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उत्तराखंड में AAP के बढ़ते असर से क्यों अंदेशे में कांग्रेस? हरीश रावत भी चिंतित

उत्तराखंड की सियासत में पहली बार किस्मत आजमाने उतरी आम आदमी पार्टी ने कई लोकलुभाने वादे कर रखे हैं. ऐसे में आम आदमी पार्टी की दस्तक और सभी सीटों पर चुनाव लड़ने से कांग्रेस से लेकर हरीश रावत तक चिंतित नजर आ रहे हैं. इसीलिए उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी के साथ वोट कटवा का टैग ना लगाएं. उनको सलाह दूंगा कि वो इस पाप से बचें. 

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हरीश रावत हरीश रावत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में लडे़गी चुनाव
  • AAP की दस्तक से कांग्रेस की बढ़ी चिंताएं
  • क्या कांग्रेस के वोटबैंक में लगा रही AAP सेंध?

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं. बीजेपी अपनी सत्ता बचाने के लिए जद्दोजहद कर रही है तो कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए हाथ पांव मार रही है. वहीं, उत्तराखंड की सियासत में पहली बार किस्मत आजमाने उतरी आम आदमी पार्टी ने कई लोक-लुभाने वादे कर रखे हैं. ऐसे में आम आदमी पार्टी की दस्तक और सभी सीटों पर चुनाव लड़ने से कांग्रेस से लेकर हरीश रावत तक चिंतित नजर आ रहे हैं. 

हरीश रावत चिंतित

कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष व उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत आजतक पंचायत कार्यक्रम में जबरदस्त कॉन्फिडेंस में नजर आए, लेकिन आम आदमी पार्टी के चुनावी मैदान में उतरने से जरूर चिंतित दिखे. आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी के साथ वोट कटवा का टैग ना लगाएं, उनको सलाह दूंगा कि वो इस पाप से बचें. 

हालांकि, साथ ही हरीश रावत ने यह भी कहा कि केजरीवाल डाल-डाल हैं तो हम भी पात-पात हैं. दिल्ली में वो भले ही बेहतर सरकार चला रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड की विभिन्नता को समझने के लिए केजरीवाल को 5-7 साल यहां आकर तपस्या करने की जरूरत पड़ेगी. 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केजरीवाल की पार्टी उत्तराखंड चुनाव में ऐसी स्थिति में आकर खड़ी हो गई है, जिससे कांग्रेस की सत्ता में वापसी का सियासी खेल बिगड़ सकता है. यही वजह है कि हरीश रावत केजरीवाल से वोट कटवा पार्टी के तौर पर पाप करने से बचने की सलाह दे रहे हैं. 

सूबे की सियासत में कांग्रेस-बीजेपी

दरअसल, उत्तराखंड की सियासत अभी तक कांग्रेस और बीजेपी के इर्द-गिर्द सिमटी रही है. उत्तराखंड बनने के बाद से एक सियासी रवायत रही है कि एक बार कांग्रेस और एक बार बीजेपी सरकार बनाती रही है. इन दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के अलावा कोई दल सूबे में अपना सियासी वजूद स्थापित नहीं कर सका. बसपा और कुछ दूसरे क्षेत्रीय दल जरूर एक दो चुनाव में कुछ सीटों पर जीत दर्ज कर पाए, लेकिन 2017 में उनका भी खाता नहीं खुल सका. 

AAP सभी सीटों पर लड़ेगी चुनाव

कांग्रेस और बीजेपी के बीच सिमटी प्रदेश की सियासत में आम आदमी पार्टी ने इस बार सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रखी है. आम आदमी पार्टी के संयोजक व दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल लगातार उत्तराखंड का दौरा कर तमाम लोकलुभाने वादे कर रहे हैं. सत्ता में आने पर 300 यूनिट बिजली फ्री और 5 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने जैसे कई वादे किए हैं. ऐसे में आम आदमी पार्टी की सक्रियता से कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों में बेचैनी है. 

कांग्रेस की चिंता बढ़ना इसीलिए स्वाभाविक है, क्योंकि उत्तराखंड की सियासी रवायत के लिहाज से इस बार सत्ता में वापसी की उसकी बारी है. कांग्रेस अपने अंदरूनी मतभेद के चलते पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर हो गई थी और सिर्फ 11 सीटों तक सिमट गई थी. इस बार बदले सियासी हालत में कांग्रेस को सत्ता में वापसी की उम्मीद जागी है और पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत सूबे में सक्रिय हैं. 

वहीं, सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए बीजेपी ने अपने दो सीएम बदल दिए और तीसरे मुख्यमंत्री के तौर पर पुष्कर सिंह धामी को सत्ता की कमान सौंप रखी है. इसके बावजूद बीजेपी के भीतर से असंतोष की सुगबुगाहट आए दिन सामने आती रहती है. कुछ विधायकों के विवाद और बड़बोलेपन ने भी बीजेपी और सरकार की चिंता बढ़ाई है. उत्तराखंड के इन समीकरणों के बीच आम आदमी पार्टी की धमक से प्रदेश में नए सियासी समीकरण बन सकते हैं. 

आम आदमी पार्टी की सियासी दस्तक

उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी का अब तक का सफर कैसा रहा, ये भी जान लें. साल 2014 में आप ने लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी पांचों सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन निराशा हाथ लगी. अब आम आदमी पार्टी ने साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दे पर सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. ऐसे में आम आदमी पार्टी की रणनीति खुद को राज्य में तीसरी सियासी ताकत के रूप में खड़ा करना है. 

सूबे को लेकर अभी तक मीडिया में सर्वे में कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला होता दिख रहा है और कांटे की लड़ाई है. यही वजह है कि कांग्रेस नेता हरीश रावत को लग रहा है कि आम आदमी पार्टी कहीं सूबे में सत्ता विरोधी वोट में बंटवारा करने में सफल होती है तो उससे कांग्रेस के लिए वापसी की राह मुश्किल न जाए. इसीलिए वो केजरीवाल को सचेत कर रहे हैं कि वो अपनी पार्टी को वोट कटवा न बनने दें. अब देखना है कि 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी सूबे में क्या सियासी गुल खिलाती है?

 

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