औरंगाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा के उम्मीदवार सुशील कुमार सिंह ने हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के उपेंद्र प्रसाद को 72607 वोटों से हराया. राजपूत बहुल इस सीट को बिहार का चित्तौड़गढ़ कहा जाता है. 1952 से लेकर अब तक यहां से केवल राजपूत उम्मीदवार ही जीता है. बीजेपी उम्मीदवार सुशील कुमार सिंह को 431541 और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के उपेंद्र प्रसाद को 358934 वोट मिले हैं.
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कब और कितनी हुई वोटिंग
औरंगाबाद लोकसभा सीट पर 11 अप्रैल को पहले चरण के दौरान वोट डाले गए थे. इस सीट पर 1739261 पंजीकृत मतदाता (चुनाव आयोग के ऐप के मुताबिक) हैं, जिसमें से 930758 वोटर मतदान के लिए पहुंचे. इस सीट पर कुल मतदान 53.51 प्रतिशत हुआ.
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कौन-कौन हैं प्रमुख उम्मीदवार
औरंगाबाद सीट से कुल 9 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. एनडीए गठबंधन में यह सीट बीजेपी को मिली है, जिसका सीधा मुकाबला महागठबंधन से है. बीजेपी ने सुशील कुमार सिंह को उतारा है और महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने उपेंद्र प्रसाद को. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से नरेश यादव मैदान में हैं तो वहीं पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) से अविनाश कुमार चुनाव लड़ रहे हैं. अखिल हिंद फॉर्वर्ड ब्लॉक (क्रांतिकारी) से डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार और स्वराज पार्टी (लोकतांत्रिक) से सोम प्रकाश चुनाव लड़कर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इसके अलावा धीरेंद्र कुमार सिंह, योगेंद्र राम, संतोष कुमार सिन्हा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं.
2014 का चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में औरंगाबाद सीट से बीजेपी के सुशील कुमार सिंह जीते थे. सिंह को 3,07,941 वोट मिले थे. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी निखिल कुमार को हराया, जिन्हें 2,41,594 वोट मिले थे जबकि जेडीयू के बागी कुमार वर्मा 1,36,137 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे.
सामाजिक ताना-बाना
आद्री समेत कई नदियों के पानी से सिंचित ये इलाका काफी उर्वर इलाका माना जाता है. धान-गेंहू यहां प्रमुखता से उगाया जाता है. 25 लाख की आबादी वाले औरंगाबाद में औसत साक्षरता दर है 70.32 फीसदी. औरंगाबाद लोकसभा सीट पर मतदाताओं की कुल संख्या 1,376,323 है जिनमें से पुरुष मतदाता 738,617 और महिला मतदाता 637,706 हैं. औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- कुटुम्बा, औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, इमामगंज और टिकारी. इनमें से दो सीटें कुटुम्बा और इमामगंज रिजर्व सीटें हैं.
सीट का इतिहास
औरंगाबाद संसदीय सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती है और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह और उनके परिवार का इस सीट पर दबदबा माना जाता है. आजादी के बाद 1952 के पहले चुनाव में यहां से सत्येंद्र नारायण सिंह जीतकर लोकसभा पहुंचे. उन्होंने इस सीट से 7 बार लोकसभा चुनाव जीता. उनके परिवार से 1999 में कांग्रेस की श्यामा सिंह, फिर 2004 में निखिल कुमार जीते. तीन चुनावों में ये सीट जनता दल के हाथ में गई. 1998 में समता पार्टी के सुशील कुमार सिंह इस सीट से जीतने में कामयाब रहे. 2009 के चुनाव में सुशील कुमार सिंह ने जेडीयू और 2014 में बीजेपी के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की.
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