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मोदी का लालू पर अटैक, छठ से अंबेडकर तक का जिक्र कर PM ने ऐसे बिहार को साधा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छठ पूजा और बाबा साहेब अंबेडकर कर जिक्र कर बिहार के राजनीतिक समीकरण को साधने की कवायद की है. इतना ही नहीं पीएम ने लालू यादव का नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए कहा कि जब शासन पर स्वार्थ नीति हावी हो जाती है, वोट बैंक का तंत्र सिस्टम को दबाने लगता है, तो सबसे ज्यादा असर समाज के प्रताड़ित, वंचित है और शोषित लोगों पर पड़ता है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भाजपा की बिहार के दलित वोटर पर नजर
  • लालू के बहाने बिहार चुनाव को फतह करने प्लान
  • महिलाओं वोटर्स को बीजेपी के पाले में लाने की रणनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिहार में सात परियोजनाओं की सौगात दी. इनमें से चार जल आपूर्ति, दो सीवरेज ट्रीटमेंट और एक रिवरफ्रंट डेवलपमेंट से संबंधित हैं. इस दौरान पीएम मोदी ने छठ पूजा और बाबा साहेब अंबेडकर कर जिक्र कर राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद की है. इतना ही नहीं पीएम ने लालू यादव का नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए कहा कि जब शासन पर स्वार्थ नीति हावी हो जाती है, वोट बैंक का तंत्र सिस्टम को दबाने लगता है, तो सबसे ज्यादा असर समाज के प्रताड़ित, वंचित है और शोषित लोगों पर पड़ता है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शहरी क्षेत्र में बिहार के लाखों लोगों को शुद्ध पानी के कनेक्शन से जोड़ने का काम चल रहा है. अमृत योजना के तहत बिहार के 12 लाख परिवारों को शुद्ध पानी देने का लक्ष्य है. 6 लाख परिवारों को ये सुविधा मिल गई है और जल्द ही आपके परिवार को भी ये सुविधा मिल जाएगी. शहरीकरण आज के दौर की सच्चाई है. पूरी दुनिया में यह हो रहा है. कुछ दशक तक हमने मान लिया था कि शहरीकरण अपने आप में एक समस्या है, लेकिन मेरी सोच कहती है कि हमें हमेशा अवसर तलाशना चाहिए.

पीएम मोदी ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर ने तो उस दौर में ही शहरीकरण की सच्चाई को समझ लिया था. वे शहरीकरण के समर्थक थे. उन्होंने ऐसे शहर की परिकल्पना की थी जहां गरीब को भी अवसर मिले. यानी शहर ऐसे हों जहां खासकर युवाओं को आगे जाने के लिए असीम संभावनाएं मिल सकें. बिहार के लोग भारत के इस नए शहरीकरण में अपना योगदान दे रहे हैं. मोदी ने आंबेडकर जिक्र कर सूबे के 16 फीसदी दलित मतदाताओं को साधने की कवायद की है, जिसका एक बड़ा हिस्सा आरजेडी का वोटबैंक माना जाता है. 

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद बिहार में एक दौर ऐसा आया, जब बिहार में मूल सुविधाओं के निर्माण के बजाय, प्राथमिकताएं और प्रतिबद्धताएं बदल गईं. राज्य में गवर्नेंस से फोकस ही हट गया. इसका परिणाम ये हुआ कि बिहार के गांव पिछड़ते गए और जो शहर कभी समृद्धि का प्रतीक थे, उनका इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड हो ही नहीं पाया. बिहार में जो भी काम हुए थे वो घोटालों की भेंट चढ़ गए. जब शासन पर भ्रष्टाचार की नीति हावी हो जाती है तो सबसे ज्यादा असर समाज के वंचित और शोषित वर्ग पर पड़ता है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार के लोगों ने इस दर्द को दशकों तक सहा है, जब पानी और सीवरेज की मूल जरूरतों को पूरा नहीं किया जाता है, तब सर्वाधिक परेशानी माताओं-बहनों को होती है, गरीबों को होती है. गंदगी से बीमारियां फैलतीं हैं और इलाज के खर्च से परिवार कर्ज तले दब जाता है. ऐसी दिक्कतों से कमाई का एक बड़ा हिस्सा इलाज में खर्च हो जाता है. पिछले 15 सालों से नीतीश कुमार समाज के कमजोर वर्ग का आत्मविश्वास बढ़ाने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने जिस प्रकार बेटियों की पढ़ाई को, पंचायती राज सहित स्थानीय निकाय में वंचित, शोषित समाज की भागीदारी को प्राथमिकता दी है, उससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है. यही कारण है कि अब केंद्र और बिहार सरकार के साझा प्रयासों से बिहार के हर घर में पीने का पानी और सीवरेज प्लान से फायदा मिला है. 

नमामि गंगे परियोजना का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि 'बिहार के लोगों का तो गंगा जी से बहुत ही गहरा नाता है. गंगा जल की स्वच्छता का सीधा प्रभाव करोड़ों लोगों पर पड़ता है. गंगा जी की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ही बिहार में 6 हजार करोड़ रुपए से अधिक की 50 से ज्यादा परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि गंगा के किनारे बसे जितने भी शहर हैं, वहां गंदे नालों का पानी सीधे गंगा जी में गिरने से रोका जाए. इसके लिए अनेकों वॉटर ट्रीटमेंट प्लांटस् और  रिवरफ्रंट डेवलप किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब छठ का पर्व भी आर रहा है ऐसे में बार स्वच्छ पानी में स्नान करने के लिए मिले. हालांकि, पीएम मोदी इससे पहले मन की बात में छठ पर्व का जिक्र कर राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद की थी.

 

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