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SIR में लगे BLO ने पत्नी को भी नहीं बख्शा, गड़बड़ी होने पर थमाया नोटिस

पश्चिम बंगाल में एक बीएलओ ने चुनावी प्रक्रिया में नियमों का सख्ती से पालन करते हुए अपनी पत्नी को आधिकारिक चुनावी सुनवाई का नोटिस थमा दिया है. इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने उनकी ईमानदारी की प्रशंसा की है, जिससे जनता का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास बढ़ा है.

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बंगाल SIR: BLO ने अपनी पत्नी को थमाया नोटिस. (File photo: ITG)
बंगाल SIR: BLO ने अपनी पत्नी को थमाया नोटिस. (File photo: ITG)

पश्चिम बंगाल में एक सरकारी अधिकारी देवशंकर चट्टोपाध्याय ने अपने काम के प्रति ईमानदारी की अनोखी मिसाल पेश की है, जिसके कारण वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. उन्होंने ड्यूटी के दौरान नियमों का पालन करते हुए अपनी पत्नी अनिंदिता और स्वयं को आधिकारिक चुनावी सुनवाई का नोटिस दिया है.

दरअसल, पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया में, इस वक्त वोटर लिस्ट में त्रुटियों को सुधार का काम चल रहा है. इसी के लिए  लिए BLO को संबंधित मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस जारी करना होता है.

नाम की स्पेलिंग में मिली गड़बड़ी

मतदाता सूची में सुधार के काम के दौरान देवशंकर को मिली लिस्ट में उनका और उनकी पत्नी का नाम शामिल था. कंप्यूटर की गलती के कारण देवशंकर के सरनेम की स्पेलिंग गलत थी. वहीं, उनकी पत्नी और ससुर के बीच 50 साल के अंतर को 'लॉजिकल एरर' के रूप में चिन्हित किया गया था. देवशंकर ने घर जाकर किसी सामान्य नागरिक की तरह अपनी पत्नी को ये नोटिस सौंपा.

नहीं बनाया शॉर्टकट

वोटर लिस्ट में आई गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए विभाग ने सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की थी. देवशंकर जब ड्यूटी पर थे, तब उन्हें उन मतदाताओं की सूची मिली, जिन्हें कार्यालय बुलाया जाना था. लिस्ट देखते ही वे हैरान रह गए, क्योंकि उसमें उनका अपना घर का पता था.

नियम के पक्के देवशंकर ने कोई शॉर्टकट नहीं अपनाया और आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अपनी पत्नी को नोटिस सर्व किया. अब ये पति-पत्नी साथ में सरकारी दफ्तर जाकर लाइन में खड़े होंगे.

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नोटिस देख हैरान हुई पत्नी

देवशंकर की पत्नी अनिंदिता ने बताया कि शुरुआत में वे नोटिस देखकर हैरान रह गई थीं, लेकिन बाद में उन्होंने अपने पति के काम का सम्मान किया. उन्होंने कहा कि वे नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं और उन्हें इससे खुशी मिलेगी.

उधर, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने भी देवशंकर की इस ईमानदारी और निष्पक्षता की जमकर सराहना की है. ये मामला दिखाता है कि कैसे एक जिम्मेदार अधिकारी व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर उठकर अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देता है, जिससे व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास मजबूत होता है.

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