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किसान आंदोलन: दिल्ली के तांडव से तमिलनाडु में बढ़ी सियासी तपिश 

गणतंत्र दिवस पर मंगलवार को किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुए तांडव से तमिलनाडु की राजनीतिक तपिश बढ़ गई है. डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने पूरे मामले के लिए राज्य के सत्ताधारी दल AIADMK को दोषी ठहराया है. साथ ही स्टालिन ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के उदासीन और सुस्त रवैये के कारण किसान प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए हैं. 

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान आंदोलन से तमिलनाडु की सियासत गर्म
  • एमके स्टालिन ने AIADMK को ठहराया जिम्मेदार
  • तमिलनाडु में बीजेपी और AIADMK का गठबंधन

गणतंत्र दिवस पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली थी, लेकिन किसानों के एक समूह ने लाल किले के अंदर घुसकर सिखों के धार्मिक झंडे निशान साहब को फहरा दिया. मंगलवार को रैली के दौरान दिल्ली में हुए तांडव से तमिलनाडु की राजनीतिक तपिश बढ़ गई है. डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने पूरे मामले के लिए राज्य के सत्ताधारी दल AIADMK को दोषी ठहराया है. साथ ही स्टालिन ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के उदासीन और सुस्त रवैये के कारण किसान प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए हैं. 

एमके स्टालिन ने कहा कि संसद में एआईएडीएमके ने अगर कृषि कानूनों का समर्थन नहीं किया होता तो केंद्र की मोदी सरकार इस कानून को पारित नहीं करा सकती थी. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर देश की राजधानी में जो हिंसा की घटना हुई है, वो केंद्र सरकार के रवैए के चलते हुई है. साथ ही स्टालिन ने कहा कि किसानों को अहसास होना चाहिए कि हिंसा से सरकार की विभाजनकारी राजनीति को ही फायदा होगा. दोनों पक्षों को लोकतांत्रिक नियम-कायदे के भीतर समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए. 

तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी भी इन दिनों बढ़ गई है. डीएमके 2011 से लगातार दो विधानसभा चुनाव में हार का सामना कर रही है, लेकिन इस बार एमके स्टालिन राज्य में डीएमके के सत्ता के सियासी वनवास को खत्म करने की कवायद में हैं. ऐसे  में डीएमके प्रमुख ने गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में हुई घटना के लिए केंद्र के साथ AIADMK को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी बताने की कोशिश कि अगर AIADMK ने कृषि कानून पर केंद्र का साथ नहीं दिया होता तो किसान आज सड़कों पर आंदोलन नहीं कर रहे होते.  

दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का मुख्य मुकाबला सत्ताधारी AIADMK और DMK के बीच माना जा रहा है और दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी इनकी जूनियर पार्टनर के तौर पर मौजूद हैं. बीजेपी यहां AIADMK के साथ है और दोनों एक साथ चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. यही वजह है कि डीएमके कृषि कानूनों के लिए सीधे तौर पर AIADMK को निशाने पर लिया है. स्टालिन ही नहीं बल्कि उनके बेटे और डीएमके यूथ विंग के अध्यक्ष उदयनिधि ने भी केंद्र के साथ-साथ राज्य की AIADMK सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि किसानों की नाराजगी इन्हें भारी पड़ेगी. 

उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य की 'गुलाम' सरकार को बंदूक के इस्तेमाल से लोगों की आवाज को दबाने की आदत है. तमिलनाडु में इसी तरह की एक ट्रैक्टर रैली के मामले का उल्लेख करते हुए उदयनिधि ने कहा कि पुलिस ने बल प्रयोग कर राज्य में किसानों की रैली को तहस-नहस कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि गणतंत्र दिवस पर सरकार की ओर ऐसी 'तानाशाही' देखने को मिली है, जिसका जवाब प्रदेश की जनता आने वाले समय में देगी.

वहीं, एमडीएमके संस्थापक और राज्यसभा सदस्य वाइको ने किसानों पर लाठियां चलाने के लिए दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा और तीनों कानूनों को वापस नहीं लेने के लिए केंद्र की आलोचना की. उन्होंने कहा कि केंद्र को मामले पर अड़ियल रुख नहीं अपनाना चाहिए और कृषि कानूनों को रद्द करना चाहिए. इसके अलावा विदुतलाई चिरुतईगल काची (वीसीके) संस्थापक और लोकसभा सदस्य टी तिरुमावलवन और तमिझागा वजवुरिमई काची नेता टी वेलुरुगन ने भी दिल्ली में किसानों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़े जाने की आलोचना की है. 
 
बता दें कि तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए डीएमके ने पूरी ताकत झोंक दी है. ऐसे में राज्य की सियासत में किसान काफी अहम माने जाते हैं, जिन्हें अपने साथ साधे रखने के लिए वो लगातार कोशिश कर रहे हैं. एमके स्टालिन मुख्यमंत्री पलानीस्वामी से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर राज्य के सदन से कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पास करने की मांग पहले ही उठा चुके हैं, लेकिन AIADMK इस पर राजी नहीं हुई. 

स्टालिन के बाद अब दिल्ली में हुए हिंसा की घटना के बाद कांग्रेस ने AIADMK के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है. 29 जनवरी से स्टालिन तमिलनाडु की यात्रा शुरू कर रहे हैं और सभी 234 सीटों में जाएंगे. उन्होंने वादा किया है कि डीएमके के राज्य की सत्ता में आने पर पहले 100 दिन में सभी समस्याओं को युद्ध स्तर पर हल करने की कोशिश करेंगे. इस दौरान किसानों का विशेष ख्याल रखा जाएगा. 

 

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