17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की बदायूं सीट पर समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है. लेकिन इस लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के संघमित्रा मौर्य ने सपा के सांसद एवं गठबंधन प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव को 18454 वोटों से शिकस्त दी है.

बदायूं सीट पर वोटिंग तीसरे चरण में 23 अप्रैल को हुई थी, इस सीट पर 56.70 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. इस सीट पर कुल 1890129 मतदाता हैं, जिसमें से 1071744 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.
कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार
सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर यूं तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी संघमित्रा मौर्य चुनाव लड़ रहे थे, जिनका मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और कांग्रेस के सलीम शेरवानी से था. इस सीट पर कुल 9 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे.
2014 का चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में बदायूं सीट पर 58.09 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव को 48.50 फीसदी (4,98,378) वोट मिले थे और और उनके निकटतम बीजेपी प्रत्याशी योगेश पाठक को 32.31 फीसदी (3,32,031) मिले थे. इसके अलावा बसपा के अकमल खान को महज 15.27 फीसदी (1,56,973) वोट मिले थे. इस सीट पर सपा के धर्मेंद्र यादव ने 1,66,347 मतों से जीत दर्ज की थी
सामाजिक ताना-बाना
बदायूं लोकसभा सीट पर यादव और मुस्लिम मतदाताओं का वर्चस्व है. यहां दोनों ही मतदाता करीब 15-15 फीसदी हैं. बदायूं लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें गुन्नौर, बिसौली, सहसवान, बिल्सी और बदायूं आती हैं. हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव में सहसवान सीट पर ही समाजवादी पार्टी जीत पाई थी, जबकि बाकी सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मारी थी.
बदायूं सीट का इतिहास
बदायूं लोकसभा सीट पर शुरुआती दौर से कांग्रेस का मिला जुला असर रहा था. शुरुआती दो चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली, लेकिन 1962 और 1967 में भारतीय जनसंघ ने बड़े अंतर से चुनाव जीता. 1977 के चुनाव को छोड़ कांग्रेस ने 1971, 1980 और 1984 में जीत हासिल की थी. हालांकि 1984 के बाद कांग्रेस फिर कभी इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी. 1989 में बदायूं सीट चुनाव जनता दल के खाते में गई और 1991 में भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर कब्जा जमाया. 1
996 में सलीम इकबाल ने चुनाव जीतकर समाजवादी पार्टी की जीत का जो सिलसिला शुरू किया वो अब तक कायम है. सलीम इकबाल ने लगातार चार बार चुनावी जीत का परचम लहराया. 2009 में इस सीट पर यादव परिवार की एंट्री हुई और मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेंद्र यादव ने जीत दर्ज की. पिछले चुनाव में भी उन्होंने आसानी से बीजेपी के प्रत्याशी को मात दी.
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