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दमोह सीट पर 66 फीसदी वोटिंग, EVM में लॉक हुआ 15 प्रत्याशियों के सियासी भाग्य का फैसला

Damoh Lok Sabha Seat 2019 लोकसभा चुनाव के लिए दमोह लोकसभा सीट से कुल 15 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बार फिर प्रहलाद सिंह पटेल को चुनावी रण में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने प्रताप सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से जित्तू खरे मैदान में हैं, जबकि 5 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (Getty Images)
प्रतीकात्मक तस्वीर (Getty Images)

मध्य प्रदेश के दमोह संसदीय क्षेत्र में लोकसभा चुनाव 2019 के पांचवें चरण में कड़ी सुरक्षा में मतदान हुए. चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर 65.78 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि मध्य प्रदेश की 7 सीटों पर 68.98 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है. दमोह लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ है. 1989 के बाद से ही इस लोकसभा सीट पर बीजेपी का विजयी सफर जारी है. ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जलवा बरकरार रखना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है.

अपडेट्स

मध्य प्रदेश की दमोह सीट पर शाम 4 बजे तक 52.46 प्रतिशत मतदान हो चुका है. हालांकि मतदान के आखिरी आंकड़े में बदलाव हो सकता है.

एमपी की दमोह लोकसभा सीट पर दोपहर 2 बजे तक 45.83 फीसदी मतदान हो चुका है. यहां पर अभी भी बड़ी संख्या में लोग मतदान केंद्रों पर लाइन में लगे हैं.

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मध्य प्रदेश के दमोह लोकसभा सीट पर शांतिपूर्वक मतदान चल रहा है.  यहां पर दोपहर 11 बजे तक 19.44 फीसदी प्रतिशत मतदान हो चुका है. मतदान को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

चुनावी रण में उतरे ये उम्मीदवार

2019 लोकसभा चुनाव के लिए दमोह लोकसभा सीट से कुल 15 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बार फिर प्रहलाद सिंह पटेल को चुनावी रण में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने प्रताप सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से जित्तू खरे मैदान में हैं, जबकि 5 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं.

दमोह सीट का राजनीतिक समीकरण

दमोह लोकसभा सीट पर पहला चुनाव 1962 में हुआ था. तब यह सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित थी. इस चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी. 1967 में परिसीमन के बाद यह सीट सामान्य हो गई. 1967 और 1971 में भी कांग्रेस को यहां पर जीत मिली थी. 1977 में यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई और भारतीय लोकदल ने इस सीट पर जीत हासिल की. 1980 में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की. कांग्रेस ने 1984 का चुनाव भी जीता. बीजेपी को पहली बार इस सीट पर जीत 1989 में मिली. लोकेंद्र सिंह पहली बार यहां से जीतने वाले बीजेपी सांसद बने.

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2014 का चुनावी समीकरण

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रहलाद सिंह पटेल को 5,13,079 (56.25 फीसदी) वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस के चौधरी महेंद्र प्रताप सिंह को 2,99,780 (32.87 फीसदी) वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 2,13,299 वोटों का था. इस चुनाव में बसपा 3.46 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी.

बता दें कि 1989 में पहली जीत हासिल करने के बाद से बीजेपी को इस सीट पर हार नहीं मिली. दमोह के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. देवरी, मल्हारा, जबेरा, रहली, पाथरिया, हट्टा, बंडा, दमोह सीटें यहां पर आती हैं. इन 8 सीटों में से 4 पर कांग्रेस का कब्जा है, 3 पर बीजेपी और 1 सीट पर बीएसपी का कब्जा है.

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