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Maholi Assembly seat: महोली को मोहाली बनाने का वादा हर बार रहा अधूरा, क्या बदलेगी जीत की सूरत

महोली विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो कभी बड़े दाने की शक्कर और मूंगफली की खेती के लिए मशहूर यह इलाका वर्तमान में गुड़ के व्यवसाय के लिए काफी मशहूर है. यहां अपने जमाने की ख्यातिलब्ध श्रीलक्ष्मी शुगर मिल के बंद होने के बाद से इलाकाई व्यवसाय गन्ने की खेती और गुड़ की बिक्री तक सिमट कर रह गया है.

2017 के चुनाव में बीजेपी को मिली थी जीत (सांकेतिक-पीटीआई) 2017 के चुनाव में बीजेपी को मिली थी जीत (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • क्षेत्र बड़े दाने की शक्कर, मूंगफली की खेती के लिए मशहूर
  • 2017 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर शशांक त्रिवेदी जीते
  • मिश्रिख व हरगांव के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनी यह सीट

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की महोली विधानसभा सीट का अपना महत्व है. चुनाव में महोली को मोहाली बना देने के वादे पर चुनाव लड़ने वाले नेताओं से महोली विधानसभा के वाशिंदे आजिज आ चुके हैं. शायद यही कारण है कि यहां के मतदाताओं ने हर चुनाव में अपना विधायक बदल देने का चक्र चला रखा है.

हालांकि यह नवसृजित विधानसभा तो एक दशक ही पुरानी है लेकिन इससे पूर्व भी यहां का अधिकांश हिस्सा जिस हरगांव विधानसभा में आता था वहां भी हर बार पब्लिक का मूड बदलाव का ही दिखाई पड़ा है.

सामाजिक तानाबाना 
महोली विधानसभा सीट को ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है और 2017 में पहली बार यहां से कोई ब्राह्मण विधायक चुना गया था. महोली क्षेत्र हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब की मिशाल रहा. 

1933 में चीनी मिल की स्थापना ने महोली को नई आभा दी, लेकिन 1999 से एशिया में ख्यातिलब्ध चीनी मिल बंद पड़ी है. हालांकि बीते 21 सालों से मिल के पुन: संचालन का दावा किया जाता रहा है.

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महोली विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो कभी बड़े दाने की शक्कर और मूंगफली की खेती के लिए मशहूर यह इलाका वर्तमान में गुड़ के व्यवसाय के लिए काफी मशहूर है. यहां अपने जमाने की ख्यातिलब्ध श्रीलक्ष्मी शुगर मिल के बंद होने के बाद से इलाकाई व्यवसाय गन्ने की खेती और गुड़ की बिक्री तक सिमट कर रह गया है. विकास को लेकर अगर बात करें तो लखनऊ-दिल्ली मार्ग एनएच 24 पर स्थित इस विधानसभा में बीती सरकार में आदर्श तहसील, विद्यालय, विद्युत उपकेंद्र, पुल के निर्माण के सिवाय कुछ भी ऐसा नहीं हुआ है जिससे यहां के लोग संतुष्ट हो सकें.

जिले की मिश्रिख और हरगांव विधानसभाओं के कुछ हिस्सों को मिलाकर लगभग एक दशक पहले बनी इस नवसृजित विधानसभा महोली में वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. यहां से विधायक शशांक त्रिवेदी ने वर्ष 2017 के चुनाव में जीत हासिल की थी.

राजनीतिक पृष्ठभूमि
महोली विधानसभा सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद 2012 में नवसृजित हुई. इससे पहले महोली का अधिकांश क्षेत्र हरगांव विधानसभा का हिस्सा था. कुछ गांव मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र में आते थे. यहां के मतदाताओं ने हमेशा सियासी हवा का रुख देखकर विधायक चुना.

महोली विधानसभा में पहला चुनाव 2012 में हुआ. तब महोली में मतदाताों की संख्या 3,236,67 थी, जिसमें 180113 पुरुष औरर 143548 महिलाएं थीं. जबकि 6 अन्य (किन्नर) थे. 

वर्ष 2012 में नवसृजित महोली विधानसभा से सपा के पूर्व विधायक ओम प्रकाश गुप्ता के पुत्र अनूप गुप्ता विधायक बने. तब सपा की सरकार बनी. इस चुनाव में 12 प्रत्याशी मैदान में थे. 2012 में 67.26 प्रतिशत हुआ मतदान हुआ था. तब बीजेपी के भानू प्रताप सिंह को मिले थे 2.96 प्रतिशत (मतलब महज 6450 मत). अनूप गुप्ता को 87,160 तो बसपा के महेश मिश्रा को 64,445 मत मिले थे.

2017 का जनादेश
2017 के विधानसभा चुनाव में 3,51,909 मतदाता थे जबकि 16 प्रत्याशी मैदान में थे. तब चुनाव में 68.68 प्रतिशत मतदान हुआ था और 2,41,699 लोगों ने मतदान किया.

भाजपा के शशांक त्रिवेदी विधायक बने थे और सूबे में भाजपा की सरकार भी बनी. शशांक त्रिवेदी को 80,938 मत जबकि अनूप को 77,221 मत मिले थे. 2017 के चुनाव में भाजपा को 33.72 प्रतिशत मत मिले जो 2012 के रिजल्ट से 30.52 प्रतिशत अधिक था. जबकि सपा को 2012 के सापेक्ष 8.09 प्रतिशत वोट कम मिला था.

रिपोर्ट कार्ड

सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद बीते विधानसभा चुनाव के समय तमाम संभावित प्रत्याशियों को पीछे छोड़ महोली से टिकट पाए शशांक त्रिवेदी ने चुनाव में महोली में मोहाली की तरह स्टेडियम निर्माण, बंद पड़ी चीनी मिल शुरू करने, शदीद मनोज यादव के नाम पर पार्क बनवाने, संस्कृत विद्यालय की स्थापना, बड़ागांव को ब्लॉक का दर्जा दिलाने तथा 2022 तक बरगावां विद्युत उपकेंद्र शुरू कराने जैसे तामाम वादे जनता से किए थे. 

लेकिन ये वादे पूरे होने तो दूर इन पर काम शुरू होने तक कि संभावनाएं अभी तक नहीं दिख पाई है. ये तब है जब अगला चुनाव सिर पर है. ये जरूर है कि तमाम गांवों में इंटरलॉकिंग सड़क, नाली और सीसी रोड निर्माण, नरनी में चल रहे सरकारी अस्पताल के निर्माण, पिसावां में किसान कल्याण केंद्र व बस स्टैंड निर्माण तथा भगवानपुर में आश्रम पद्धित विद्यालय निर्माण के प्रस्ताव के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की जुगत में विधायक शशांक त्रिवेदी पुनः मैदान में सक्रिय हैं.

कुछ पुलों व स्कूलों के निर्माण, गांवों के विद्युतीकरण ,स्वास्थ्य केंद्रों के उच्चीकरण के भी दावे विधायक द्वारा किए जाते हैं पर इसे लेकर उनके विरोधी मुखर हो जाते हैं.

साल 2017 से पहले समाजवादी पार्टी से महोली के विधायक रहे अनूप गुप्ता का दावा है कि भाजपा सरकार में होने के बाबजूद अपने कार्यालय में क्षेत्रीय विधायक ने पूरे इलाके में कोई काम नहीं कराया. उनके द्वारा जो दावे किए जा रहे हैं वे ज्यादातर या तो सपा सरकार में उनके द्वारा स्वीकृत कराए गए थे या उन्होंने ही करवाए थे जिनकी वर्तमान विधायक द्वारा गलतबयानी कर झूठी दावेदारी की जा रही है.

मोदी लहर में जीते शशांक त्रिवेदी के 5 वर्ष के कार्यकाल के बाद महोली विधानसभा की सियासी हवा तेजी से बदल रही है. कंबल वितरण के लिए सांसद और विधायक के बीच उनकी मौजूदगी में तहसील में घटित जूता-चप्पल कांड, भाजपा नेता को फोन पर धमकाना, उनके प्रतिनिधि द्वारा व्यापारी नेता की पिटाई करना, कार्यकर्ता सम्मेलन में सांसद को शायरी सुनाना, संगठन से जुड़े भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न पर खामोशी तथा अपराधियों के कथित संरक्षण ने न सिर्फ विधायक के व्यक्तित्व को प्रभावित किया है बल्कि समाज में इसका गलत संदेश गया है.

क्षेत्र के विकास की बात करें तो वास्तविकता के धरातल के पलड़े में अगर पूर्व सरकार के पूर्व विधायक के विकास कार्यों को रखें तो वर्तमान विधायक के कार्यों में कोई खास अंतर नही दिख रहा है.

महोली ने दलित भाजपा नेता दौलतराम को 3 बार विधायक बनाया. वो प्राविधिक शिक्षा मंत्री भी रहे. नवसृजित महोली विधानसभा में एक बार सपा और एक बार भाजपा का दबदबा रहा. अतीत बताता है कि हरगांव का हिस्सा होने तक महोली में भाजपा का दबदबा रहा है.

 

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