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Exit Poll: केरल में और सुर्ख हुआ 'लाल', बीजेपी के लिए खाता खुलने के भी लाले

एग्जिट पोल के अनुमान के हिसाब से केरल में LDF यानी लेफ्ट गठबंधन एक बार फिर ऐतिहासिक वापसी करने जा रहा है. उसे 104-120 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि UDF यानी कांग्रेस गठबंधन को 2-36 सीटें मिल सकती हैं.

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केरल में बीजेपी की विजय यात्रा के दौरान अमित शाह (फाइल फोटो-PTI) केरल में बीजेपी की विजय यात्रा के दौरान अमित शाह (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केरल में LDF की धमाकेदार वापसी का अनुमान
  • बीजेपी फिर एक बार सबसे निचले पायदान पर
  • पांच साल में बीजेपी को कोई खास फायदा नहीं

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में मतदान पूरा हो चुका है, जिसके बाद एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ गए हैं. इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया ने सभी राज्यों के वोटरों से बात कर ये आंकड़े जुटाए हैं. असम से बीजेपी के लिए अच्छी खबर आई है तो केरल में एक बार फिर उसकी कोशिशों को बहुत बड़ा झटका लगा है. 

एग्जिट पोल के अनुमान के हिसाब से केरल में LDF यानी लेफ्ट गठबंधन एक बार फिर ऐतिहासिक वापसी करने जा रहा है. उसे कुल 140 सीटों में से 104-120 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि UDF यानी कांग्रेस गठबंधन को 2-36 सीटें मिल सकती हैं.

बीजेपी गठबंधन यानी एनडीए की बात की जाए तो उसकी उम्मीदों को बहुत बड़ा झटका यहां लगता नजर आ रहा है. एग्जिट पोल के हिसाब से एनडीए को महज 0-2 सीटें मिलने का अनुमान है, यानी पार्टी यहां बिल्कुल निचले स्तर पर खड़ी नजर आ रही है. 

वोट प्रतिशत की बात की जाए तो एलडीएफ को 47%, यूडीएफ को 38% और एनडीए को 12% वोट मिलने का अनुमान है. जबकि 3% वोट अन्य के खाते में जा सकता है. 
 

बीजेपी को 12 प्रतिशत वोट

बीजेपी ने वोट प्रतिशत के लिहाज से भले ही दहाई का आंकड़ा पार कर लिया हो लेकिन सीटों के लिहाज से वो शून्य पर खड़ी नजर आ रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के तमाम नेताओं की मेहनत यहां कारगर होती नहीं दिख रही है. 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 140 में से महज एक सीट पर ही जीत मिली थी, जिसके बाद पार्टी ने इस चुनाव में पूरा जोर लगाया, लेकिन एग्जिट पोल के अनुमान को देखा जाए तो एनडीए इस बार भी 0-2 सीटें यानी वहीं खड़ा नजर आ रहा है.

केरल में बीजेपी की यह स्थिति तब नजर आ रही है जबकि उसने सबरीमाला मंदिर जैसे मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बजाय जनता की भावनाओं के साथ जाने का फैसला किया था. दूसरी तरफ, केरल में लव जिहाद और आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या जैसे मुद्दों को भी पार्टी ने पुरजोर तरीके से उठाया था. 

 

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