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Varanasi Cantt Assembly Seat: कभी नहीं टूटा परिवार का तिलिस्म, बीजेपी को हराना नामुमकिन!

वाराणसी कैंट विधानसभा सीट: इस विधानसभा के राजनीतिक पृष्ठभूमि में कहीं न कहीं भाजपा का वर्चस्व कायम है. मोदी लहर के दौरान ही नहीं बल्कि उसके पहले से ही यहां एक परिवार का कब्जा रहा है.

Uttar Pradesh Assembly Election 2022( Varanasi Cantt Assembly Seat) Uttar Pradesh Assembly Election 2022( Varanasi Cantt Assembly Seat)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मोदी की लहर से पहले भी बीजेपी के खाते में सीट
  • एक परिवार का सीट पर रहा है कब्जा
  • दूसरी पार्टियों के लिए सीट जीतना मुश्किल

वाराणसी कैंट विधानसभा(390), कंटेनमेंट क्षेत्र यानी छावनी क्षेत्र के के तौर पर जाना जाता है. वाराणसी के 8 विधानसभा में सबसे बड़े इस कैंट विधानसभा में 400 से ज्यादा बूथ, दो दर्जन से ज्यादा वार्ड, 2 ग्राम सभाएं- सुल्तानपुर और भीटी, छावनी परिषद और राम नगर पालिका भी है. आकार के अलावा यह सीट राजनीतिक नजरिये से भी महत्वपूर्ण है. यहां पर एक ही परिवार का कब्जा रहा है. 1991 से लेकर भाजपा के एक ही परिवार या यूं कहे पहले मां, फिर पिता, फिर मां और अब बेटे का कब्जा है. कैंट विधानसभा पर पिछले 7 चुनावों से भाजपा के श्रीवास्तव परिवार का कब्जा कायम है. पहले 2 बार ज्योत्सना श्रीवास्तव, उसके बाद उनके पति हरीश चंद्र श्रीवास्तव (2 बार), फिर 2 बार ज्योत्सना श्रीवास्तव और इस बार बेटे सौरभ श्रीवास्तव काबिज हैं.

वाराणसी के कैंट विधासभा में आने वाले इलाकों में लल्लापुरा, सोनिया, काजीपुरा खर्द, सिद्धगिरी बाग छित्तूपुर, सिगरा, शिवपुरवा, महमूरगंज, तुलसीपुर, ककरमत्ता, नेवादा, भिखारीपुर, आदित्यनगर, चितईपुर, सुंदरपुर, सरायनंदन नरिया, सरायनंदन, गायत्रीपुर शुकुलपुरा, बृजइनक्लेब कॉलोनी, जोल्हा, बजरडीहा, देवपोखरी, पटिया, जक्खा, बजरडीहा, बजरडीहा गल्ला बाजार, शंकुलधारा खोजवां, शंकुलधारा, खोजवा, कमच्छा, डेवढ़ियावीर, भेलूपुर, रेवड़ीतालाब, रामापुरा, नईबस्ती, लक्ष्मीकुंड, लक्सा, गोदौलिया, रामापुरा, अगस्तकुंडा, पांडेयघाट, देवनाथपुरा, सोनारपुरा, पांडेय हवेली, भेलूपुर, हनुमानघाट, शिवाला, अस्सी संगम, अस्सी, रविंद्रपुरी कालोनी, नगवा, संकटमोचन, काशी हिंदू विवि, भगवानपुर, रामनगर, भीटी, कैंटोमेंट बोर्ड, कैंटोमेंट, रेलवे स्टेडियम कालोनी, नई बस्ती लहरतारा है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि
वाराणसी कैंट विधानसभा के राजनीतिक पृष्ठभूमि में कहीं न कहीं भाजपा का वर्चस्व कायम है. मोदी लहर के दौरान ही नहीं बल्कि उसके पहले से ही यहां एक परिवार का कब्जा रहा है. सबसे पहले 1974 में इस सीट पर भारतीय क्रांति दल के शतरुद्र प्रकाश फिर 1977 में भी शतरुद्र प्रकाश ही जीते. लेकिन जनता पार्टी से जीते. 1980 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस(आई) से मांडवी प्रसाद सिंह जीते. वहीं 1985 में एक बार फिर शतरूद्र प्रकाश लोकदल से विधायक चुने गए और अगली बार फिर 1989 में उन्होंने जनता दल से बाजी मारी. राजनितीज्ञ शतरुद्र प्रकाश का यह वर्चस्व 1991 में पहली बार भाजपा की महिला उम्मीदवार ज्योत्सना श्रीवास्तव ने तोड़ा. 1993 में वह दोबारा चुनी गई. 1996 में उनके पति हरिश्चंद्र श्रीवास्तव और उसके बाद 2002 में फिर से भाजपा के ही हरिश्चंद्र श्रीवास्तव विजयी हुए.

2007 और 2012 में फिर से भाजपा का टिकट एक बार फिर इस परिवार को मिला और ज्योत्सना श्रीवास्तव वापस दो बार यहां से विधायक हो गईं. इसके बाद 2017 में इस सीट पर हरिश्चंद्र श्रीवास्तव और ज्योत्सना श्रीवास्तव के बेटे सौरभ श्रीवास्तव को परिवारवाद के आरोप के बावजूद, भाजपा आलाकमान ने भरोसा जताया. सौरभ श्रीवास्तव रिकार्ड मतों से चुनाव जीत गए. 

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सामाजिक तानाबाना
2021 के रिकार्ड के मुताबिक वाराणसी कैंट विधानसभा की कुल आबादी 560053 है. जिसमें पुरुष आबादी 299782 है. जबकि महिला आबादी 266689 है. जहां तक मतदाताओं की बात है तो लगभग कुल मतदाता 436897 हैं. जिसमें पुरुष मतदाता 241237 हैं, जबकि महिला मतदाता 195626 और अन्य 34 मतदाता हैं. कैंट विधानसभा का जेंडर रेशियो 811 है और ईपी रेशियो 78.01 है.

जहां तक जातिगत समीकरण देखे तो कैंट विधासभा मिक्स आबादी वाला क्षेत्र है. यहां मुसलमान-100000, ब्राह्मण-35000, बंगाली-40000, कायस्थ-25000, भूमिहार-15000, ठाकुर- 10000,
बनिया-20000, मौर्य-15000, पटेल- 10000, गुप्ता- 5,000, जायसवाल- 5000, यादव- 15000, कनौजिया- 10000, पटवा- 10000, सोनकर- 20000, मल्लाह- 10000, निषाद- 10000, हरिजन- 10000, पंजाबी, सिख, तमिल, तेलुगू, गुजराती 25000 हैं.

विधायक रिपोर्ट कार्ड
वाराणसी के कैंट विधासभा की बात करें तो यहां अभी भी शुद्ध पेयजल और सीवर की समस्या बनी हुई है. शहर का मुख्य हिस्सा होने के बावजूद आज भी यहां अल्पसंख्यक आबादी वाला इलाका बजरडीहा की तस्वीर कुछ खास नहीं बदली. बारिश और जलजमाव के चलते अभी भी इलाके की हालत नरकीय हो जाती है. नई बस्ती से लेकर जक्खा मोहल्लों में तो ड्रेनज सिस्टम फेल होने के चलते इलाका बारिश के दिनों में बजबजाता मिल जाता है. इतना ही नहीं विधानसभा में आने वाली सड़कों में सराय नंदन, खोजवां, देव पोखरी हनुमान मंदिर, तेलियाना, सराय सुर्जन, कुड़िया, छोटी पटिया और सुंदरपुर तक की सड़के उखड़ी हुई मिलेंगी. 

रखरखाव के अभाव में लगी स्ट्रीट लाइट भी काफी हद तक खराब मिलती है. कैंट विधानसभा का बड़ा हिस्सा रामनगर में आता है. लेकिन अभी भी रामनगर के लगभग आधे हिस्से में न तो ड्रेनेज है और न ही सीवरेज है. जलनिगम की पाईपलाइन भी बिछी जरूर है, लेकिन पेयजल के साथ पाइप के डैमेजे होने के चलते दूषित पानी पीकर लोग अक्सर बीमार पड़ जाते हैं. इसके अलावा खोजवा से लेकर किरहिया में स्ट्रीट लाइट के खराब होने की दिक्कत बनी हुई है. तो वहीं सरायनंदन में सड़क पर मलजल अक्सर बजबजाते मिल जाएंगे. लहरतारा में तो थोड़ी सी बारिश लोगों के लीए मुसीबत बनकर आती है और जलनिकासी नहीं होने के चलते लोगों के घरों तक में पानी चला जाता है.  

भाजपा विधायक सौरभ श्रीवास्तव बताते हैं कि बगैर बुनियादी सुविधाओं का संयोजन किए हुए तमाम बनाई गई कॉलोनी को चुनौती के रूप में लिया गया. इन्हीं में से एक भगवानपुर का क्षेत्र है जहां गंगा नदी में बाढ़ के चलते कॉलोनी में बाढ़ का पानी आ जाया करता था. सरकार से बात करके इसका निदान निकाला गया और इलाके में गंगा के बाढ़ के पानी को कॉलोनी में घुसने से रोकने के लिए एक गेट का प्रस्ताव पास हो गया है. लगभग तीन करोड़ की लागत से गेट लगने जा रहा है और पंपिंग स्टेशन से भी नाले का पानी बाहर निकल जाएगा. नदी का जलस्तर बढ़ने पर गेट बंद हो जाएगा. फिर बाढ़ का पानी कॉलोनी में नहीं घुस पाएगा.

नदी किनारे बने हुए वार्ड की पुरानी पेयजल और सीवर लाइन के लिए वार्ड कार्यक्रम योजना के तहत जंगमबाड़ी वार्ड लिया और नई सीवर लाइन नई पेयजल लाइन स्ट्रीट लाइट दीवारों पर पेंटिंग गलियों में खड़ंजा की जगह पीसीसी का इस्तेमाल किया गया और गली को घर की फर्श की तरह बना दिया गया. क्षेत्र में पेयजल की समस्या के लिए 12 ट्यूबवेल पास कराए गए हैं, जिसमें आधे से ज्यादा लग गए हैं और बाकी बचे ट्यूबवेल कुछ दिनों में लग जाएंगे. अब पेयजल की समस्या से मुक्ति मिल गई है.

विविध
मौजूदा भाजपा विधायक सौरभ श्रीवास्तव की मां बंगाली ब्राह्मण और पिताजी हिंदी भाषी कायस्थ हैं. इस विधानसभा में दोनों ही वर्गों में मतों की संख्या सबसे ज्यादा है. जो जीतने का समीकरण तैयार करता है. इसलिए पिछले 30 साल से इस सीट पर एक ही परिवार का कब्जा है. क्षेत्र में बुनकर और लकड़ी के खिलौने के कारोबार मुख्य आकर्षण हैं. वाराणसी का रामनगर, बनारस के 84 घाटों में से आधे घाट कैंट विधानसभा में है. बीएचयू भी इसी विधानसभा में आता है. कैंट छावनी इसी विधानसभा में है और संकट मोचन मंदिर भी. और तो और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीनों कार्यालय इसी विधानसभा में आते हैं. मौजूदा बीजेपी विधायक सौरभ श्रीवास्तव के बड़ी-बड़ी कंपनियों के वेयरहाउस और सीएनएफ भी हैं. राजनीति के अलावा अपना खुद का लंबा चौड़ा कारोबार है.

 

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