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कांग्रेस की लिस्ट में जातीय गणित पर जोर, सपा-बसपा को कर पाएगी कमजोर?

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गुरुवार को 125 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया तो सबसे ज्यादा मुस्लिम, ब्राह्मण और दलितों को ही चुनावी मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने जिस तरह से मुस्लिम बहुल सीटों पर मुस्लिम कार्ड खेला है, उससे सपा के सियासी समीकरण को झटका लग सकता है.

प्रियंका गांधी प्रियंका गांधी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 125 सीटों में से मुस्लिमों को दिए 19 टिकट
  • सेंट्रल यूपी की कई सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपने पुराने वोटबैंक वोटबैंक ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित को वापस लाने की कवायद में जुटी है. यही है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गुरुवार को 125 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया तो सबसे ज्यादा मुस्लिम, ब्राह्मण और दलितों को ही चुनावी मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने जिस तरह से मुस्लिम बहुल सीटों पर मुस्लिम कार्ड खेला है, उससे सपा का सियासी समीकरण को झटका लग सकता है तो दलित सुरक्षित सीटों पर जाटव और पासी समाज के प्रत्याशी के उतरने से बसपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है. 

कांग्रेस ने 125 सीटों में से सबसे ज्यादा 19 टिकट मुस्लिमों को दिए हैं जबकि 18 ब्राह्मण समाज के प्रत्याशी उतारे हैं. इसके अलावा दलित सुरक्षित सीटों में 10 पासी और 15 जाटव समुदाय के उम्मीदवार हैं. कांग्रेस ने मुरादाबाद मंडल के 19 सीटों में से 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं, जिनमें से 8 मुस्लिम कैंडिडेट हैं. इसके अलाव पश्चिमी यूपी और सेंट्रल यूपी की कई सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी दिए हैं. 

मुरादाबाद जिले की छह सीटों में से नगर से रिजवान कुरैशी और मुरादाबाद देहात से मुहम्मद नदीम. सम्भल की चार सीटों में से दो पर सम्भल से निदा अहमद और असमौली से हाजी मगरूफ आलम जबकि अमरोहा की चार सीटों में से अमरोहा सीट से सलीम खान को प्रत्याशी बनाया है. रामपुर की पांच सीटों में शहर से काजिम अली, स्‍वार से हैदर अली, चमरौहा से अली युसूफ को टिकट दिया है. 

पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद को फर्रूखाबाद सीट, समीना शफीक को सीतापुर, छपरौली से यूनुस चौधरी, लोनी सीट से यामीन मलिक, अलीगढ़ सीट पर मोहम्मद सलमान इम्तियाज, मीरगंज से मोहम्मद इलियास, ददरौली से तनवीर सफदर, लखनऊ मध्य सीट सदाफ जफर, कानपुर कैंट से सोहैल अख्तर अंसारी, रामपुर कारखाना से सेहला अंसारी और सगड़ी से राणा खातून प्रत्याशी हैं. 

कांग्रेस ने जिन सीटों पर मुस्लिम कैंडिडेट उतारे हैं, उन्हीं सीटों पर सपा और बसपा से भी मुस्लिम प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं. उदाहारण के तौर संभल, मुरादाबाद, रामपुर, स्वार, अलीगढ़, ददरौली, कानपुर कैंट, अमरोहा, नजीबाबाद, लोनी जैसी सीटें, जहां पर सपा या फिर बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी दे रखे हैं. ऐसे में कई सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस, सपा और बसपा तीनों ही पार्टियों से मुस्लिम प्रत्याशी हैं. 

विपक्षी दलों से मुस्लिम प्रत्याशी के उतरने से मुस्लिम वोटों का बिखराव होना लाजमी है, जिसका सियासी फायदा बीजेपी को हो सकता है. 2017 के चुनाव में बीजेपी इसी के चलते कई मुस्लिम बहुल सीटों पर कमल खिलाने में कामयाब रही था. ऐसे में इस बार भी सियासी समीकरण पिछली बार की तरह नजर आ रहे हैं, जिसके चलते मुस्लिम वोटों के बीच कन्फ्यूजन की स्थिति हो सकती है. 

कांग्रेस ने मुस्लिमों के साथ-साथ ब्राह्मणों पर भी अच्छा खासा दांव खेला है. माना जा रहा है कांग्रेस ब्राह्मण समाज की बीजेपी से नाराजगी का सियासी फायदा उठाने में मूड में है, लेकिन बसपा और सपा भी इस बार ब्राह्मण वोटों को साधने के कवायद में है. ऐसे ही दलित वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस ने 32 सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मायावती के जातीय और बसपा वोटबैंक माने जाने वाले जाटव समुदाय से हैं. 15 जाटव और 10 पासी प्रत्याशी उतारे हैं. ऐसे में कांग्रेस का यह प्रयोग सफल रहा तो बसपा के सियासी खेल भी खराब हो सकता है. 

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की करीब 110 सीटें हैं, जहां मुसलमान वोट अच्छी खासी संख्या में हैं. ऐसी अधिकांश सीटें पश्चिम उत्तर प्रदेश में हैं. मुसलमान वोटों को अपने पाले में करने के लिए पार्टी ने रणनीति के तौर पर कई मुस्लिम चेहरों को भी उम्मीदवार बनाया है. राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कांग्रेस ने यह टिकट अभी के चुनाव से ज्यादा 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भी टिकट दिया है, क्योंकि वह मुस्लिम वोट बैंक को खोना भी नहीं चाहती है. विधानसभा चुनाव में भले ही यूपी में मुस्लिम वोट बैंक का झुकाव समाजवादी पार्टी की तरफ है, लेकिन वह इस समुदाय को यह ध्यान दिलाना चाहती है कि पार्टी इस वर्ग का पूरा ध्यान रख रही है. 

यूपी चुनाव में ज्यादातर मुस्लिम वोट सपा के साथ ही जाने का अनुमान है. कांग्रेस ही नहीं बसपा भी कई मुस्लिम चेहरों को टिकट दे रखा है. उसके बाद देखना दिलचस्प होगा कि सपा को कितना नुकसान होता है. सपा के वोट बैंक पर कांग्रेस बहुत ज्यादा असर डाल पाए इसकी संभावना बहुत कम है. पिछले तीस साल में कांग्रेस के पास कोई मूल जनाधार नहीं रह गया है, लेकिन जिन सीटों पर मुस्लिम कैंडिडेट सपा-आरएलडी से नहीं रहते हैं और उन सीटों पर कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशी रहे तो मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव हो सकता है. ऐसे में देखना है कि मुस्लिम वोटों की पहली पसंद यूपी में कौन बनता है और कांग्रेस का मुस्लिम कार्ड कितना सफल होता है.

 

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