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ओवैसी ने पांच सीटें जीती, बिहार में घट गई मुस्लिम विधायकों की संख्या

बिहार में इस बार मुस्लिम विधायकों की संख्या घटकर 2010 के बराबर पहुंच गई है. इस बार के चुनाव में 19 मुस्लिम विधायक जीते हैं, जिनमें आरजेडी के टिकट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक जीतकर आए हैं जबकि जेडीयू से एक भी मुस्लिम नहीं जीत सका है. 

नीतीश कुमार मजार पर दुआ मांगते हुए नीतीश कुमार मजार पर दुआ मांगते हुए
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में 19 मुस्लिम विधायक ही जीत दर्ज कर पाए
  • बिहार में 1985 में सबसे ज्यादा 34 मुस्लिम जीते थे
  • बिहार में 10 फीसदी से ज्यादा कभी नहीं जीते मुस्लिम

बिहार चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पांच विधानसभा सीटें जीतने में जरूर सफल रही है, लेकिन बिहार में मुस्लिम विधायकों की संख्या घटकर 2010 के बराबर पहुंच गई है. इस बार के चुनाव में 19 मुस्लिम विधायक जीते हैं, जिनमें आरजेडी के टिकट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक जीतकर आए हैं जबकि जेडीयू से एक भी मुस्लिम नहीं जीत सका है. 

आरजेडी से सबसे ज्यादा मुस्लिम MLA

बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने सबसे ज्यादा 17 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, जिनमें से 8 जीतने में सफल रहे हैं. इस तरह से बिहार चुनाव में आरजेडी के टिकट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक जीतकर आए हैं. हालांकि, 2015 के चुनाव में आरजेडी से 11 मुस्लिम विधायक जीतने में कामयाब रहे थे, लेकिन इस बार तीन विधायक कम जीते हैं. 

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AIMIM से 5 मुस्लिम विधायक

बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन मुस्लिम विधायकों के जीतने में आंकड़े में दूसरे नंबर है. AIMIM को बिहार की पांच सीटों पर जीत मिली है, जिनमें अमौर, कोचाधाम, जोकीहाट, बायसी और बहादुरगंज सीट है. ये सीटें सीमांचल के इलाके की हैं, जहां मुस्लिम कैंडिडेट AIMIM से ही जीत दर्ज किए हैं. वहीं, AIMIM 2015 चुनाव में 6 सीटों पर लड़ी थी, जिनमें से एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. AIMIM को पहली सफलता 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद किशनगंज सीट पर हुए चुनाव में मिली थी. इस बार AIMIM ने 20 में से 16 टिकट मुसलमानों को दिया था. 

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से महज चार मुस्लिम ही जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. कांग्रेस ने अपनी 70 सीटों में से 10 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे थे. हालांकि, 2015 के चुनाव में कांग्रेस से 6 मुस्लिम विधायक जीतने में कामयाब रहे थे, लेकिन इस बार संख्या घट गई है. कांग्रेस के दो मुस्लिम विधायक वो हारे हैं, जहां पिछले 2 दशक से जीतते आ रहे थे. ये दोनों सीटें AIMIM के खाते में गई हैं. 

बसपा-माले से एक-एक मुस्लिम MLA

बिहार में सीपीआई (माले) से एक मुस्लिम विधायक चुने गए हैं. बलरामपुर सीट पर सीपीआई (माले) के महबूब आलम ने जीत हासिल की है, जो महागठबंधन में सबसे ज्यादा वोटों से जीते हैं. इस सीट पर वो चौथी बार विधायक बने हैं. बिहार में बसपा को एक सीट मिली है और वो भी मुस्लिम विधायक जीते है. चैनपुर सीट पर बसपा से आजम खान जीते हैं, जिन्होंने नीतीश सरकार के मंत्री और बीजेपी प्रत्याशी बृज किशोर बिंद को हराया है. 

जेडीयू से एक भी मुस्लिम नहीं जीता

बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 11 मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था, लेकिन कोई भी नहीं जीत सका है. वहीं, 2015 के चुनाव में जेडीयू के टिकट पर 5 मुस्लिम विधायकों ने जीत हासिल की थी. नीतीश सरकार में एकलौते मुस्लिम मंत्री रहे खुर्शीद उर्फ फिरोज आलम भी अपनी सीट नहीं बचा सके हैं. वहीं, बीजेपी ने इस बार एक भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं दिए थे और न ही जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी ने किसी मुस्लिम को उतारा था. 

1985 में सबसे ज्यादा मुस्लिम जीते

बिहार में इस बार के चुनाव में कुल मिलाकर 19 मुस्लिम कैंडिडेट ही जीत दर्ज कर सके हैं, जो पिछले चुनाव की अपेक्षा यह प्रदर्शन काफी खराब है. बिहार में 1985 के विधानसभा चुनावों में अब तक सबसे ज्यादा 34 मुस्लिम विधायक चुने गए थे. हालांकि उस वक्त बिहार में 325 विधानसभा सीटें थीं और झारखंड को अलग राज्य का दर्जा नहीं मिला था. यह कुल विधायकों का करीब 10 फीसदी था. साल 2015 में बिहार में 243 सीटें थीं, जिनमें 24 विधायक यानी 10 फीसदी मुस्लिम विधायक बने थे.

बिहार में मुस्लिम विधायकों का आंकड़ा

बता दें कि  साल 1952 के पहले चुनाव में 24 मुस्लिम विधायक बने थे. इसके बाद 1957 के चुनाव में 25 और 1962 के चुनाव में 21 मुस्लिम जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. साल 1967 के चुनाव में 18 मुस्लिम जीते थे और साल 1969 के चुनाव में 19 मुस्लिम जीत हासिल किए. वहीं,1972 और 1977 के चुनाव में 25-25 मुस्लिम विधायक जीते थे. 1980 के चुनाव में मुस्लिम विधायकों की संख्या में इजाफा हुआ और 28 मुस्लिम जीतकर विधानसभा पहुंचे जबकि 1985 के चुनाव में 34 मुस्लिम जीतने में सफल रहे. 

हालांकि, 1990 के चुनाव में मुस्लिम विधायकों की संख्या में गिरवाट आई और महज 20 विधायक ही जीत हासिल कर सके. इसके बाद 1995 के चुनाव में भी 19 मुस्लिम जीत दर्ज किए. इसके बाद साल 2000 में एक बार फिर मुस्लिम विधायकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई और 29 मुस्लिम जीतकर विधानसभा पहुंचे. बिहार में साल 2005 में सत्ता परिवर्तन हुआ तो मुस्लिम विधायकों की संख्या में कमी आई और महज 16 मुस्लिम ही जीत हासिल कर सके. इसके बाद 2010 के चुनाव में 19 मुस्लिम विधायकों ने जीत दर्ज की और 2015 में नीतीश-लालू एक साथ आए तो मुस्लिम विधायकों की संख्या 24 पहुंच गई. इस बार महज 19 मुस्लिम ही विधायक बने हैं. 

बिहार में 16 फीसदी मुस्लिम मतदाता

दरअसल, बिहार में करीब 16 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. वहीं,  बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम वोटर अहम भूमिका अदा करते हैं. इन इलाकों में मुस्लिम आबादी 20 से 40 प्रतिशत या इससे भी अधिक है. बिहार की 11 सीटें हैं, जहां 40 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं और 7 सीटों पर 30 फीसदी से ज्यादा हैं. इसके अलावा 29 विधानसभा सीटों पर 20 से 30 फीसदी के बीच मुस्लिम मतदाता हैं. इसके बावजूद बिहार में 10 फीसदी से ज्यादा कभी भी मुस्लिम जीतकर विधानसभा नहीं पहुंचे हैं. 

 

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