scorecardresearch
 

बोधगया विधानसभा सीट: किसी विधायक ने लगातार नहीं दर्ज की जीत, क्या मिथक तोड़ेंगे सर्वजीत

बोधगया विधानसभा क्षेत्र के 50 साल से ज्यादा के इतिहास में अभी तक का यह रिकॉर्ड रहा है कि कोई भी विधायक लगातार जीत दर्ज नहीं कर पाया है. भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली के रूप में प्रसिद्ध बोधगया से अभी आरजेडी के कुमार सर्वजीत विधायक हैं.

विधायक कुमार सर्वजीत (फाइल फोटो) विधायक कुमार सर्वजीत (फाइल फोटो)

बिहार में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. गया जिले की बोधगया सीट पर इस बार लड़ाई रोचक रहने वाली है. बोधगया विधानसभा क्षेत्र के 50 साल से ज्यादा के इतिहास में अभी तक का यह रिकॉर्ड रहा है कि कोई भी विधायक लगातार जीत दर्ज नहीं कर पाया है. भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली के रूप में प्रसिद्ध बोधगया से अभी आरजेडी के कुमार सर्वजीत विधायक हैं.

बोधगया विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास 
अनुसूचित जाति के आरक्षित इस सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ था. तब कांग्रेस के टिकट पर शांति देवी जीती थीं. इसके बाद 1962 में स्वतंत्र पार्टी के कुलदीप महतो जीते. 1967 में आर मांझी, 1969 में कली राम, 1972 में बलिक राम, 1977 में राजेश कुमार, 1980 में फिर बलिक राम, 1985 में फिर राजेश कुमार जीते.

1990 के चुनाव में बलिक राम फिर से जीते. इसके बाद 1995 के चुनाव मालती देवी जीतीं. 2000 के चुनाव में आरजेडी के टिकट पर जीतनराम मांझी जीते. इसके बाद 2005 के चुनाव में बीजेपी के हरी मांझी जीते. 2010 में बीजेपी के श्याम देव पासवान जीते. इसके बाद 2015 के चुनाव में आरजेडी के टिकट पर कुमार सर्वजीत जीतने में कामयाब हुए.

सामाजिक तानाबाना
बोधगया का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है, लेकिन यहां के लोग कई तरह की परेशानी झेल रहे हैं. बोधगया विधासभा क्षेत्र के टनकुप्पा और फतेहपुर प्रखंड के इलाके में अभी भी काफी गरीबी है. इस विधानससभा की कुल आबादी 6 लाख 31 हजार 716 है. 2015 में यहां 57 फीसदी मतदान हुआ था.

2015 के चुनावी नतीजे
2015 के चुनाव में आरजेडी के कुमार सर्वजीत ने बीजेपी के श्यामदेव पासवान को करीब 30 हजार मतों से हराया था. उस चुनाव में कुमार सर्वजीत को 82656 और श्यामदेव पासवान को 52183 मत मिले थे. तीसरे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी देवेंद्र (4265 वोट) और चौथे नंबर पर सीपीआई की जानकी पासवान (4057) रही थीं.

विधायक कुमार सर्वजीत के बारे में
जीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले कुमार सर्वजीत को राजनीति का पाठ अपने पिता स्व. राजेश कुमार से मिला है. वे यहां के विधायक और सांसद रह चुके हैं और 2005 में चुनाव प्रचार से लौटने के दौरान नक्सलियों के अंधाधुन फायरिंग में वे मारे गए थे. 2015 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, कुमार सर्वजीत पर एक आपराधिक केस दर्ज है. उनके पास 1 करोड़ 68 लाख की संपत्ति और 10 लाख की देनदारी थी.

कौन-कौन है मैदान में?
जनता दल राष्ट्रवादी- विजय कुमार चौधरी
राष्ट्रीय जनता दल- कुमार सर्वजीत
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी- सुरेश पासवान
भारतीय जनता पार्टी- हरी मांझी
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी- अजय पासवान

कब होना है चुनाव? 
पहला चरण – 28 अक्टूबर
नतीजा – 10 नवंबर

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें