महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के परिणामों और उसके बाद सरकार गठन में मिली नाकामयाबी सिर्फ एक राज्य तक सीमित होकर रह जाने वाली बात नहीं है. आने वाले समय में जिन भी राज्यों में चुनाव होंगे वहां क्षेत्रीय दल अब ज्यादा मजबूती के साथ अपनी शर्तें रखते नजर आएंगे. यह बात झारखंड में चुनावों की घोषणा के बाद से साबित होती भी नजर आ रही है.
झारखंड में बीजेपी को झटका
झारखंड में पहले बीजेपी की सहयोगी पार्टी आजसू ने अपने तेवर तीखे किए तो वहीं मंगलवार को अप्रत्याशित रूप से लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने भी राज्य में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.
लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए कहा है कि आज शाम तक पार्टी के उमीदवारों की पहली सूची का ऐलान भी हो जाएगा. चिराग पासवान ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा है कि झारखंड में चुनाव लड़ने का आखिरी फैसला प्रदेश इकाई को लेना था. लोक जनशक्ति पार्टी झारखंड प्रदेश इकाई ने चुनावी मैदान में अकेले जाने का फैसला लिया है. चिराग के मुताबिक उनकी पार्टी राज्य में 50 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी.
आजसू ने भी दिए बीजेपी से नाता तोड़ने के संकेत
गौरतलब है कि पहले चरण के लिए 30 नवंबर को मतदान होना है और 23 दिसंबर को नतीजे आएंगे. एलजेपी के इस फैसले से एक दिन पहले ही झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सहयोगी पार्टी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) की ओर से भी गठबंधन तोड़ने के संकेत दे दिए गए थे.
आजसू ने जिन 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं उनमें से 4 विधानसभा सीटों पर रविवार को ही बीजेपी अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर चुकी है. ये चारों सीटें हैं सिमरिया, सिंदरी, मांडू और चक्रधरपुर.
सूत्रों की मानें तो आजसू ने बीजेपी से 19 सीटों की मांग की थी. बीजेपी को संदेश दिया था कि उसे कम से कम 14 सीटें चाहिए लेकिन बीजेपी आजसू को 9 से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है.
बीजेपी के चीफ व्हिप ने भी थामा आजसू का दामन
झारखंड बीजेपी के चीफ व्हिप राधा कृष्ण किशोर मंगलवार को ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) में शामिल हो गए. राधा कृष्ण किशोर छत्तरपुर पलामु से विधायक हैं. 2014 के चुनाव में वह बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते थे. हालांकि इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट दिया गया था.