बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है, तीन चरणों में हुए चुनावों में इस बार कुल 59.94 फीसदी वोटिंग हुई है. अब 10 नवंबर को नतीजों का इंतजार है. बिहार की मढ़ौरा विधानसभा सीट पर इस बार 3 नवंबर को वोट डाले गए, यहां कुल 56.36% मतदान हुआ. बिहार के सारण जिले में आने वाले मढ़ौरा विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनावों से राजद का कब्जा है. जितेंद्र कुमार राय यहां से विधायक हैं. जितेंद्र कुमार राय के पिता यदुवंशी राय भी इस सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं. हालांकि पिछली बार जदयू और राजद ने मिलकर चुनाव लड़ा था जिसमें बीजेपी उम्मीदवार लाल बाबू राय की हार हुई थी. लेकिन इस बार के बदले हुए समिकरणों में पासा पलट सकता है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
मढ़ौरा विधानसभा सीट पर राजद का दबदबा माना जाता है. इस बात का अंदाजा इसी चीज से लगाया जा सकता है कि पिछले 5 बार के विधानसभा चुनावों में तीन बार राजद उम्मीदवार को यहां से जीत मिली है. हालांकि, पिछली बार के चुनाव में राजद को जदयू का समर्थन प्राप्त था और बीजेपी विपक्ष में थी. ऐसे में इस बार का चुनाव दिलचस्प होने वाला है.
पिछले 30 सालों में इस सीट पर काफी उठापटक रही है. 1990 तक इस सीट पर जनता पार्टी और कांग्रेस का दबदबा रहा लेकिन इसके बाद कांग्रेस को एक भी जीत नहीं मिल सकी. वहीं 1990 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर निर्दलीय सुरेंद्र शर्मा ने जीत हासिल की थी. उन्होंने जनता दल के यदुवंशी राय को हराया था.
इसके बाद 1995 के चुनावों में यदुवंशी को जनता दल के टिकट पर जीत मिली और वो विधायक बने. 2000 में उन्होंने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा और सुरेंद्र शर्मा को हराया. हालांकि, फरवरी 2005 के विधानसभा चुनावों उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार लाल बाबू राय के हाथों हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद अक्टूबर 2005 में हुए चुनावों में यदुवंशी राय के बेटे जितेंद्र राय ने पिता के आरजेडी के बजाय जेडीयू का दामन थामा और चुनाव लड़े लेकिन पिता के बाद उन्हें भी हार मिली.
2010 के विधानसभा चुनावों से पहले जितेंद्र कुमार राय ने घर वापसी की और आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़े और लगातार दो बार से वही विधायक पद पर बने हुए हैं.
वहीं, उनके धुर-विरोधी लाल बाबु राय ने 2005 में जब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमाई तो उन्हें भारी मतों से जीत हासिल हुई थी. जैसे ही उन्होंने जेडीयू का दामन थामा उन्हें (2010 में) हार का सामना करना पड़ा. 2015 के चुनावों से पहले जेडीयू और आरजेडी का गठबंधन हो जाने से यह सीट आरजेडी के खाते में गई और पार्टी का टिकट विधायक जितेंद्र कुमार राय को मिला. इसके बाद बगावती सुर दिखाते हुए लाल बाबू राय जेडीयू छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए. लेकिन यहां उन्हें पिछले चुनाव में हार ही मिला.
सामाजिक ताना बाना
मढ़ौरा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बिहार के सारण जिले में स्थित है और सारण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यहां करीब 389151 आबादी रहती है. इसमें 92.31 फीसदी लोग ग्रामीण हैं और 7.69 फीसदी शहरी आबादी है. वहीं, अनुसूचित जाति (एससी) के लोगों की आबादी 11.36 फीसदी और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 0.07 फीसदी लोग रहते हैं.
2015 का जनादेश
2015 के विधानसभा चुनावों में जितेंद्र कुमार राय ने बीजेपी उम्मीदवार को करीब 16700 वोटों के अंतर से हराया था. यहां राय को 47.61 फीसदी वोट मिले थे, वहीं बीजेपी के लाल बाबू राय को 35.68 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे. 2015 के चुनावों में इस सीट पर 57.1 फीसदी वोटिंग हुई थी.
दूसरे चरण में 3 नवंबर 2020 को इस सीट पर वोट डाले जाएंगे. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.
इस बार के मुख्य उम्मीदवार
राजनीतिक परिवार से होने के कारण मढ़ौरा से विधायक जितेंद्र कुमार राय की शुरू से दिलचस्पी राजनीति में रही. उन्होंने साल 2000 में राजनीति में कदम रखा और जय प्रकाश यूनिवर्सिटी में राजद की तरफ से छात्रों का नेतृत्व किया. इस दौरान वो अध्यक्ष पद पर रहे. इसके बाद वो नगर परिषद सदस्य भी चुने गए और नगर परिषद के उपाध्यक्ष भी रहे. 2005 में उन्होंने जेडीयू के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गए. जिसके बाद उन्होंने पार्टी बदली और राजद का दामन थाम लिया. 2007 में एक बार फिर नगर परिषद सदस्य बने. इसके बाद 2010 और 2015 में विधानसभा चुनाव भी जीता.
उनका एक वीडियो इन दिनों काफी देखा जा रहा है जिसमें कोरोना के प्रटोकॉल की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं. चुनाव प्रचार में निकली उनकी रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता बिना हेल्मेट और मास्क के क्षेत्र में रैलियां करते दिख रहे हैं. इसमें विधायक की गाड़ी भी साथ साथ दिखाई देती है. वो जगह-जगह रुककर लोगों से मुलाकात करते हैं लेकिन वो खुद भी बिना मास्क के नजर आ रहे हैं.