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पातेपुर विधानसभा सीटः क्या बीजेपी पहली और आखिरी जीत के इतिहास को बदल पाएगी?

पातेपुर सीट पर 2015 के चुनावों में राजद उम्मीदवार प्रेमा चौधरी ने जीत हासिल की थी. बीजेपी उम्मीदवार महेंद्र बैठा को दूसरे स्थान पर रहना पड़ा था. इस सीट पर 2015 के चुनाव में नीतीश कुमार की जदयू ने राजद उम्मीदवार को समर्थन दिया था.

पातेपुर सीट से राजद की प्रेमा चौधरी ने 2015 में जीत हासिल की थी पातेपुर सीट से राजद की प्रेमा चौधरी ने 2015 में जीत हासिल की थी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2010 में पातेपुर में बीजेपी को मिली थी पहली जीत
  • राजद की प्रेमा चौधरी ने 2015 में जीत हासिल की थी
  • हमेशा दो चिरपरिचित प्रतिद्वंदियों के बीच रही है जंग

पातेपुर विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से शिवचंद्र राम, बीजेपी से लोकेंद्र कुमार रौशन और जन अधिकार पार्टी के अनिल पासवान मैदान में है. इस सीट से 18 उम्मीदवार चुनाव मैदान में, लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी और आरजेडी के बीच है. इस सीट पर सात नवंबर को हुए चुनाव में 56.85% मतदान दर्ज किया गया. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.

2015 में क्या रहा नतीजा

उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली पातेपुर विधानसभा सीट लंबे समय से दो नेताओं के बीच जंग का मैदान रही है. पातेपुर में 2010 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के महेंद्र बैठा जीते थे. यह इस सीट पर बीजेपी की पहली और आखिरी जीत थी. वैसे भी महेंद्र बैठा पुराने सदस्य नहीं हैं. वह बीजेपी से पहले पहले लोकजन शक्ति पार्टी (एलजेपी) और जनता दल से चुनाव जीत चुके थे. 2015 में जदयू की मदद से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार प्रेमा चौधरी की जीत हुई थी.

अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित पातेपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास बताता है कि इस सीट पर हर बार का चुनावी मुकाबला बहुकोणीय रहा है, लेकिन फिलहाल हम विजेता और दूसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवारों का ही जिक्र करेंगे. 2015 के चुनावों में राजद उम्मीदवार प्रेमा चौधरी ने जीत हासिल की थी. बीजेपी उम्मीदवार महेंद्र बैठा को दूसरे स्थान पर रहना पड़ा था. इस सीट पर 2015 के चुनाव में नीतीश कुमार की जदयू ने राजद उम्मीदवार को समर्थन दिया था.

दो उम्मीदवारों के बीच जंग की सीट 

इससे पहले, 2010 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के टिकट पर महेंद्र बैठा ने जीत हासिल की थी और उन्होंने राजद उम्मीदवार प्रेमा चौधरी को शिकस्त दी थी. जबकि 2005 के चुनावों में राजद की प्रेमा चौधरी ने अक्टूबर 2005 में एलजेपी के टिकट पर मैदान में उतरे महेंद्र बैठा को हराया था. उसी साल फरवरी में हुए चुनाव में एलजेपी उम्मीदवार महेंद्र बैठा ने प्रेमा चौधरी को शिकस्त दी थी. 

महेंद्र बैठा वर्ष 2000 के चुनाव में जदयू के टिकट पर मैदान में उतरे थे लेकिन उन्हें राजद के टिकट पर चुनाव लड़ीं प्रेमा चौधरी ने हराया था. इससे पहले 1995 के चुनावों में महेंद्र बैठा ने जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े महेंद्र बैठा ने एसएपी की उम्मीदावर प्रेमा चौधरी को मात दी थी. यानी 1995 से इस सीट का इतिहास देखें तो पता चलता है कि यहां महेंद्र बैठा और प्रेमा चौधरी के बीच चुनावी जंग चलती रही है.

1995 के पहले की स्थिति पर नजर डालें तो पता चलता है कि 1990 में जनता दल के राम सुंदर दास ने कांग्रेस के बालेश्वर सिंह पासवान को हराया था. 1985 में कांग्रेस के बालेश्वर सिंह पासवान ने लोकदल के पल्टन राम को शिकस्त दी थी. जनता पार्टी (सेकुलर -चरण सिंह) के शिव नंदन पासवान ने 1980 में कांग्रेस के बालेश्वर सिंह पासवान को हराया था. 1977 के चुनावों में जनता पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे पल्टन राम ने 1977 में सीपीआई के रिजन राम को हराया था.

क्षेत्रीय सामाजिक समीकरण

संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश 2008 के अनुसार पातेपुर निर्वाचन क्षेत्र के तहत पातेपुर सामुदायिक विकास खंड; मानसिंहपुर बिजरौली, कुमार बाजितपुर, राघोपुर नरसंडा, अदलपुर, नारी खुर्द और जंदाहा विकास खंड का एरिया आता है.

उजियारपुर लोकसभा सीट के तहत आने वाली पातेपुर निर्वाचन क्षेत्र की आबादी 419970 है. यह ग्रामीण इलाका है जिसमें अनुसूचित जाति की आबादी 23.16 और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 0.02 फीसदी है. 2015 के चुनावों में यहां 56.29% वोटिंग हुई थी. बीजेपी और राजद को क्रमशः  37.57% और 46.07% वोट मिले थे. 2015 के चुनावों में यह सीट राजद के खाते में दर्ज की गई थी.

 

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