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Beat Report: बंगाल में नतीजों के बाद भी क्यों तैनात रहेंगी बुलेटप्रूफ गाड़ियां? जानिए Inside Story

बंगाल में नतीजों के बाद हिंसा रोकने के लिए 15 मई तक 200 'मार्क्समैन' बख्तरबंद गाड़ियां तैनात रहेंगी. कश्मीर और नक्सल इलाकों में इस्तेमाल होने वाली ये हाई-टेक गाड़ियां बुलेटप्रूफ हैं और टायर फटने के बाद भी दौड़ सकती हैं. इनका मकसद मतगणना के दौरान और उसके बाद जवानों को सुरक्षित रखना है.

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कश्मीर वाली सुरक्षा अब बंगाल की गलियों में (Photo: ITG)
कश्मीर वाली सुरक्षा अब बंगाल की गलियों में (Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजे 4 मई को आने हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम अभी खत्म नहीं हुए हैं. दरअसल, चुनाव के बाद भी बंगाल के संवेदनशील इलाकों में 'मार्क्समैन' नाम की बख्तरबंद गाड़ियां 15 मई तक तैनात रहेंगी. दरअसल, सीआरपीएफ की इन खास गाड़ियों का इस्तेमाल ज्यादातर जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित इलाकों में होता रहा है, लेकिन बंगाल में हिंसा रोकने के लिए पहली बार इन्हें इतनी भारी संख्या में चुनाव ड्यूटी पर उतारा गया है.

करीब 200 की संख्या में ये बख्तरबंद गाड़ियां बंगाल के अलग-अलग इलाकों में तैनात की गई थीं. इनका मुख्य मकसद यह था कि तनावपूर्ण इलाकों में लोग बिना किसी डर के वोट डालने निकलें. चुनाव के दौरान इसके अच्छे नतीजे भी देखने को मिले और माहौल काफी हद तक शांत रहा. अब प्रशासन का मानना है कि वोटिंग के बाद और गिनती (काउंटिंग) के समय भी हिंसा की आशंका बनी रहती है. इसीलिए जवानों की सुरक्षा और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इन गाड़ियों को फिलहाल वापस नहीं बुलाया जा रहा है.

मार्क्समैन बख्तरबंद गाड़ियां क्यों हैं खास

मार्क्समैन कोई साधारण गाड़ी नहीं है, बल्कि यह स्टील के मजबूत ढांचे से बनी एक बुलेटप्रूफ मशीन है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी बॉडी है, जिस पर AK-47, SLR या इंसास जैसी राइफलों की गोलियों का भी कोई असर नहीं होता. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि अगर पास से भी फायरिंग हो, तो अंदर बैठे जवान पूरी तरह सुरक्षित रहें. इसके अलावा, इसमें 'रन-फ्लैट' टायर लगाए गए हैं. इसका मतलब यह है कि अगर टायर में गोली लग जाए या हवा निकल जाए, तब भी यह गाड़ी कुछ दूरी तक आसानी से चल सकती है और जवानों को सुरक्षित जगह तक पहुंचा सकती है.

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सिर्फ मैदानी रास्ते ही नहीं, बल्कि उबड़-खाबड़ और ग्रामीण इलाकों में भी यह गाड़ी तेजी से दौड़ सकती है. इसका मजबूत सस्पेंशन इसे हर तरह के रास्तों के लिए उपयुक्त बनाता है. चुनाव के बाद अक्सर गलियों या भीड़-भाड़ वाले इलाकों में तनाव की स्थिति बन जाती है, ऐसे में मार्क्समैन जैसी गाड़ियां सुरक्षा बलों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से कार्रवाई करने में मदद करती हैं.

एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस है मार्क्समैन

यह बख्तरबंद वाहन केवल मजबूती ही नहीं, बल्कि एडवांस टेक्नोलॉजी के मामले में भी लाजवाब है. इसमें हाई-टेक पैन-टिल्ट-जूम कैमरे लगे हैं, जो जवानों को गाड़ी के अंदर बैठे-बैठे ही चारों तरफ की गतिविधियों पर नजर रखने की सुविधा देते हैं. यानी बाहर क्या चल रहा है, इसकी पल-पल की खबर स्क्रीन पर दिखती रहती है.

इसके साथ ही, इसमें ट्रेनिंग के लिए खास सॉफ्टवेयर और वर्चुअल टारगेट सिस्टम भी शामिल है. यह गाड़ी इतनी प्रभावी है कि एनकाउंटर वाली जगह के एकदम करीब तक इसे ले जाया जा सकता है. इन्हीं तमाम खूबियों की वजह से इसे हाई-रिस्क मिशनों का हिस्सा बनाया जाता है. बंगाल के चुनाव में इन गाड़ियों की तैनाती ने सुरक्षा के स्तर को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, ताकि मतगणना के बाद भी राज्य में शांति बनी रहे.
 

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