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आज दाहोद में राहुल की रैली, 20 दिन पहले मोदी खींच चुके हैं यहां ये बड़ी लकीर

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को गुजरात के दाहोद में आदिवासी समुदाय की एक रैली को संबोधित करने जा रहे हैं. वहीं, करीब 20 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दाहोद में ही आदिवासी समाज को विकास की सौगात देकर सियासी लकीर खींचने की कवायद की थी. ऐसे में देखना है कि राहुल गांधी अब क्या सियासी एजेंडा सेट करते हैं?

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राहुल गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी राहुल गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राहुल गांधी आदिवासी सत्याग्रह रैली को कर रहे संबोधित
  • मोदी ने दाहोद में 22 हजार करोड़ की सौगात दिया था
  • 15 फीसदी आदिवासी वोटर का 27 सीटों पर असर है

गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी एक दिवसीय दौरे पर गुजरात पहुंच गए हैं. जहां वो दाहोद में 'आदिवासी सत्याग्रह' रैली को संबोधित कर रहे हैं. इसके बाद राहुल गांधी दाहोद के स्वामी विवेकानंद स्कूल में कांग्रेस विधायकों और आदिवासी समुदाय के नेताओं के साथ बैठक करेंगे. वहीं, पिछले महीने ही पीएम मोदी ने दाहोद में आदिवासी समुदाय के लिए विकास की सौगात से नवाजते हुए सियासी एजेंडा सेट किया था. ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर लगी हैं कि राहुल गांधी किस तरह पीएम मोदी से आगे अपनी सियासी लकीर खींचते हैं? 

बीजेपी ने गुजरात विधानसभा चुनाव में इस बार 150 प्लस सीटें जीतने का टारगेट रखा है. इस लक्ष्य को पाने के लिए बीजेपी की नजर राज्य के एसटी-एससी वोट बैंक पर है. इसी मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल को दाहोद में आदिवासियों को संबोधित किया था. मोदी ने विकास से जुड़ी 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया था. मोदी आदिवासी समुदाय के लिए पीने के पानी से लेकर रोजगार और विकास का एजेंडा सेट करते नजर आए थे. इस दौरान पीएम मोदी आदिवासियों के पारंपरिक आभूषणों और साफा में नजर आए थे. 

पीने के पानी की समस्या से जूझ रहा आदिवासी समुदाय  
गुजरात में आदिवासी बेल्ट में पीने की पानी की कमी एक बड़ा मुद्दा है. पीएम ने दाहोद जिला दक्षिणी इलाके में क्षेत्रीय जल आपूर्ति योजना का भी उद्घाटन किया, जिसकी लागत 893 करोड़ रुपये है. इसके तहत नर्मदा नदी से छोटा उदेपुर जिले के कावंत तालुका में हफेश्वर के माध्यम से दाहोद तक पानी लाने की परिकल्पना की गई है. पीएम मोदी ने इस दौरान कहा था कि इस योजना के जरिए आदिवासी समुदाय को पानी की समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा.  पानी के इस प्रोजेक्ट से दाहोद के सैंकड़ों गांवों की माताओं बहनों का जीवन बहुत आसान होने वाला है. 

आदिवासी बेल्ट में 10 हजार रोजगार
पीएम मोदी ने दाहोद में 20 हजार करोड़ रुपये के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माण संयंत्र की आधारशिला रखा. आदिवासी बहुल दाहोद जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा उन्नत लोकोमोटिव परियोजना की घोषणा रोजगार की दिशा एक बड़ा कदम माना जा रहा है. दाहोद में रोजगार के अवसरों की कमी के कारण, काफी बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं. पीएम मोदी ने कहा था कि इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माण से 10 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा. इस तरह पीएम मोदी ने आदिवासी समुदाय के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की उम्मीद जगाने का काम किया. 

मेक इन इंडिया का केंद्र और स्मार्ट सिटी की सौगात
पीएम मोदी ने इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माण की आधारशिला रखने के बाद कहा था कि दाहोद अब मेक इन इंडिया का भी बहुत बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. गुलामी के दौर में यहां स्टीम लोकोमोटिव के लिए एक वर्कशाप था अब वह मेक इन इंडिया को गति देगा. पीएम ने कहा था कि मेक इन इंडिया के साथ अब भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है जो नौ हजार हार्स पावर के शक्तिशाली इंजनों का निर्माण करते हैं. इलेक्ट्रिक इंजनों की विदेशों में मांग बढ़ रही है, जिसे पूरा करने में दाहोद बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है. साथ ही आदिवासी बहुल दाहोद को स्मार्ट सिटी बनाने का है, जिसके तहत तमाम विकास परियोजनाएं लाई जा रही हैं. 

अब राहुल गांधी दाहोद में
पीएम मोदी के दौरे के बीस दिन बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को दाहोद पहुंच गए हैं, जहां पर आदिवासी समुदाय के बीच होंगे. ऐसे में सभी की निगाहें होगी कि राहुल गांधी आदिवासी समुदाय को साधने के लिए क्या-क्या सियासी दांव चलते हैं और पीएम मोदी के सियासी एजेंडे की कैस काट करते हैं, क्योंकि गुजरात में आदिवासी वोटर सियासी तौर पर काफी अहम माने जा रहे हैं. 

गुजरात में 15 फीसदी आदिवासी समुदाय है, जिनके लिए 27 सीटें आरक्षित हैं. गुजरात में इन 27 सीटों के अलावा भी कुछ सीटें हैं, जहां पर आदिवासी वोटर निर्णायक हैं. इसीलिए कांग्रेस से लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी की नजर आदिवासी वोटरों पर है, जिन्हें साधने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है. 

 

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