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चिराग के संसदीय क्षेत्र की इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला, राजपूत वोटर तय करेंगे प्रत्याशी की किस्मत

बिहार विधानसभा चुनाव में कई विधानसभा सीटों पर रोमांचक मुकाबला होने वाला है. ऐसी ही ​विधानसभा सीट है जमुई. चिराग पासवान के संसदीय क्षेत्र की इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है.

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चिराग पासवान (फोटो आजतक)
चिराग पासवान (फोटो आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जमुई विधानसभा सीटों पर होगा रोमांचक मुकाबला
  • आरएलएसपी ने जमुई से पूर्व विधायक अजय प्रताप को दिया टिकट
  • श्रेयसी सिंह और आरजेडी से विजय प्रकाश चुनावी मैदान में

बिहार विधानसभा चुनाव में कई विधानसभा सीटों पर रोमांचक मुकाबला होने वाला है. ऐसी ही ​विधानसभा सीट है जमुई. चिराग पासवान के संसदीय क्षेत्र की इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है. इस विधानसभा सीट से आरजेडी के निवर्तमान विधायक विजय प्रकाश उम्मीदवार हैं, तो वहीं बीजेपी की ओर से श्रेयसी सिंह के उतरने की चर्चा तेज है. अब पूर्व विधायक अजय प्रताप की भी इस सीट पर एंट्री हो चुकी है. 

आरएलसीपी ने लगाया अजय प्रताप पर दांव

आरएलसीपी ने जमुई विधानसभा से पूर्व विधायक अजय प्रताप पर दांव खेला है. अजय प्रताप इस विधानसभा से जेडीयू के टिकट पर 2010 में विधानसभा चुनाव जीते थे. वे पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र हैं. नरेंद्र सिंह इलाके के पुराने और बड़े नेता हैं. इस सीट की बात करें, तो यहां राजपूत वोटर प्रत्याशियों की किस्मत तय करते हैं. तीन बार इस सीट पर नरेन्द्र सिंह के परिवार का कब्जा रहा है. 2015 में अजय प्रताप बीजेपी के टिकट पर इस सीट से चुनाव मैदान में थे, उन्हें आरजेडी के विजय प्रकाश ने हरा दिया था.

बीजेपी ने श्रेयसी को बनाया उम्मीदवार

भारतीय जनता पार्टी ने जमुई विधानसभा से अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटर रहीं श्रेयसी सिंह को टिकट दिया है. श्रेयसी बिहार के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे स्व. दिग्विजय सिंह की बेटी हैं. उनकी मां पुतुल सिंह बांका से सांसद रही हैं. 

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आरजेडी ने सिटिंग विधायक को उतारा मैदान में

आरजेडी ने अपने सिटिंग विधायक विजय प्रकाश पर एक बार फिर जमुई विधानसभा से भरोसा जताया है. विजय प्रकाश के भाई जय प्रकाश नारायण यादव हैं, जो पूर्व सांसद और केन्द्रीय मंत्री रह चुके हैं. दोनों ही आरजेडी के बड़े नेता माने जाते हैं. 

राजपूत वोटर का प्रभाव 

जमुई विधानसभा की बात करें, तो तीन लाख मतदाता वाली इस विधानसभा सीट पर राजपूत वोटर प्रत्याशियों की किस्मत तय करते हैं. कहा जाता है कि यदि राजपूत वोटर एकजुट हो जाएं, तो किसी भी प्रत्याशी की किस्मत पलट सकते हैं. इसका उदाहरण ये है कि साल 1967 से 2015 तक हुए 13 विधानसभा चुनावों में 9 बार राजपूत उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.

2000 के विधानसभा चुनावों के बाद इस सीट पर नरेंद्र सिंह परिवार का प्रभाव रहा है. इससे यह स्पष्ट है कि अगर श्रेयसी सिंह बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ती हैं तो यहां राजपूत वोटों का बिखराव होगा. यह बिखराव किसके लिए फायदेमंद होगा, यह तो चुनाव के नतीजों से ही पता चलेगा.

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