राजस्थान में विधानसभा चुनावों के बाद लोकसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं. तमाम सियासी दलों के नेता आम चुनाव के लिहाज से अपने-अपने क्षेत्र में सियासी समीकरण बनाना शुरू कर दिया है. राज्य का हाड़ौती क्षेत्र आजादी के बाद से ही पहले जनसंघ और अब बीजेपी का मजबूत गढ़ बन हुआ है. कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र की सियासत में इस बर बड़ा परिवर्तन आया जब राजघराने के सदस्य और पूर्व कांग्रेस सांसद इज्यराज सिंह विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गएं.
राजनीतिक समीकरण
कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र का गठन कोटा और बूंदी जिले के कुछ हिस्सों के मिलाकर किया गया है. आजादी के बाद इस सीट पर हुए कुल 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मात्र 4 बार ही इस सीट पर जीत दर्ज कर पाई. जबकी 6 बार बीजेपी और 3 बार भारतीय जनसंघ का कब्जा रहा. वहीं 1 बार जनता पार्टी, 1 बार भारतीय लोकदल और 1 बार निर्दलीय का कब्जा रहा. 1952 में हुए पहले आम चुनाव में रामराज्य परिषद से चंद्रसेन ने जीत का परचम लहराया तो, 1957 में कांग्रेस से ओंकार लाल ने बाजी मारी. इसके बाद 1962, 1967 और 1971 में इस सीट पर जनसंघ का कब्जा रहा. 1977 की जनता लहर में इस सीट पर जनसंघ पृष्ठभूमि के बीएलडी उम्मीदवार कृष्ण कुमार गोयल ने जीत दर्ज की, 1980 में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर इस सीट पर कब्जा जमाया.
1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के शांति लाल धारीवाल जीते, तो 1989 में बीजेपी के दाऊदयाल जोशी ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली. इसके बाद दाऊदयाल जोशी 1996 तक लगातार तीन बार यहां के सांसद बने. वहीं 1998 में कांग्रेस रामनारायण मीणा ने यह सीट बीजेपी से हथिया ली. लेकिन 1999 में बीजेपी के रघुवीर सिंह कौशल ने मीणा को हराकर यहां कब्जा कर लिया. 2004 में रघुवीर सिंह कौशल ने दोबारा जीत दर्ज की. लेकिन 2009 के चुनाव में कोटा राजघराने के इज्यराज सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर पार्टी को जीत दिलाई. वहीं 2014 में राजस्थान बीजेपी के कद्दावर नेता ओम बिड़ला ने सिंह को हराकर एक बार फिर इस सीट पर बीजेपी की जीत का परचम लहराया. अब इज्यराज सिंह बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और कभी एक दूसरे के खिलाफ लड़ने वाले नेता वर्तमान में एक दल में शामिल हैं.
सामाजिक ताना-बाना
कोटा और बूंदी जिले की विधानसभा सीटों को मिलाकर बना यह लोकसभा क्षेत्र एक जमाने में उद्योग का बड़ा केंद्र था. लेकिन हाल के समय में कोचिंग यहां एक बड़ा उद्योग बनकर उभरा है. हाड़ौती का यह क्षेत्र कृषि के लिहाज से उपजाऊ है और अनाज की सबसे बड़ी रामगंज मंडी यहीं पर स्थित है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की जनसंख्या 27,16,852 है, जिसका 49.27 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 50.73 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. वहीं कुल आबादी का 20.4 फीसदी अनुसूचित जनजाति और 12.76 फीसदी अनुसूचित जाति हैं.
कोटा लोकसभा सीट पर मीणा जाति के मतदाताओं का वोट निर्णायक माना जाता है. वहीं मीणाओं के राजनीतिक विरोधी गुर्जर भी कुछ इलाकों में प्रभावी हैं. इनके अलावा ब्राह्मण, अनुसूचित जाति और वैश्य मतदाताओं की भी अपनी अलग भूमिका है. 2014 के आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर 17,44,539 मतदाता हैं, जिसमें 9,13,386 पुरुष और 8,31,153 महिलाएं हैं.
कोटा संसदीय सीट के अंतर्गत 8 विधानसभा सीटों में कोटा जिले की कोटा उत्तर, कोटा दक्षिण, लाडपुरा, सांगोद, पीपल्दा, रामगंज मंडी विधानसभा और बूंदी जिले की केशोरायपाटन और बूंदी विधानसभा सीट शामिल हैं. दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां की 5 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है. जबकि कांग्रेस ने पीपल्दा, सांगोद और कोटा उत्तर सीट पर कब्जा जमाया है. इस लिहाज इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी का पलड़ा भारी है.
2014 का जनादेश
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कोटा संसदीय सीट पर 66.2 फीसदी मतदान हुआ था, जिसमें से बीजेपी को 55.8 फीसदी और कांग्रेस को 38.4 फीसदी वोट मिले थे. इस चुनाव में कोटा राजघराने के कांग्रेसी सांसद इज्यराज सिंह से मुकाबला करने के लिए बीजेपी ने अपने कद्दावर नेता और विधायक ओम विड़ला को मैदान में उतारा. मोदी लहर में ओम बिड़ला ने कांग्रेस सांसद सिंह को 2,00,782 मतों के भारी अंतर से पराजित किया. बीजेपी से ओम बिड़ला को 6,44,822 और कांग्रेस से इज्यराज सिंह को 4,44,040 वोट मिले.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
56 वर्षीय कोटा सांसद ओम विड़ला का जन्म 23 नवंबर 1962 में कोटा में हुआ था. उन्होंने अपनी स्नात्कोत्तर की शिक्षा कोटा से पूरी की. बिड़ला पेशे से किसान और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले कोटा सांसद ओम बिड़ला राजस्थान विधानसभा में तीन बार विधायक भी रह चुके हैं. इन्होंने बारां जिले में सहारिया जनजातियों की कुपोषण की समस्या पर उल्लेखनीय कार्य किया है. सांसद के तौर पर बिड़ला लोकसभा में भी काफी सक्रिय रहे. जिस वजह से उनका नाम संसद के सितारों की सूची में शामिल किया गया.
लोकसभा में ओम बिड़ला की मौजूदगी 86.6 फीसदी रही, इस दौरान उन्होंने कुल 657 सवाल पूछे और 158 बहस में हिस्सा लिया. ओम विड़ला ने अपने कार्यकाल के दौरान 7 प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए. सांसद विकास निधि की बात करें तो उन्होंने अपने कुल आवंटित धन का 51.84 फीसदी अपने क्षेत्र के विकास पर खर्च किया.