scorecardresearch
 

सपा के मुस्लिम वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर, दंगों पर मुलायम से अखिलेश तक को घेरने की तैयारी

कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक के सहारे यूपी में सत्ता वापसी की आस में है. अखिलेश राज में मुजफ्फरनगर दंगे से लेकर मथुरा के कोसीकला और फैजाबाद (अयोध्या) में हुए दंगों की न्यायिक जांच करने का वादा किया है.

प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश में (फाइल-पीटीआई) प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश में (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी अल्पसंख्यक कांग्रेस कमेटी का 16 सूत्री संकल्प पत्र तैयार
  • संकल्प पत्र में ऐसे मुद्दे जो सपा सरकार को कठघरे में खड़ा करे
  • अखिलेश राज में हुए सभी दंगों की न्यायिक जांच कराने का वादा

उत्तर प्रदेश की सियासत में बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भले ही मुसलमानों के सबसे पसंदीदा हों. सपा मुस्लिम वोटों की अभी तक सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही हो, लेकिन कांग्रेस की नजर भी उसी वोटबैंक पर है. कांग्रेस 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में हर वो दांव चल रही है, जिससे सपा के मुस्लिम कोर वोट बैंक में सेंध लग सके. इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने सपा सरकार के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगे को लेकर अखिलेश-मुलायम को घरेने की तैयारी की है. 

यूपी अल्पसंख्यक कांग्रेस कमेटी ने 16 सूत्री संकल्प पत्र तैयार किया है, जिसे लेकर मुसलमानों के बीच लेकर माहौल बनाने का काम करेगी. कांग्रेस अपने पुराने वोटबैंक को वापस लेने के लिए वो सब करने की कवायद में है, जिससे अखिलेश यादव को सियासी नुकसान पहुंच सके. इस रणनीति के तहत कांग्रेस का सबसे बड़ा एजेंडा यह है कि वह मुसलमानों के मुद्दों पर सपा को मुस्लिम के बीच एक्सपोज करना चाहती है.

कांग्रेस ने इसी मद्देनजर 16 सूत्री संकल्प पत्र को तैयार किया है, उसमें सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के राज से लेकर अखिलेश यादव सरकार में हुए दंगों की याद मुसलमानों के बीच ताजा करेगी. कांग्रेस के उस 16 सूत्री संकल्प पत्र में ऐसे चुन-चुनकर मुद्दों को शामिल किया है, जो सपा सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले है. 

इसे भी क्लिक करें --- यूपी चुनाव के लिए प्रियंका गांधी ने बनाई रणनीति! A,B,C,D कैटेगरी में कैंडिडेट उतारेगी कांग्रेस

अखिलेश राज में मुजफ्फरनगर दंगे से लेकर मथुरा के कोसीकला और फैजाबाद (अयोध्या) में हुए दंगों की न्यायिक जांच करने का वादा किया है. वहीं, 28 साल पहले कानपुर में हुए दंगे के आरोपियों पर अखिलेश सरकार में हटाए गए मुकदमों को दोबारा से शुरू करने का वादा किया. 

कांग्रेस का प्रस्तावित 16 सूत्रीय संकल्प पत्र

1- सरकार बनी तो सीएए और एनआरसी विरोधी आंदोलन में दर्ज मुकदमे वापस होंगे और मुआवजा दिया जाएगा.
2- राजस्थान की कांग्रेस सरकार की तरह मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाने के लिए विधानसभा से राष्ट्रपति को प्रस्ताव भेजा जाएगा.
3- बुनकरों को फ्लैट रेट पर बिजली दी जाएगी और कांग्रेस के जमाने में स्थापित की गईं कताई मिलों को फिर से खोला जाएगा.
4- डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में बुनकरों के लिए जारी किए गए 2350 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
5- सपा सरकार में बंद की टेनरी खोली जाएंगी.
6- अंबेडकर छात्रावासों के तर्ज पर हर जिले में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए मौलाना आजाद छात्रावास खोले जाएंगे.
7- अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी.
8- मदरसा आधुनिकीकरण, शिक्षकों के बकाया वेतन को देने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा.
9- पिछले 30 सालों में वक्फ की संपत्तियों में हुई धांधली की जांच कराई जाएगी और दोषियों को सजा दी जाएगी.
10- पसमांदा तबको के विकास के लिए अलग से पसमांदा आयोग का गठन किया जाएगा.
11- दस्तकार वर्ग की आवाज को सदन में स्थायी तौर पर उठाने के लिए उस वर्ग से विधानपरिषद में एक सदस्य नामित किया जाएगा.
12- अखिलेश यादव सरकार में हुए सभी छोटे-बड़े दंगों की न्यायिक जांच कराकर दोषियों को सजा दी जाएगी.
13- 1992 में कानपुर में हुए दंगे की जांच के लिए गठित माथुर कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवाई कर दोषियों को सजा दी जाएगी.
14- हर मंडल में एक यूनानी मेडिकल कालेज खोला जाएगा.
15- अल्पसंख्यक वर्ग में आत्मविश्वास विकसित करने के लिए अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में राज्य पुलिस बल में भर्ती के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे.
16- उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण अधिनियम के तहत बेगुनाह लोगों पर लादे गए मुकदमे, जिन्हें हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है उनको मुआवजा दिया जाएगा.

कांग्रेस अल्पसंख्यक कमेटी के द्वारा बनाए गए संकल्प पत्र में ऐसे एजेंडे शामिल किए गए हैं, जो सीधे-सीधे समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को चुभ सकते हैं. इसमें यह कहा गया है अखिलेश राज के 2012 से 2017 के बीच राज में हुए सभी छोटे बड़े दंगों की न्यायिक जांच कराने का वादा किया है. सपा सरकार में मुजफ्फरनगर से लेकर मथुरा के कोसीकला, प्रतापगढ़ सहित करीब सैकड़ों दंगे हुए थे. कांग्रेस इन्हीं मुद्दों के लेकर सपा को 2022 के चुनाव में घेरने की तैयारी कर रखी है. इसे कांग्रेस गांव-गांव और कस्बों में जाकर मुस्लिमों के बीच याद दिलाएगी.

28 साल पुराने दंगे पर कार्रवाई का वादा
वहीं, साल 1992 के कानपुर दंगे के बाद माथुर कमीशन की रिपोर्ट को कांग्रेस 28 साल के बाद कार्रवाई का वादा मुस्लिमों से कर किया है. बता दें कि 1992 के कानपुर दंगे में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, लेकिन इसमें सजा किसी को नहीं होई. केस कमजोर होने की वजह से ज्यादातर लोग बरी भी हो गए, इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव को घेरने की रणनीति है. 

यूपी की सत्ता से कांग्रेस तीन दशकों से बाहर है. ऐसे में सूबे में सबसे ज्यादा वक्त तक सपा और बसपा ने शासन किए हैं. ऐसे में तीन दशकों से मुस्लिम वोटर सपा के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है. राममंदिर आंदोलन के बाद से मुस्लिम, दलित और ब्राह्मणों के छिटक जाने से कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है. ऐसे में कांग्रेस फिर से अपने पुराने वोटबैंक को वापस लाने के लिए तमाम जतन कर रही हैं.

सपा को एक्सपोज करने की तैयारी
यूपी में मुस्लिम वोटों के लेकर कांग्रेस की सीधी लड़ाई सपा के साथ है. ऐसे में कांग्रेस अब खुलकर सपा से दो-दो हाथ करने की रणनीति बनाई है. सपा को मुसलमानों के मुद्दे पर कांग्रेस न सिर्फ घेरेगी बल्कि मुस्लिम समुदाय के बीच एक्सपोज चाहती है.

ऐसे में वह चाहे दंगों के न्यायिक जांच की बात हो वह चाहे माथुर कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का वादा. वह चाहे समाजवादी शासन के दौरान टेनरी के बंद होने की बात हो या फिर पुलिस बलों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की भर्ती का सवाल. ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें लेकर कांग्रेस के निशाने पर सपा और अखिलेश यादव होंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस का यह दांव 2022 में कितना सफल रहता है?

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें