17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की झांसी सीट से भाजपा के अनुराग शर्मा ने गठबंधन उम्मीदवार सपा के श्याम सुंदर सिंह को 362865 वोटों से हराया है. इस सीट पर सपा और बीजेपी की सीधा मुकाबला देखा गया.

कब और कितनी हुई वोटिंग
झांसी सीट पर वोटिंग चौथे चरण में 29 अप्रैल को हुई थी, इस सीट पर 67.58 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. इस सीट पर कुल 2039741 मतदाता हैं, जिसमें से 1378482 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.
प्रमुख उम्मीदवार
सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अनुराग शर्मा चुनाव लड़ रहे थे, जिनका मुख्य मुकाबला सपा के श्याम चंद्र से था. इस सीट पर कुल 11 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे.
2014 का चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में झांसी सीट पर 68.36 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी के उमा भारती को 43.60 फीसदी (5,75,889) वोट मिले थे और और उनके निकटतम सपा प्रत्याशी चंद्रपाल यादव 29.18 फीसदी (3,85,422) मिले थे. इसके अलावा बसपा के अनुराधा शर्मा को महज 18.03 फीसदी (2,13,792) वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी की उमा भारती ने 1,90,467 मतों से जीत दर्ज की थी.
सामाजिक ताना-बाना
झांसी लोकसभा सीट पर 2011 के जनगणना के मुताबिक कुल जनसंख्या 27,57,007 है. इसमें 66.4 फीसदी ग्रामीण और 33.6 फीसदी शहरी आबादी है. अनुसूचित जाति की आबादी इस सीट पर 24 फीसदी और अनुसूचित जनजाति की आबादी 2.27 फीसदी है. इसके अलावा यादव और ब्राह्मण मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं. यहां मुस्लिम 9 फीसदी, सिख 2 फीसदी और जैन धर्म के 3 फीसदी मतदाता हैं.
राजनीतिक इतिहास
झांसी लोकसभा सीट पर आजादी के बाद से अभी तक 17वीं बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. इनमें से 9 बार कांग्रेस को जीत मिली हैं. जबकि 5 बार बीजेपी, एक बार सपा और एक बार लोकदल को जीत मिली है. आजादी के बाद पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव हुए और कांग्रेस के रघुनाथ विनायक धुलेकर ने जीत हासिल की. इसके बाद कांग्रेस यहां से लगतार पांच चुनाव जीतने में कामयाब रही.
कांग्रेस को पहली बार 1977 में इस सीट पर हार मिली और भारतीय लोकदल से सुशीला नायर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. हालांकि 3 साल बाद कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी करते हुए 1980 और 1984 के लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की.
बीजेपी पहली बार झांसी संसदीय सीट पर 1989 में कमल खिलाने में कामयाब रही थी. इसके बाद 1998 तक बीजेपी लगातार चार बार चुनाव जीतने में कामयाब रही. इसके बाद 1999 में कांग्रेस ने फिर वापसी, लेकिन 2004 में पहली बार सपा इस सीट को जीतने में कामयाब रही है. हालांकि पांच साल बाद 2009 में प्रदीप जैन आदित्य को उतारकर कांग्रेस फिर से कब्जा जमाने में कामयाब रही थी. 2014 के लोकसभा मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने फिर वापसी की और यहां से बीजेपी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती जीतने में कामयाब रही थी.
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