लोकसभा चुनाव 2019 के तहत गुजरात की वलसाड लोकसभा सीट पर बीजेपी ने फिर अपना परचम लहराया है. भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) प्रत्याशी डॉ. केसी पटेल 353797 वोटों के अंतर से अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी को शिकस्त देने में कामयाब रहे. अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट पर कुल 9 प्रत्याशी मैदान में थे. हालांकि मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहा.
2019 का जनादेश
भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) प्रत्याशी डॉ. केसी पटेल को सात लाख 71 हजार 980 वोट मिले, वहीं कांग्रेस उम्मीदवार जीतू चौधरी को चार लाख 18 हजार 183 वोट मिले. 19307 वोटों के साथ नोटा का वोट प्रतिशत 1.53 रहा. बहुजन समाज पार्टी के राजूभाई को 15359 वोट मिले. बता दें कि इस सीट पर तीसरे चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान हुआ था और मतदान का प्रतिशत 74.15 रहा है.
पिछले चुनाव में इस सीट पर 74.2% मतदान हुआ था जिसमें बीजेपी प्रत्याशी के. सी पटेल को 617,772 वोट (55.0%) और कांग्रेस प्रत्याशी किशनभाई पटेल को 409,768 (36.5%) वोट मिले थे.
सामाजिक ताना-बाना
2011 की जनगणना के मुताबिक, वलसाड लोकसभा क्षेत्र की आबादी 23,00,449 है. इसमें 70.69% आबादी ग्रामीण और 29.31% आबादी शहरी है. अनुसूचित जाति की आबादी 1.84 प्रतिशत और 62.69 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की है. 2018 की वोटर लिस्ट के मुताबिक, यहां 16,24,322 वोटर हैं. करीब 6 फीसदी यहां मुस्लिम आबादी है.
इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत डांग, वलसाड, उमरगांव, वांसडा, पर्डी, धरमपुर, कपराडा विधानसभा सीट आती हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में धरमपुर से बीजेपी, वलसाड से बीजेपी, पर्डी से बीजेपी, कपराडा से कांग्रेस, उमरगांव से बीजेपी, डांग से कांग्रेस और वांसडा से कांग्रेस को जीत मिली थी.
सीट का इतिहास1957 से 1967 के लोकसभा चुनाव तक यहां लगातार कांग्रेस को जीत मिलती रही. इसके बाद मोरारजी देसाई वाली कांग्रेस ने 1971 में यहां से चुनाव जीता. 1977 में जनता पार्टी को इस सीट पर जीत मिली. 1980 व 1984 में इंदिरा गांधी वाली कांग्रेस ने बाजी मारी. हालांकि, 1989 में फिर बाजी पलटी और जनता दल के अरुण भाई पटेल ने चुनाव जीता. इसके बाद 1991 में कांग्रेस में जीती.
भारतीय जनता पार्टी ने यहां जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार तीन चुनाव जीते. 1996, 1998 और 1999 में बीजेपी के टिकट पर मणिभाई चौधरी लगातार सांसद निर्वाचित हुए. 2004 व 2009 में कांग्रेस के किशन भाई पटेल लगातार दो बार जीते. जबकि 2014 की मोदी लहर में वह नहीं जीत सके और बीजेपी के टिकट पर लड़े के.सी पटेल ने उन्हें शिकस्त दी.
1996 में बीजेपी ने इस सीट पर पहली बार जीत दर्ज की और केंद्र में पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार चलाने का अवसर मिला. हालांकि, यह सरकार महज 13 दिन ही चल पाई. इसके बाद 1998 में फिर ऐसे सियासी हालात बने कि बीजेपी ने केंद्र की सत्ता का नेतृत्व किया. 1999 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी ने मजबूती से अपना पूरा कार्यकाल किया.
दिलचस्प आंकड़ा ये है कि इन तीनों ही चुनाव में बीजेपी को वलसाड सीट से जीत मिली थी. इसके बाद 2004 में कांग्रेस जीती तो केंद्र में यूपीए की सरकार बनी. 2009 में कांग्रेस सरकार की सरकार रिपीट होने को लेकर ज्यादा आश्वस्तता नहीं थी, लेकिन फिर भी मनमोहन सिंह ने 5 साल सरकार चलाई और इस चुनाव में भी वलसाड सीट से कांग्रेस को जीत मिली. 2014 में यह सीट बीजेपी के खाते में गई तो केंद्र में बीजेपी की वापसी हो गई.चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़ लेटर