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शाहपुर विधानसभा सीट: पिछले चुनाव में RJD ने बिगाड़ा था बीजेपी खेल, इस बार वापसी पर नजर

यहां की शाहपुर विधानसभा सीट पर पिछले कुछ चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल का दबदबा दिखा है लेकिन कांटे का मुकाबला भी होता रहा है.

पिछले चुनाव में राजद ने मारी थी बाजी पिछले चुनाव में राजद ने मारी थी बाजी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में तीन चरण में होंगे चुनाव
  • दस नवंबर को आएंगे चुनावी नतीजे

बिहार में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी पारा बढ़ता जा रहा है. भोजपुर जिले में भी राजनीतिक दलों की हलचल दिख रही है. यहां की शाहपुर विधानसभा सीट पर पिछले कुछ चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल का दबदबा दिखा है लेकिन कांटे का मुकाबला भी होता रहा है. ऐसे में इस बार यहां किसके माथे पर जीत का सेहरा बंधता है इसपर नज़र रहेगी. 

कौन है उम्मीदवार?
•    मुन्नी देवी – भारतीय जनता पार्टी
•    गुड़िया देवी – एनसीपी
•    राहुल तिवारी – राष्ट्रीय जनता दल
•    वेद प्रकाश - रालोसपा

मतदान की तिथि – पहला चरण, 28 अक्टूबर

क्या कहता है राजनीतिक इतिहास?
आरा लोकसभा के अंतर्गत आने वाले शाहपुर में पहला चुनाव 1951 में ही हुआ था. तब सोशलिस्ट पार्टी ने जीत का खाता खोला था. 1972 में कांग्रेस को यहां जीत का स्वाद मिला, लेकिन अगले ही चुनाव में जनता पार्टी ने उसका खेल बिगाड़ दिया.1990 के चुनाव के बाद दो बार यहां से जनता दल ही चुनाव जीता. लेकिन पिछले तीन चुनाव में दो बार भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है. ऐसे में अब बीजेपी की नजर सीट पर वापसी से है. शाहपुर को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है. 

कैसा है सामाजिक तानाबाना?
इस इलाके को वोटरों के हिसाब से ब्राह्मण बहुल माना जाता रहा है, यही कारण है कि राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों में भी उसकी झलक दिखती है. हालांकि, दो बार धर्मपाल सिंह ने भी यहां पर अपना खाता खोला है. इस सीट पर तीन लाख के करीब वोटर हैं, जिनमें से 1.49 लाख से अधिक पुरुष वोटर हैं. 

पिछले विधानसभा चुनाव में क्या थे नतीजे?
2015 के विधानसभा चुनाव में यहां से राष्ट्रीय जनता दल के राहुल तिवारी ने जीत दर्ज की थी. राहुल तिवारी को 69,315 वोट मिले थे तो भाजपा के विश्वेश्वर ओझा को 54,745 वोट प्राप्त हुए थे. वहीं, तीसरे स्थान पर जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के कृष्ण बिहारी सिंह रहे थे, उन्हें 3680 वोट मिले थे. 

स्थानीय विधायक के बारे में?
इस सीट से विधायक राहुल तिवारी को राजनीति विरासत में मिली. राजद के बड़े नेता रहे शिवानंद तिवारी उनके पिता हैं, खुद शिवानंद भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं. शिवानंद तिवारी मूल रूप से भोजपुर के ही हैं. यही कारण रहा कि उन्हें वोटरों का दिल जीतने में मुश्किल नहीं हुई. हालांकि, इस बार जब जदयू-भाजपा का गठबंधन फिर साथ है तो उनके लिए राह आसान नहीं होगी. 

 

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