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Delhi Elections 2020: संगम विहार सीट पर कांग्रेस को कभी नहीं मिली जीत, AAP से मिलेगी चुनौती

संगम विहार विधानसभा क्षेत्र पिछड़े इलाकों में शुमार किया जाता है जहां विकास कार्यों का अभाव दिखता है. इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती पीने की पानी है. उम्मीदवारों के सामने इन समस्याओं से निपटने का रास्ता बताने की होगी चुनौती.

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Delhi Assembly Election 2020 (फाइल फोटो-PTI)
Delhi Assembly Election 2020 (फाइल फोटो-PTI)

  • पिछड़ा हुआ इलाका है संगम विहार
  • यहां कांग्रेस को कभी नहीं मिली जीत

दिल्ली में संगम विहार विधानसभा क्षेत्र उन इलाकों में शुमार किया जाता है जहां विकास कार्यों का अभाव दिखता है. इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती पीने की पानी की सप्लाई है. बहरहाल, यह भी उन सीटों में शामिल हैं जिनका अस्तित्व 2002 के परिसीमन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद सामने आया है.

इस सीट पर 2008 में हुए पहले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के डॉ. शिवचरण गुप्ता को जीत मिली. 2013 और 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के दिनेश मोहनिया लगातार जीत रहे हैं. दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली संगम विहार विधानसभा सीट कांग्रेस कभी जीत नहीं पाई.

संगम विहार सीट की स्थिति

संगम विहार सीट के तहत आने वाली कुल आबादी में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी 10.48 फीसदी है. 2019 की मतदाता सूची के अनुसार इस सीट पर 1,82,305 मतदाता 151 मतदान केंद्रों पर वोट डालेंगे. 2015 के चुनावों में यहां 66.68% मतदान हुए थे जिसमें बीजेपी, कांग्रेस और आदमी पार्टी को क्रमशः 25.73%, 3.13% और 65.96% वोट मिले.

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विधानसभा चुनाव 2015

दिनेश मोहनिया (आम आदमी पार्टी)- 72,131    (65.95%)

डॉ. शिव चरण लाल गुप्ता (बीजेपी)- 28,143     (25.73%)

विशन स्वरूप अग्रवाल (कांग्रेस)- 3,423    (3.13%)

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विधानसभा चुनाव 2013

दिनेश मोहनिया (आम आदमी पार्टी)- 24,851    (27.87%)

डॉ. शिव चरण लाल गुप्ता (बीजेपी)- 24,074     (27.00%)

जग परवेश (कांग्रेस)- 16,435    (18.43%)

2013-2015 में क्या थी चुनावी स्थिति

बहरहाल, दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समक्ष अपना सबसे मजबूत किला बचाने की प्रबल चुनौती है.

पिछले विधानसभा चुनाव में दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीतने वाले केजरीवाल का जादू इस बार चलेगा या नहीं इस पर पूरे देश की निगाहें हैं. केजरीवाल अपने पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान विशेषकर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को गिनाते हुए इस बार भी पूरे आत्मविश्वास में हैं जबकि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पिछला करिश्मा दोहराना मुश्किल नजर आ रहा है.

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वर्ष 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही ‘AAP’ का गठन हुआ था और उस चुनाव में दिल्ली में पहली बार त्रिकोणीय संघर्ष हुआ जिसमें 15 वर्ष से सत्ता पर काबिज कांग्रेस 70 में से केवल आठ सीटें जीत पाई जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार बनाने से केवल चार कदम दूर अर्थात 32 सीटों पर अटक गई. ‘आप’ को 28 सीटें मिली और शेष दो अन्य के खाते में रहीं.

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बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के प्रयास में कांग्रेस ने ‘AAP’ को समर्थन दिया और केजरीवाल ने सरकार बनाई. लोकपाल को लेकर दोनों पार्टियों के बीच ठन गई और केजरीवाल ने 49 दिन पुरानी सरकार से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा और फरवरी 2015 में ‘AAP’ने सभी राजनीतिक पंडितों के अनुमानों को झुठलाते हुए 70 में से 67 सीटें जीतीं. बीजेपी तीन पर सिमट गई जबकि कांग्रेस की झोली पूरी तरह खाली रह गई.   

वोटिंग और मतगणना कब?

दिल्ली की पहली विधानसभा का गठन 1993 में हुआ था और इस बार यहां पर सातवां विधानसभा चुनाव कराया जा रहा है. इससे पहले राजधानी दिल्ली में मंत्रीपरिषद हुआ करती थी. दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में इस बार महज एक चरण में मतदान हो रहा है. 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे जबकि 11 फरवरी को मतगणना होगी. छठी दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी 2020 को समाप्त हो जाएगा.

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