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मुजफ्फरनगर में कश्यप समुदाय को आज साधेंगे अखिलेश, जानें UP में इनकी सियासी ताकत?

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ओबीसी के तहत आने वाले कश्यप समाज को पाले में लेने की कोशिश बीजेपी और सपा दोनों ही पार्टियों ने तेज कर दिए हैं. बीजेपी ने लखनऊ में निषाद-कश्यप सम्मलेन अयोजित किया तो अखिलेश यादव मुजफ्फरनगर में गुरुवार को कश्यप सम्मलेन को संबोधित करेंगे.

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव सपा प्रमुख अखिलेश यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सपा का मुजफ्फरनगर में कश्यप सम्मेलन
  • अखिलेश का पश्चिम यूपी में चुनावी अभियान
  • यूपी की सियासत में कश्यप समाज की ताकत

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश बढ़ती जा रही है. पूर्वांचल के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव अब अपना पूरा फोकस पश्चिम यूपी के राजनीतिक समीकरण को दुरुस्त करने की कवायद में लगए हैं. इसी कड़ी में अखिलेश गुरुवार को मुजफ्फरनगर के बुढाना में 'कश्यप सम्मेलन' को संबोधित करेंगे. इसके बाद हाल ही में कांग्रेस छोड़कर सपा में आए दिग्गज नेता और जाट समुदाय के बड़े चेहरे माने जाने वाले हरेंद्र मलिक के घर जाकर मुलाकात करेंगे. 

कश्यपों को साधने में जुटी पार्टियां

यूपी चुनाव में इस बार सभी पार्टियों की नजर ओबीसी वोटरों पर है, जिन्हें साधने के लिए सभी अपनी-अपनी तरह से जतन कर रहे हैं. ऐसे में ओबीसी के तहत आने वाले कश्यप समाज को पाले में लेने की कोशिश बीजेपी और सपा दोनों ही पार्टियों ने तेज कर दिए हैं.

30 अक्टूबर को लखनऊ में बीजेपी ने निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद और कश्यप समाज के लिए सम्मेलन आयोजित किया था तो अब सपा पश्चिम यूपी के मुजफ्फरनगर में कश्यप समाज को साधने के लिए सम्मेलन कर रही है. इसी कश्यप सम्मेलन को अखिलेश संबोधित करेंगे. 

कश्यप समाज को एससी की डिमांड

उत्तर प्रदेश में कश्यप लोंगो की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. राज्य सरकार द्वारा गठित की गई एक सामाजिक-न्याय समिति की 2001 की रिपोर्ट के अनुसार कहार/कश्यप जाति के लगभग पच्चीस लाख लोग राज्य में रहते हैं. यूपी में कहार और धिवार सहित इन जातियों को निषाद जाति समूह में रखा जाता है. निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद जाति के कई लोग अपने उपनाम में कश्यप लगते हैं.  

कश्यप समाज पिछले काफी समय से सूबे में खुद को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग कर रहा है. 2022 के चुनाव में भी कश्यप समाज की यह मांग प्रमुख रूप से उठाई जा रही है, जिस पर बीजेपी के सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद, बिहार सरकार में मंत्री और वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी भी बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं. वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी कश्यप सम्मलेन में इस मुद्दे को उठा सकते हैं. 

मुलायम-अखिलेश-योगी ने बढाया कदम

बता दें कि साल 2004-2005 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने कश्यप जाति को ओबीसी से एससी में शामिल करने के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा था. तत्कालीन यूपीए सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी और बाद में इलाहबाद उच्च न्यायालय ने भी राज्य सरकार के आदेश को खारिज कर दिया. साल 2016 में अखिलेश यादव ने भी ऐसी ही कोशिश की लेकिन केंद्र ने इस मामले में फिर से कोई सहायता नहीं की.  

मुलायम सिंह के इस कदम का विरोध करने वाली मायावती ने 2007 में सत्ता संभालने के बाद इस मामले में मुलायम सिंह से अलग रुख अख्तियार किया. उन्होंने एक शर्त जोड़ते हुए कहा कि उनकी सरकार नौकरियों में आरक्षण के लिए जाति में बदलाव करेगी चाहे यूपी में दलित का हिस्सा 21 प्रतिशत से अधिक क्यों न हो जाए. लेकिन, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका.

साल 2019 में योगी सरकार ने भी कश्यप जाति को एससी श्रेणी में जोड़ने का दांव चला था, पर इलाहबाद उच्च न्यायालय ने इस कदम पर रोक लगी दी थी. 2022 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कश्यप समाज को साधने के लिए बीजेपी से लेकर सपा तक सक्रिय हो गई है. 

सियासत में कश्यप की ताकत

यूपी की सियासत में कश्यप समुदाय काफी अहम हैं जबकि पश्चिम यूपी और रुहेलखंड के इलाके की विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका में है. मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, मेरठ, बागपत, मुरादाबाद, बरेली, आंवला, बदायूं जिले में कश्यप वोटर काफी महत्वपूर्ण हैं. इसके अलावा पूर्वांचल और गंगा के इलाके में निषाद, मल्लाह और बिंद समाज के लोग हैं, जो इन्हीं के जाति में आते हैं. 

कश्यप समुदाय का वोट किसी एक पार्टी के साथ कभी नहीं रहा है. सपा, बसपा और बीजेपी को वोट करता रहा है, लेकिन मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से बीजेपी के हार्डकोर वोटबैंक बन गया है. यही वजह है कि सपा इस कश्यप समाज के वोट को साधने की कवायद में जुटी है. 

अखिलेश कश्यपों को साधने में जुटे

अखिलेश यादव ने जुलाई में उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय के जाने-माने नेता मनोहर लाल कश्यप की प्रतिमा का अनावरण किया था. अखिलेश ने कश्यप समाज के वोट को अपने पाले में लाने के लिए पार्ट के ओबीसी प्रदेश अध्यक्ष की कमान डा. राजपाल कश्यप को दे रखी है, जो यूपी में ओबीसी समाज को सपा से जोड़ने के साथ-साथ कश्यप, निषाद, बिंद और मल्लाह समुदाय को भी साधने के मिशन पर लगे हैं.

इसी मद्देनजर मल्लाह समाज से आने वाली पूर्व सांसद फूलनदेवी की मूर्ती का अनावरण करने का बीढ़ा उठाया है. बुंदेलखंड दौरे पर अखिलेश ने फूलनदेवी की मां के पैर छुकर आशिर्वाद लेकर सियासी संदेश देने की कवायद की थी. ऐसे में अब देखना है कि कश्यप समाज 2022 के चुनाव में किस पार्टी के साथ खड़े होते हैं. 

 

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