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गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 सोमनाथ सीट: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद क्या अब सोमनाथ होगा गुजरात चुनाव का नया मुद्दा

गिर सोमनाथ की पहली विधानसभा सीट सोमनाथ है. अगस्त 2013 में जुनागढ़ से अलग होने के बाद गिर सोमनाथ में कुल 4 सीट हैं. जिसमें ऊना, सोमनाथ, कोडीनार और तलाला. फिलहाल सभी सीट कांग्रेस के कब्जे में हैं. 

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देश का पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव मंदिर (फाइल- फोटो) देश का पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव मंदिर (फाइल- फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुजरात विधानसभा चुनावा 2022
  • गिर सोमनाथ सीट बेहद अहम
  • पश्चिमि क्षेत्र में अरबसागर के तट पर स्थित है

गुजरात विधानसभा 2022 के लिए सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है. इस साल के अंत तक यहां चुनाव होने हैं. गिर सोमनाथ विधानसभा सीट गुजरात की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है. ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां इस सीट पर कब्जा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगी. सोमनाथ जिला पहले जूनागढ़ जिला में शामिल था. इसकी सीमा भेसान से लेकर ऊना तक और विसावदर से लेकर पोरबंदर तक थी.  

भगवान सोमनाथ के नाम और गिर जंगल के नाम पर इस जिले का नाम रखा गया है. अब गिर सोमनाथ की अपनी एक पहचान है. विशाल समुद्र तट और जंगलों से घिरा है. इस जिले में मत्स्य उद्योग, खेती, आम और नारियल के बाग और शुगर फैक्ट्री मुख्य व्यवसाय है. समृद्धि से भरपूर इस जिले में प्रवासन उद्योग पूरा साल चलता है. 

विधानसभा क्षेत्र परिचय

गिर सोमनाथ की पहली विधानसभा सीट सोमनाथ है. अगस्त 2013 में जुनागढ़ से अलग होने के बाद गिर सोमनाथ में कुल 4 सीट हैं. जिसमें ऊना, सोमनाथ, कोडीनार और तलाला. फिलहाल सभी सीट कांग्रेस के कब्जे में हैं. यानी की चारों सीट पर कांग्रेस के विधायक हैं. बीजेपी ने पिछले चुनाव में इस सीट को हथियाने की पूरी कोशिश की थी पर उसे कुछ कामयाबी हासिल नहीं हो पाई थी.  

सोमनाथ सीट की भौगोलिक परिस्थिति

गुजरात के पश्चिमि क्षेत्र में अरबसागर के तट पर स्थित है जूनागढ़. 9 नवम्बर 1947 को आजाद हुए जूनागढ़ की खुद की एक अलग पहचान है. आज भी पाकिस्तान जूनागढ़ को उनके नक्शे में दिखाता है. जूनागढ अहमदाबाद से 300 किमी, राजकोट से 100 किमी और सोमनाथ से 90 किमी की दूरी पर है.

सोमनाथ सीट की राजकीय परिस्थिति

गिर सोमनाथ जिला की बड़ी अहम सीट है. यहां 1962 से लेकर अभी तक 13 चुनाव हुए हैं,  जिसमें से 8 बार कांग्रेस और सिर्फ 2 बार बीजेपी जीत पाई है. बता दें, 13 चुनावों में जसाभाई बारड ने 4 बार कांग्रेस से जीता. साल  2017 का चुनाव उन्होंने बीजेपी से लड़ा था और 20500 मतों से उन्हें हार झेलनी पड़ी थी.   

सोमनाथ में व्यापार और व्यवसाय

यहां उद्योग या फैक्ट्री जैसा कोई बड़ा धंधा नहीं है. ज्यादातर लोग खेती करते हैं या गृहउद्योग चलाते हैं. टूरिज्म भी यहां एक अच्छी आमदनी का साधन है. किसानों की समस्या ही राजनीतिक चुनाव का मुद्दा रहती है. यहां तूफान ओर मौसम की मार से किसान परेशान रहते हैं. यहां राजनीति में किसान, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर विधायक की जीत या हार तय होती है. वेरावल की मछलियां देश विदेश में प्रसिद्ध है और इसीलिए यहां से मछलियां कई देशों में निर्यात की जाती है. यहां इंडियन रेयोन एक बड़ी कंपनी है जो की आदित्य बिरला ग्रुप की है. वेरावल के विकास में रेयोन कंपनी का भी योगदान है.  इसके अलावा अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री है जिसे हाल ही में अदानी ग्रुप ने खरीद लिया है. 

सोमनाथ सीट की मुख्य समस्याएं

प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ प्रवासन का मुख्य आकर्षण है पर यह चारों तरफ गंदगी और कूड़ा फैला नजर आता है, वेरावल और प्रभास पाटन की गटर सीधी ही समुद्र में छोड़ी जाती है, जिससे समुद्र तट और समुद्र का पानी गंदा होता जा रहा है, स्वच्छता और सफाई की भरपूर कमी है, प्रांचि में इतनी बदबू और गंदगी जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है. यहां भारत की समुद्री सीमा पाकिस्तान से लगती है. जिसकी वजह से पाकिस्तान नेवी भारतीय मछुआरों को पकड़ लेती है.  

 आनेवाले चुनाव में क्या रहेंगे मुद्दे

2022 में गुजरात विधानसभा के चुनाव होने हैं.  बीजेपी और कांग्रेस  समान जाति के उमीदवार को टिकट देते हैं. ऐसे में कोली समाज के मतों का बंटवारा होता है. यहां दूसरी बड़ी आबादी मछुवारों की है. तीसरी  मुस्लिमों की. 

 

 

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