हरीश धामी भाजपा सरकार के रुख को लेकर कई बार धरने पर भी बैठ चुके हैं. हरीश धामी का कहना है कि भाजपा सरकार में धारचूला विधानसभा क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है, जिसके चलते वहां के आपदा प्रभावितों को राहत नहीं मिली. आपदा के दौरान ध्वस्त हुई सड़कों और बिल्डिंगों के कार्य भी अधूरे पड़े हुए हैं. विपक्ष के विधायक होने के नाते हरीश धामी पिछले 5 साल से लगातार सरकार को घेरते आए हैं. हालांकि 2012 से 17 तक उनकी सरकार होने के बावजूद भी धारचूला में कोई बड़ा काम नहीं करवा सके.
 
राजपूत मतदाता बनाएंगे हार जीत का माहौल

धारचूला विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 87481 वोटर हैं. 50 फ़ीसदी के आसपास की आबादी राजपूत मतदाताओं की है, जबकि अनुसूचित जाति की 22 फ़ीसदी के आसपास भागीदारी है. वहीं 15 फ़ीसदी वोटर अनुसूचित जनजाति के भी हैं, जबकि 13 फ़ीसदी वोटर ब्राह्मण सहित अन्य जातियों से आते हैं. सामान्य सीट होने के कारण इस सीट पर राजपूत मतदाताओं के बीच ही मुकाबला होना तय है. 2022 मैं होने वाले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा.

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