नगीना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का एक ऐतिहासिक शहर है, जो अपने बेहतरीन पीतल के काम (ब्रासवेयर), पारंपरिक शिल्प और व्यापारिक केंद्र के तौर पर अपनी अहम जगह के लिए जाना जाता है. रोहिल्ला काल से चली आ रही अपनी समृद्ध विरासत के साथ, यह इलाका अब छोटे उद्योगों और व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है.
नगीना अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है और यह नगीना (SC) लोकसभा क्षेत्र का मुख्य हिस्सा है. यह सीट 1956 में बनी थी और 1957 के विधानसभा चुनावों में पहली बार यहां चुनाव हुआ था.
नगीना में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दशकों में यह कांग्रेस का गढ़ था. 1957 और 1985 के बीच हुए आठ चुनावों में से सात में पार्टी ने जीत हासिल की थी. 1985 के बाद, कांग्रेस धीरे-धीरे राजनीति से लगभग गायब हो गई और दोबारा यह सीट नहीं जीत पाई. समाजवादी पार्टी ने नगीना सीट पांच बार जीती है, BSP ने दो बार, जबकि जनता पार्टी, जनता दल और BJP ने एक-एक बार यह सीट जीती है.
2012 में, समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार पारस ने BSP की तत्कालीन विधायक ओमवती देवी को 26,546 वोटों से हराया. पारस ने 2017 में भी यह सीट अपने नाम की और ओमवती देवी को 7,967 वोटों से हराया. ओमवती देवी तब BSP छोड़कर BJP में शामिल हो गई थीं. 2022 में पारस ने अपने और समाजवादी पार्टी के लिए जीत की हैट्रिक लगाई और BJP के डॉ. यशवंत सिंह को 26,451 वोटों से हराया. दिलचस्प बात यह है कि ओमवती देवी ने नगीना सीट चार बार जीती है- 1985 में कांग्रेस के लिए, 1996 और 2002 में समाजवादी पार्टी के लिए, और 2007 में BSP के लिए, जिससे वह इस सीट के इतिहास में सबसे सफल उम्मीदवार बन गई हैं.
लोकसभा चुनावों के दौरान नगीना विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग के रुझान दलित और मुस्लिम समुदायों के मजबूत प्रभाव के साथ-साथ बदलते गठबंधनों और मतदाताओं के बदलते मूड को दिखाते हैं. 2009 में, समाजवादी पार्टी, BSP से 6,590 वोटों से आगे थी. 2019 में बीजेपी ने समाजवादी पार्टी पर 2,955 वोटों की बढ़त बनाई. 2019 में बीएसपी ने बीजेपी पर 55,673 वोटों की बड़ी बढ़त हासिल की, जबकि 2024 में आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) ने बीजेपी पर 43,638 वोटों की बढ़त बनाई. ASP(KR) के चंद्रशेखर आजाद को 1,12,518 वोट मिले, जबकि बीजेपी के ओम कुमार को 68,880 वोट मिले.
नगीना में वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 299,391 रजिस्टर्ड वोटर थे और वोटिंग 60.94 प्रतिशत हुई थी. यह संख्या 2017 में बढ़कर 328,589 वोटर (वोटिंग 63.88 प्रतिशत), 2019 में 339,954 (वोटिंग 62.06 प्रतिशत), 2022 में 346,910 (वोटिंग 64.36 प्रतिशत) और 2024 में 352,550 वोटर (वोटिंग 60.60 प्रतिशत) हो गई.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, नगीना मुस्लिम-बहुल सीट है, जहां 70.53 प्रतिशत आबादी इस्लाम को मानती है. अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी कुल वोटरों में 22.66 प्रतिशत है. इस सीट पर ग्रामीण और शहरी दोनों तरह की आबादी है. यहां 65.63 प्रतिशत वोटर ग्रामीण और 34.37 प्रतिशत शहरी हैं. SC के लिए आरक्षित इस सीट पर बड़ी मुस्लिम आबादी होने के कारण जाति और समुदाय के समीकरण बहुत अहम हो जाते हैं.
नगीना का इतिहास काफी पुराना है और इसकी जड़ें रोहिल्ला काल से जुड़ी हैं. ब्रिटिश काल के दौरान, यह बिजनौर जिले की नगीना तहसील का मुख्यालय था और 1817 से 1824 तक कुछ समय के लिए नए बने उत्तरी मुरादाबाद जिले का मुख्यालय भी रहा. रोहिल्ला शक्ति के उदय के समय बना 18वीं सदी का एक किला बाद में तहसील कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया. 1857 के विद्रोह के दौरान इस शहर ने कई अहम घटनाएं देखीं, जिनमें नजीबाबाद के नवाब और ब्रिटिश सेनाओं के बीच हुई लड़ाई भी शामिल है. नगीना 1886 में नगरपालिका बना. समय के साथ, यह पीतल के हस्तशिल्प और कृषि-आधारित व्यापार के लिए एक मशहूर केंद्र के रूप में विकसित हुआ.
इसकी अर्थव्यवस्था छोटे और मध्यम उद्योगों, कुशल कारीगरी, गन्ने की खेती और स्थानीय व्यापार पर टिकी है. कारीगरों के कल्याण, किसानों की आय, औद्योगिक आधुनिकीकरण, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे अक्सर चुनावी चर्चाओं में छाए रहते हैं.
भौगोलिक रूप से, नगीना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में स्थित है और इस पर पास की शिवालिक पहाड़ियों का भी कुछ असर है. नहरों से सिंचाई के कारण यहां सघन खेती होती है, और यह शहर आस-पास के गांवों के लिए एक अहम व्यापारिक केंद्र का काम करता है.
यहां सड़क और रेल सेवाओं की अच्छी कनेक्टिविटी है. नगीना जंक्शन एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है जो कई दिशाओं को जोड़ता है. इसे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का भी सहारा मिलता है, जो इसे बड़े शहरों और हिमालयी क्षेत्र से जोड़ते हैं.
नगीना जिला मुख्यालय बिजनौर से लगभग 30-32 किमी दूर है. मुरादाबाद लगभग 75-85 किमी, मुजफ्फरनगर लगभग 80-85 किमी, मेरठ लगभग 100-105 किमी, सहारनपुर 70-80 किमी और दिल्ली लगभग 170-180 किमी दूर है, जबकि राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 440 किमी दूर है. पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में, हरिद्वार लगभग 70-75 किमी, देहरादून लगभग 105-110 किमी और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क सड़क मार्ग से लगभग 80-90 किमी दूर है.
राजनीतिक रूप से, नगीना 2027 के विधानसभा चुनावों में कड़े मुकाबले और अनिश्चित नतीजों वाली लड़ाई के लिए तैयार है।हालांकि समाजवादी पार्टी के पास तीन बार के विधायक मनोज कुमार पारस के जरिए यह सीट है, लेकिन चंद्रशेखर आजाद और उनकी आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने SC-रिजर्व्ड इस सीट पर एक नया समीकरण बना दिया है. BJP और BSP के भी मजबूत दावेदार होने के कारण, चुनाव का नतीजा गठबंधन, उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय मुद्दों और जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़ने की असरदार कोशिशों पर निर्भर करेगा.
(अजय झा)
Dr Yashwant Singh
BJP
Brajpal
BSP
Lalita
AIMIM
Shrimati Henreita
INC
Nota
NOTA
Brijpal Singh
IND
Sunil Kumar
IND
Chandraveer Singh
IND
Abhinay Kumar
PPID
Vikas Kumar
ASPKR
Tej Singh
ASP
Arjun Singh
AAAP
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