
बलरामपुर जिले की तुलसीपुर विधानसभा सीट बेहद खास मानी जाती है. तुलसीपुर विधानसभा सीट नेपाल से सटी हुई है. इस सीट पर भाजपा का कब्जा है. तुलसीपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के कैलाश नाथ शुक्ल विधायक हैं. 51 शक्तिपीठों में से एक देवीपाटन शक्तिपीठ सीरिया नदी के पवित्र तट पर स्थित है. शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर के कारण यहां वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आना-जाना लगा रहता है. देवीपाटन मंदिर को सीएम योगी का दूसरा घर भी कहा जाता है. शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर का संचालन गोरक्षपीठ के अधीन है. गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं.
तुलसीपुर विधानसभा पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है.यहां मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है.यहां ना कोई उच्च शैक्षिक संस्थाएं हैं ना ही अच्छी चिकित्सा सुविधा. यहां के लोगों को उच्च शिक्षा और अच्छे इलाज के लिए लखनऊ दिल्ली या अन्य जगहों पर जाना पड़ता है. इस सीट पर यातायात की सुविधा अच्छी ना होने के चलते यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग तथा नेपाल की खुली सीमा से सटे होने के कारण क्षेत्र में जंगली जानवरों का हमला होता रहता है.पहाड़ी नालों तथा राप्ती की बाढ़ से हर साल व्यापक नुकसान होता है. यहां उच्च व तकनीकी शिक्षण संस्थाओं की कमी है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
साल 1957 में इस सीट पर धर्मपाल सिंह को जीत मिली थी. वह बीजेएस पार्टी से थे. इसके बाद जनसंघ के बदलदेव सिंह को 1962 में जीत मिली. साल 1967 में बीजेएस की फिर वापसी हुई एस. प्रसाद ने इस सीट पर जीत हासिल की. 1969 में कांग्रेस के संत राम ने बीजेएस के सुखदेव प्रसाद को हराया और विधायक बने. साल 1974 में मानग्रे सिंह बीजेएस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की. इसके बाद 1977 में मंगल देव ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की और साल 1980 में कांग्रेस (आई) के टिकट पर जीत का दोबारा परचम लहराया.
1985 में फिर मंगल देव ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की. 1989 में आईएनडी के रिजवान जहीर को जीत मिली. 1991 में बीजेपी के कमलेश कुमार को जीत मिली थी, वह बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे. 1993 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़े रिजवान जहीर को जीत मिली. इसके बाद साल 1996 में फिर से रिजाव जहीर को जीत मिली लेकिन इस बार वह बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे. 1998 में हुए उपचुनाव में बीजेपी के कमलेश कुमार सिंह को जीत मिली.

2002 में मसूद खान ने सपा के टिकट पर जीत हासिल की और विधायक बने. 2007 में कौशलेंद्र नाथ योगी ने बीजेपी का झंडा बुलंद किया और यहां से विधायक चुने गए. साल 2012 में अब्दुल मसूद खान ने सपा की फिर वापसी कराई और जीत हासिल कर विधायक बने. 2017 में यह सीट बीजेपी के खाते में गई और यहां से मौजूदा विधायक कैलाश नाथ शुक्ल हैं, जिन्होंने बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की.
सामाजिक ताना-बाना
बलरामपुर जिले के तुलसीपुर विधानसभा में कुल 369751 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 202481 है, जबकि महिला मतदाता की संख्या 167270 है. वहीं थर्ड जेंडर की बात करें तो इस सीट पर 22 थर्ड जेंडर मतदाता हैं. इस सीट पर सबसे ज्यादा 35% ओबीसी मतदाता है. 19% सामान्य, 23%अनुसूचित जाति, 22% मुस्लिम मतदाता शामिल हैं. मुस्लिम मतदाताओं में सामान्य ओबीसी व अनुसूचित जाति के सभी मुस्लिम शामिल हैं. तुलसीपुर विधानसभा सीट पर हार जीत का फैसला ओबीसी वर्ग के मतदाताओं के हाथ में रहता है. जबकि ब्राह्मण मतदाताओं की भी इस सीट पर अहम भूमिका देखी जाती रही है.
2017 का जनादेश
2017 विधानसभा चुनाव में तुलसीपुर विधानसभा सीट पर कुल 16 प्रत्याशी मैदान में थे. लेकिन कड़ा मुकाबला भाजपा, कांग्रेस व सपा के बीच में रहा. सपा व कांग्रेस के गठबंधन के बाद भी दोनों पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे. जिसका फायदा बीजेपी प्रत्याशी को हुआ. बीजेपी प्रत्याशी को 62296 वोट मिले जबकि पूर्व बाहुबली सांसद रिजवान जहीर की बेटी जेबा रिजवान को 43637 वोट मिले. सिटिंग विधायक रहे अब्दुल मसूद खान को 36549 मत पाकर संतोष करना पड़ा. बीजेपी के कैलाशनाथ शुक्ला ने 18659 वोटों से यह चुनाव जीत लिया था.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
2017 में भारतीय जनता पार्टी के कैलाशनाथ शुक्ल पहली बार जीतकर विधायक बने. विधायक कैलाश नाथ शुक्ला इसी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जोगियाकलां गांव के रहने वाले हैं. विधायक बनने से पहले इनका मुख्य पेशा वकालत था और भारतीय जनता पार्टी के कर्मठ पदाधिकारी थे. विधायक कैलाशनाथ शुक्ला की उम्र 58 वर्ष है. वर्ष 2017 में बीजेपी के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए. विधायक की छवि सरल,सौम्य और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी शख्स की है.