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Bihar Assembly election, 2020: बथनाहा सीट पर क्या बरकरार रहेगा NDA का जलवा?

बथनाहा विधानसभा सीतामढ़ी लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है. साल 2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर जीत भारतीय जनता पार्टी को मिली थी. बीजेपी के दिनकर राम और कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र राम के बीच मुकाबला रहा.

बथनाहा का रेलवे स्टेशन बथनाहा का रेलवे स्टेशन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी के दिनकर राम हैं विधायक
  • दलित और किसान नेता के तौर पर है पहचान
  • सीतामढ़ी के अंतर्गत आती है बथनाहा सीट

बथनाहा विधानसभा सीतामढ़ी लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है. साल 2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर जीत भारतीय जनता पार्टी को मिली थी. बीजेपी के दिनकर राम और कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र राम के बीच मुकाबला रहा. 

जहां बीजेपी को 74,763 वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस पार्टी को 54,597 वोट मिले थे. हालांकि इस सीट से भारी अंतर से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.

यह सीट 10 साल से बीजेपी के कब्जे में है. 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के प्रत्याशी दिनकर राम ने लोक जनशक्ति पार्टी की उम्मीदवार ललिता देवी को हराया था. उससे पहले 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के पास थी. नगीना देवी इस सीट से विधायक थीं. दरअसल यह सीट साल 2010 से ही आरक्षित सीट है.

2015 का जनादेश

साल 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के दिनकर राम को जीत मिली थी. कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र राम से दूसरे नंबर पर थे. 2015 के चुनाव में कुल 12 लोगों ने चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में 10 प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई थी. 

बथनाहा विधानसभा का परिचय 

बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में से यह सीट आरक्षित वर्ग के लिए है. 2008 के विधानसभा चुनावों से पहले यह सीट सामान्य थी. इस विधानसभा में कुल 2,64,299 वोटर्स हैं. इनमें से कुल 1,38,385 पुरुष हैं, वहीं 1,25,901 महिला वोटर्स हैं.

सांस्कृतिक इतिहास

यह विधानसभा मिथिला क्षेत्र का प्रमुख इलाकों में से एक है. बिहार के उत्तरी गंगा के मैदान में स्थित यह इलाका नेपाल की सीमा पर होने के कारण संवेदनशील है. वैसे पूरे सीतामढ़ी जिले को माना जाता है कि यह क्षेत्र सीता का जन्म क्षेत्र है. पूरे जिले को रामायण काल से जोड़कर देखा जाता है.

सीट का इतिहास

यह सीट 1967 में अस्तित्व में आई. इस सीट पर कुल 13 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक 2005 में उपचुनाव भी हुआ है.  पहली बार 1967 में यहां वोट पड़े थे.

विधायक के बारे में

दिनकर राम का जन्म 1 अप्रैल 1943 को हुआ था. ग्राम खैरवा में जन्में दिनकर राम एक किसान परिवार से आते हैं. राजनीति में आने से पहले वे कृषक थे. साल 1974 में उन्होंने राजनीति में एंट्री ली. दिनकर राम मैट्रिक पास हैं. सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर एक लंबे अरसे से सक्रिय रहे हैं. दिनकर राम अपने विधानसभा के लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं. इनकी छवि सादगी पूर्ण व्यक्तित्व वाले दलित नेता के तौर पर होती है. बीजेपी के प्रमुख दलित नेताओं में दिनकर राम का भी नाम शामिल है.

बेहद दिलचस्प होगी लड़ाई

बथनाहा विधानसभा सीट पर इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प है. एनडीए की ओर से भारतीय जनता पार्टी के अनिल कुमार चुनावी समर में हैं. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार संजय राम चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के उम्मीदवार चंद्रिका पासवान भी चुनावी समर में हैं. बहुजन मुक्ति पार्टी से शिव मंगल पासवान भी चुनाव लड़ रहे हैं. पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया(डेमोक्रेटिक) से कुनकुन मांझी चुनावी समर में हैं. राष्ट्रीय जनसंभवाना पार्टी के राजेश पासवान भी मैदान में हैं.

 


55.2% लोगों ने किया वोट

तीसरे चरण में 15 जिलों की 78 सीटों पर चुनाव हुए. बाथनाहा में भी तीसरे चरण में ही चुनाव हुआ था. बथनाहा विधानसभा में कुल 55.2% फीसदी लोगों ने वोट किया है. 10 नवंबर को चुनाव के नतीजे घोषित होंगे.

सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि

देश में 2010 से ही इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है. साल 2010 से पहले 2005 में हुए चुनावों में यह सीट लोकजनशक्ति पार्टी के कब्जे में रही. वहीं 2005 में यह सीट राष्ट्रीय जनता दल(आरजेडी) के पास थी. फिलहाल इस सीट पर बीजेपी के गठबंधन का प्रभुत्व है. इस बार के चुनाव में भी महागठबंधन बनाम एनडीए की लड़ाई है. 

देखने वाली बात यह है कि 2010 से ही अभेद्य किले के तौर पर नजर आने वाली बीजेपी इस बार यह सीट बचाने में कामयाब हो पाती है या नहीं. 1977 से 1985 तक यह सीट कांग्रेस की रही है. वहीं 1990 और 1995 के विधानसभा चुनाव में यह विधानसभा सीट यह सीट जनता दल की थी. अब तक के रुझानों के मुताबिक यहां प्रत्याशियों की तुलना में पार्टी की राजनीति ज्यादा हावी है.

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