
बिहार चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. अमौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस अपना परचम फिर लहराना चाहेगी. वहीं, जेडीयू-बीजेपी गठबंधन भी दमखम के साथ उतरी है. ऐसे में मुकाबला रोमांचक हो सकता है. अमौर विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य है और यहां हिंदू अल्पसंख्यक की भूमिका में हैं. तीसरे चरण के तहत 7 नवंबर को यहां 58.46% वोटिंग हुई है.
राज्य में वैसे तो कई सीटें ऐसी हैं, जहां देश में अल्पसंख्यक मुस्लिम वोटर्स जीत-हार में अहम जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन पूर्णिया जिले की अमौर सीट इन सबसे अलग है. इस सीट पर कांग्रेस के अब्दुल जलील मस्तान 1980 के बाद से ज्यादातर काबिज रहे हैं.

इन उम्मीदवारों पर रहेगी नजर
1- अब्दुल जलील मस्तान(कांग्रेस)
2- सबा जफर(JDU)
3- अख्तरउल इमान (AIMIM)
अब तक का इतिहास
अमौर विधानसभा सीट के इतिहास पर नजर डाले तो यहां 17 बार चुनाव हुए हैं. इसमें दो उपचुनाव भी शामिल हैं. इस सीट से कांग्रेस 8 बार जीती है, जबकि निर्दलीय चार बार, पीएसपी दो बार, बीजेपी, समाजवादी पार्टी और जनता पार्टी एक-एक बार जीत दर्ज करने में सफल हुई हैं.
2015 का समीकरण
अब्दुल जलील मस्तान 2015 में 6वीं बार विधायक बने थे. 2015 के चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल जलील मस्तान ने बीजेपी की सबा जफर को हराया था. अब्दुल जलील मस्तान ने 51,997 मतों के अंतर से चुनाव जीता था. इससे पहले अब्दुल जलील 1985, 1990, 2000, 2005 (फरवरी और अक्टूबर) में यहां से जीते हैं. हालांकि, 1985 में अब्दुल जलील निर्दलीय जीतकर आए थे.
कुल वोटर- 2,80,910
पुरुष- 1,49,626
महिलाएं- 1,31,274
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