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बक्सर विधानसभा सीट: कांग्रेस की नजर दसवीं ऐतिहासिक चुनावी जीत पर!

बीजेपी ने यहां पिछले दो दशकों में लगातार जीत दर्ज की. क्योंकि सवर्णों में उसकी पकड़ मजबूत है लेकिन कांग्रेस ने पिछले चुनाव में अपना तीर चलाया.

कांग्रेस के मुन्ना तिवारी कांग्रेस के मुन्ना तिवारी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में बढ़ गई है चुनावी हलचल
  • तीन चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव
  • दस नवंबर को घोषित होंगे नतीजे

बिहार में राजनीतिक हलचल तेज है और चुनाव का ऐलान भी हो गया है. ऐसे में राजनीतिक दलों की नजर अपने किले को मजबूत करने में लगी है. बक्सर विधानसभा सीट जिले की अहम सीट है. यहां मौजूदा वक्त में कांग्रेस का कब्जा है लेकिन इस बार महागठबंधन में खटास के कारण भविष्य आसान नहीं दिख रहा है. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी की नजर अपनी सीट पर वापसी करने पर है.

कौन है उम्मीदवार?
•    परशुराम चौबे – भारतीय जनता पार्टी
•    संजय तिवारी – कांग्रेस
•    निर्मल सिंह – रालोसपा
•    
मतदान की तिथि – पहला चरण, 28 अक्टूबर

क्या कहता है राजनीतिक इतिहास?
1951 से लेकर 2015 तक के इतिहास को देखें तो इस सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जा सकता है. अब तक कांग्रेस के खाते में नौ चुनावी जीत आई हैं. यानी इस चुनाव में उसकी नजर दसवीं जीत पर होगी. कांग्रेस ने 1951 से लेकर 1985 तक यहां चुनाव जीता, सिर्फ 1967 में एक चुनाव में हार मिली थी. उसके बाद 1990 से लेकर 2010 तक कांग्रेस को यहां जीत नसीब नहीं हुई, लेकिन पिछले चुनाव में उसने वापसी की. 

क्या है सामाजिक समीकरण ?
इस विधानसभा सीट पर सवर्ण वोटरों का दबदबा है, यही कारण है कि हर बार राजनीतिक दलों की नजर इसपर बनी रहती है. बीजेपी ने यहां पिछले दो दशकों में लगातार जीत दर्ज की. क्योंकि सवर्णों में उसकी पकड़ मजबूत है लेकिन कांग्रेस ने पिछले चुनाव में अपना तीर चलाया. बक्सर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या पौने तीन लाख के करीब है. इनमें 1,46,270 पुरुष और 1,28,216 महिला वोटर हैं. 

2015 चुनाव के नतीजे क्या थे?
2015 के विधानसभा चुनाव में 58.5 प्रतिशत वोटिंग दर्ज हुई थी. इस सीट पर कांग्रेस ने अपना परचम लहराया था. सवर्ण वोटरों की काट के लिए कांग्रेस ने यहां से मुन्ना तिवारी को मौका दिया और जीत दर्ज की. पिछले चुनाव में कांग्रेस के मुन्ना तिवारी को 66527 और भाजपा के प्रदीप दुबे को 56346 वोट मिले थे. 

स्थानीय विधायक के बारे में
इस सीट से विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने कांग्रेस के लगभग तीन दशक के जीत के सूखे को खत्म किया था. मुन्ना तिवारी के आने से कांग्रेस के खाते में बड़ी संख्या में सवर्ण वोटर आए. इसी साल मुन्ना तिवारी जब चर्चा में आए थे, जब मई के महीने में उनकी गाड़ी से शराब बरामद हुई थी. बिहार में शराबबंदी है और फिर भी शराब का मिल जाना काफी सुर्खियों में रहा, लेकिन विधायक ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था.

 

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