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UP Election: पहले चरण में बीजेपी को विपक्ष से ज्यादा अपने बागियों से खतरा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण की सभी सीटों के लिए बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. बीजेपी की लिस्ट आते ही कुछ उम्मीदवारों के खिलाफ विरोध के सुर भी उठने लगे हैं. ऐसे में बीजेपी को विपक्षी दलों से ज्यादा अपने बागी नेताओं से चिंता बढ़ गई है.

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बीजेपी उम्मीदवारों का विरोध बीजेपी उम्मीदवारों का विरोध
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आगरा में 5 विधायकों का टिकट बीजेपी ने काटा
  • मेरठ में बीजेपी नेता के खिलाफ पार्टी नेता उतरे
  • मथुरा में बीजेपी के दिग्गज नेता ने पार्टी छोड़ी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 11 जिलों की 58 सीटों पर नामांकन का दौर जारी है. बीजेपी के लिए पहले दौर में विपक्षी दलों से ज्यादा अपनों ने ही मुश्किल खड़ी कर दी है. पहले चरण में बीजेपी ने जिन्हें टिकट नहीं दिया है, उन्होंने बागी रुख अपना लिया है. मेरठ से लेकर मथुरा, आगरा और मुजफ्फनगर तक में बीजेपी को अपने नेताओं को साधने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. 

यूपी के पहले चरण में बीजेपी के लिए पिछला प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है. पहले चरण की 58 में से 54 सीटें बीजेपी के पास हैं. ऐसे में बीजेपी ने अपने पुराने नतीजे को दोहराने के लिए कई सीटों पर विधायकों के टिकट काटे तो कई सीटें पर प्रत्याशी बदले हैं. वहीं, टिकट की आस लगाए बैठे बीजेपी के कई नेताओं को प्रत्याशी न बनाए जाने से झटका लगा है और उन्होंने बगावत की राह पकड़ ली है. 

मेरठ में बीजेपी को अपनों से चुनौती
मेरठ के हस्तिनापुर विधानसभा सीट से बीजेपी ने अपने मौजूदा विधायक दिनेश खटिक को फिर से प्रत्याशी बनाया जबकि सपा ने योगेश वर्मा को कैंडिडेट घोषित किया है. इस सीट से बीजेपी से टिकट की उम्मीद लगाए गोपाल पाली को झटका लगा है. उन्होंने निर्दलीय पर्चा दाखिल किया है और बीजेपी प्रत्याशी दिनेश खटिक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. 

गोपाल काली ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि बीजेपी ने दिनेश खटिक को टिकट देकर आत्मघाती कदम उठाया है. साथ ही पैसे के दम पर टिकट देने का भी बीजेपी पर आरोप लगाया है. बीजेपी कैंडिडेट के खिलाफ गोपाल पाली ने चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है. मेरठ शहर सीट पर भी बीजेपी ने लक्ष्मीकांत बाजपेयी की जगह कमल दत्त शर्मा को टिकट दिया है. इस सीट पर बीजेपी नेता और श्रम कल्याण आयोग के अध्यक्ष पंडित सुनील भराला भी टिकट की दावेदारी कर रहे थे और उनके समर्थकों ने कमलदत्त शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

मुजफ्फरनगर में प्रत्याशी का विरोध
मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट पर बीजेपी ने प्रशांत गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है, जो गाजियाबाद के रहने वाले हैं. मीरापुर सीट पर बाहरी प्रत्याशी के होने से स्थानीय नेताओं ने विरोध शुरू कर दिया है. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रशांत गुर्जर का पुतला फूंका है. ऐसे ही चरथावल विधानसभा सीट पर भी बीजेपी प्रत्याशी नरेंद्र कश्यप को लेकर भी पार्टी के कुछ नेताओं ने बागी रुख अपना लिया है. इस तरह से मुजफ्फनगर में बीजेपी को दो सीटों पर अपने नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा.  

मथुरा में बीजेपी नेता बागी हुए
बीजेपी ने मथुरा जिले की अपने एक विधायक का टिकट काटा है तो एक पूर्व प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया. मांट सीट पर 2017 में मामूली वोटों से चुनाव हार गए एसके शर्मा को बीजेपी ने इस बार टिकट नहीं दिया. इसके चलते उन्होंने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में सिर्फ राम नाम की लूट मची है. कोई विचारधारा नहीं रही. ईमानदारी तो कोसों दूर हो गई है. इसलिए उन्होंने त्यागपत्र दिया है. ऐसे में अब निर्दलीय चुनाव ताल ठोकने की तैयारी में हैं. 

आगरा में बढ़ा बीजेपी का सिरदर्द
बीजेपी ने पिछले चुनाव में आगरा जिले की सभी 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार अपने पांच मौजूदा विधायकों के टिकट पार्टी ने काट दिए हैं. एत्मादपुर, फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, आगरा ग्रामीण और फतेहाबाद सीट के विधायकों का टिकट बीजेपी ने काटा है. पार्टी ने उनकी जगह नए चेहरों को मैदान में उतारा है. जिन्हें टिकट मिला है उन्हें लेकर दावेदारों और समर्थकों में असंतोष है. इसके चलते बीजेपी में बगावत के आसार तेज हो गए हैं. 

आगरा से बीजेपी के तीन बार सांसद रहे प्रभु दयाल कठेरिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और उनके बेटे ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है. वहीं, बीजेपी ने जिन नेताओं के टिकट काटे हैं, वे आगे की रणनीति के लिए मंथन में जुटे हैं. बीजेपी संगठन से जुड़े कुछ नेता खुलकर नहीं बोल रहे हैं तो कुछ सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. ऐसे में कई बागी निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं. टिकट से वंचित कई दावेदार विपक्ष से संपर्क साध रहे हैं. 

 

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