का एहसास होते ही के नेता के सुर बदल गए हैं. उन्होंने कहा कि की सरकार केन्द्र सरकार के साथ टकराव से बचेगी. एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में केजरीवाल ने कहा कि वह किसी तरह का टकराव नहीं चाहते बल्कि केन्द्र से सृजनात्मक सहयोग चाहते हैं और ऐसा ही उनसे भी उम्मीद करते हैं.
उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में बहस, चर्चा, विचार विमर्श और धरना होना चाहिए. हम जो होगा करेंगे लेकिन धरना हमारा अंतिम अस्त्र होगा.
लेकिन केजरीवाल ने कहा कि पिछली बार उनकी पार्टी ने कहा था अगर वह स्वराज के अपने वादे को पूरा नहीं कर पाई तो सत्ता छोड़ देगी लेकिन इस बार वह कह रही है कि सरकार से संघर्ष करेगी.
उन्होंने दावा किया कि बीजेपी द्वारा उनके बारे में निगेटिव प्रचार करने से मिडल क्लास के लोग उससे दूर हो गए हैं. लोग निगेटिव पॉलिटिक्स पसंद नहीं करते.