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UP: 'अल्पसंख्यक दूत' के जरिए बीजेपी और मुसलमानों की दूरी पाटने की कवायद!

यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी मुसलमानों को जोड़ने की कवायद में जुट गई है. अल्पसंख्यक मोर्चा के 44 हजार नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी अपना 'दूत' बनाकर मुसलमानों के घर-घर मोदी-योगी की उपलब्धियों को पहुंचाएगी. साथ ही पढ़े-लिखे, कारोबारी व एलीट​ क्लास​ मुसलमानों को जोड़ने के लिए बीजेपी हर जिले में प्रबुद्ध अल्पसंख्यक सम्मेलन करेगी. 

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बीजेपी के कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय बीजेपी के कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी मुस्लिम को जोड़ने का अभियान शुरू करेगी
  • बीजेपी अल्पसंख्यक दूत मुस्लिमों के घर-घर जाएंगे
  • मुसलमानों के पढ़े-लिखे तबके पर बीजेपी की नजर

विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों में जुटी बीजेपी अपने सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुट गई है. बीजेपी को पूरा भरोसा है कि 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के सहारे मुस्लिमों का दिल जीतने में सफल रहेगी. ऐसे में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के 44 हजार नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी अपना 'दूत' बनाकर मुसलमानों के घर-घर मोदी-योगी की उपलब्धियों को पहुंचाएगी. साथ ही पढ़े-लिखे, कारोबारी व एलीट​ क्लास मुसलमानों को जोड़ने के लिए बीजेपी हर जिले में प्रबुद्ध अल्पसंख्यक सम्मेलन करेगी. 

उत्तर प्रदेश में 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं. सूबे के दो दर्जन से ज्यादा ऐसे जिले हैं, जहां 20 से 60 फीसदी तक मुस्लिम आबादी है. सूबे की कुल 143 सीटों पर मुस्लिम अपना असर रखते हैं. इनमें से 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी बीस से तीस फीसदी के बीच हैं, जबकि 73 सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमान तीस फीसदी से ज्यादा हैं, जो सियासी तौर पर काफी अहम है.  

सूबे की करीब तीन दर्जन ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां मुस्लिम उम्मीदवार अपने दम पर जीत दर्ज कर सकते हैं और करीब 107 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक मतदाता चुनावी नतीजों को खासा प्रभावित करते हैं. इनमें ज्यादातर सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, यूपी के तराई वाले इलाके और पूर्वी उत्तर प्रदेश की हैं. वेस्ट्रन यूपी में बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, आसपास के जनपदों में मुसलमान निर्णायक भूमिका में हैं. 

यूपी में मुसलमानों की इन्हीं समीकरण को देखते हुए बीजेपी अब उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए सियासी कसरत शुरू कर रही है. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में मंगलवार को प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने 2022 के चुनाव में जुटने का संदेश देने के साथ अभियान की रूपरेखा भी समझाई. बंसल ने कहा कि अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता सूबे में अल्पसंख्यकों के घर-घर तक जाकर सरकार की उपलब्धियां और योजनाएं बताएंगे. 

प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने कहा कि बीजेपी की नीतियों से प्रभावित होकर आज मुसलमान भी तेजी से जुड़ रहे हैं. इसे देखते हुए ही हर जिले में प्रबुद्ध अल्पसंख्यक सम्मेलन करने की योजना है. इसके जरिए शिक्षित अल्पसंख्यक पार्टी से आसानी से जुड़ सकेंगे. बंसल ने बताया कि अल्पसंख्यकों के बीच बेहतर काम करने के लिए मोर्चा की बड़ी टीम प्रदेश में लगाई जा रही है. 

उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के लिए लगभग 44 हजार कार्यकर्ताओं की टीम होगी, जो मुस्लिम के घर-घर जाएगी और उन्हें बताएगी कि केंद्र की मोदी सरकार ने इस समुदाय के लिए बहुत से काम किए. बीजेपी सरकार के आने के बाद से कहीं से एक भी शिकायत नहीं आई हैं और न ही किसी जनहित की योजना से मुसलमान को वंचित रखा गया है. इससे साफ जाहिर है कि बीजेपी मोदी और योगी सरकार के बहाने मुसमलानों का दिल जीतने की कवायद में है. 

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने बताया कि प्रदेश अल्पसंख्यक संगठन में 20 हजार नेता और कार्यकर्ता हैं और जल्द ही 44 हजार की टीम हम तैयार कर लेंगे. इन्हीं टीम के जरिए हमारी पार्टी मुसमलानों को घर-घर जाएगी और उन्हें बीजेपी सरकार की उपलब्धियों को बताने की काम करेगी, क्योंकि विपक्षी दलों ने साजिश के तहत बीजेपी के खिलाफ मुसमलानों को बरगला रखा है. ऐसे में हम मुसमलानों को बताएंगी कि कैसे बीजेपी सरकार उनके हितों का पूरा ख्याल रखती है. 
 
कुंवर बासित अली ने बताया कि यूपी में बीजेपी अल्पसंख्यक के बीच प्रबुद्ध सम्मेलन 25 अगस्त के बाद से जिले स्तर पर शुरू कर रही है. पहले हम छोटे-छोटे सम्मेलन करेंगे और बाद में मंडल स्तर पर करेंगे. इसके अलावा चुनाव से ठीक पहले यूपी में एक बड़ा सम्मलेन प्रदेश स्तर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसका मकसद पढ़े, लिखे और एलीट​ क्लास के मुसलमानों को पार्टी से जोड़ने की है. मुसलमानों का पढ़ा लिखा तबका विकास कार्यों और तथ्यों के आधार पर बात करता है, जिन्हें आसानी से हम समझा सकते हैं. 

बता दें कि तीन तलाक के खिलाफ कानून लाकर मोदी सरकार की मुस्लिम महिलाओं को साथ लेने की सबसे पहली कोशिश हुई, जिसका कुछ लाभ बीजेपी को पिछले चुनावों में हुआ भी. ऐसे में बीजेपी की तैयारी 2022 के यूपी चुनाव में मुस्लिम इलाकों में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी की यह कोशिश 2022 में क्या गुल खिलाती है. 


 

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