महाराष्ट्र की भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के सुनील बाबूराव मेंधे ने जीत का परचम लहराया है. उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंदी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के पंचबुधे नाना जयराम को 197394 वोटों के अंतर से हराया है. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सुनील बाबूराव मेंधे को 650243 वोट हासिल हुए, जबकि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के पंचबुधे नाना जयराम को सिर्फ 452849 वोट मिले.
भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर 11 अप्रैल को पहले चरण में वोटिंग हुई थी. इस सीट से 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने उतरे थे.
चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर 68.27 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया था. इस संसदीय क्षेत्र में कुल 18 लाख 8 हजार 734 मतदाता पंजीकृत हैं, लेकिन कुल 12 लाख 34 हजार 896 वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था.
जानिए इस चुनाव में किसको कितने वोट मिले
Lok Sabha Election Results 2019 LIVE: देखें पल-पल का अपडेट
कौन-कौन थे उम्मीदवार
महाराष्ट्र की भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर नेशनेलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से पंचबुद्धे नाना जयराम मैदान में थे, तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सुनील बाबूराव मेंधे को टिकट दिया था. बहुजन समाज पार्टी ने यहां से डॉक्टर विजया राजेश नांदुरकर को उतारा था.
पिछली बार कौन जीता
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी की टिकट पर नाना पटोले जीते थे, उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल को हराया था. लेकिन पार्टी आलाकमान से नाराजगी के चलते नाना पटोले ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के बाद यहां हुए उपचुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के मधुकर राव कुकड़े चुनाव जीते. उन्होंने बीजेपी के हेमंत पटेल को हराया. वहीं, अब नाना पटोले इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
भंडार-गोंदिया लोकसभा सीट सबसे पहले 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. इससे पहले इस लोकसभा सीट का नाम भंडारा था. लेकिन अब ये सीट दो जिलों भंडारा और गोंदिया में पड़ती है और दोनों ही जिलों की 3-3 विधानसभा सीट इस लोकसभा के तहत आती हैं.
परिसीमन के पहले तक 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी ने जीत दर्ज की. चुन्नीलाल ठाकुर 1999 में और शिशुपाल पटले 2004 में यहां से जीते. हालांकि, परिसीमन के बाद यहां 2009 में बाजी पलट गई. एनसीपी के उम्मीदवार प्रफुल्ल पटेल ने बाजी मारी और उनके प्रतिद्वंदी निर्दलीय उम्मीदवार नाना पटोले को चुनाव हराया.
दिलचस्प बात यह है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद नाना पटोले यहां दूसरे स्थान पर रहे जबकि बीजेपी के शिशुपाल तीसरे स्थान पर रहे. नाना पटोले की इस इलाके में पकड़ को देखते हुए अगले ही चुनाव यानी कि 2014 में बीजेपी ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिया और वो जीतकर संसद भी पहुंचे. हालांकि, पार्टी आलाकमान से मतभेद के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.
चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़लेटर