बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आ रहे हैं. कोरोना काल में हुए चुनाव में अररिया विधानसभा सीट पर सबकी नजरें हैं. अब तक हुए चुनाव में सबसे अधिक 6 बार कांग्रेस के प्रत्याशियों ने यहां से प्रतिनिधित्व किया है. वर्तमान में भी कांग्रेस के पास अररिया सीट है. इस बार यहां 53.9% वोटिंग हुई है.
अररिया में अब तक कुल 17 चुनाव हुए हैं, जिसमें 2 उपचुनाव भी शामिल हैं. 1951 से अब तक कांग्रेस यहां से 6 बार जीती है, जबकि निर्दलीय 4 बार, बीजेपी 2 बार, एलजेपी, एलजेएसपी, बीपीपी, एसओपी और जनता पार्टी को एक-एक बार जीत मिली है.
अररिया विधानसभा सीट से 1951-52 और 1957 में जीत दर्ज करने वाले हाजी जियाउर्रहमान के पोते आबिदुर रहमान ने पिछले विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. उनके पिता मोईदुर रहमान भी विधायक व मंत्री रहे थे, लेकिन उन्होंने जोकीहाट विधानसभा से चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी.
इन उम्मीदवारों पर रहेगी नजर
1- आबिदुर रहमान (कांग्रेस)
2- शगुफ्ता अजीम (JDU)
3- चंद्रशेखर सिंह (LJP)
2015 का चुनाव
2015 के चुनाव में अररिया विधानसभा सीट से कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. कांग्रेस उम्मीदवार आबिदुर रहमान को 92667 (52.77%), जबकि एलजेपी के अजय कुमार को 52623 (29.97%) वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर सीपीआई और चौथे पर जेएपीएल थी. इस चुनाव में यहां 63 फीसदी वोटिंग हुई थी और 15 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी. इस चुनाव में वोटरों की संख्या 277857 थी.
शहर का इतिहास
अररिया के पास एक बहुत ही प्रतिष्ठित अतीत है, हालांकि अनिश्चितताओं के बीच में कटा हुआ है. महाभारत (सभा पर्व और वन पर्व) के कुछ अंश, जो पूर्वी भारत में भीम की विजय का वर्णन करते हैं, जिले की पुरातनता के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रस्तुत करते हैं. प्राचीन इतिहास में भारतीय इतिहास के तीन महत्वपूर्ण वंशों के शासनकाल में अररिया को तीन अलग-अलग संस्कृतियों के संगम का स्थान कहा जा सकता है.
कुल आबादी लगभग- 28,11,569
कुल साक्षर आबादी-11,95,768
साक्षरता दर:- 53.53%