पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. TMC ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसके नेताओं को वाहन जांच के नाम पर जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. TMC ने चुनाव आयोग को एक लिखित शिकायत भेजकर दावा किया है कि एक व्हाट्सऐप निर्देश के जरिए उसके नेताओं की गाड़ियों की विशेष रूप से तलाशी लेने का आदेश दिया गया है. पार्टी ने इसे भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताया है.
पार्टी का आरोप है कि कथित निर्देश में कहा गया है कि टीएमसी नेताओं और मंत्रियों के वाहनों की पूरे दिन चेकिंग की जाए, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इससे अलग रखा गया है. TMC ने इस मामले को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को शिकायत सौंपी है. शिकायत में पार्टी ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. पहला, इस कथित निर्देश के पीछे जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाए. दूसरा, पार्टी नेताओं को किसी भी प्रकार की परेशान करने वाली जांच से बचाया जाए. तीसरा, जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उन्हें चुनावी ड्यूटी से हटाया जाए.
गाड़ियों की जांच को लेकर भेदभाव का आरोप
TMC ने इस शिकायत के साथ कथित व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट भी जारी किए हैं. पार्टी का दावा है कि इन चैट्स में राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा नरोला बनर्जी का नाम विशेष रूप से शामिल है. TMC के अनुसार, चैट में यह दावा किया गया है कि अभिषेक बनर्जी की पत्नी पर मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है. इसी आधार पर पार्टी ने आरोप लगाया है कि उनके वाहनों की जांच के निर्देश दिए गए हैं.
पार्टी का कहना है कि यह पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई है और इसका उद्देश्य TMC नेताओं को चुनावी अभियान के दौरान परेशान करना है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी टीएमसी नेताओं के वाहनों की जांच की जा रही है तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के वाहनों की जांच क्यों नहीं हो रही है.
ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री और अन्य नेता कथित तौर पर नकदी लेकर घूम रहे हैं और उनके वाहनों की भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुद डुम डुम एयरपोर्ट पर केंद्रीय सुरक्षा बलों ने रोका और वाहन जांच की कोशिश की गई. उन्होंने कहा कि उन्होंने जांच के लिए सहमति भी दी, लेकिन सवाल यह है कि केवल TMC को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है.
BJP का पलटवार, कहा डर में TMC फैला रही झूठा नैरेटिव
TMC नेताओं का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया एक तरह से दबाव बनाने और चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश है. पार्टी ने दावा किया है कि अलग-अलग स्तर के नेताओं को अभियान के दौरान रोका जा रहा है और उनके काम में बाधा डाली जा रही है. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से यह भी कहा गया है कि चुनाव पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वो अचानक वाहन जांच करें और इसकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाए. TMC ने सवाल उठाया है कि आखिर भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के काफिलों की इसी तरह जांच क्यों नहीं की जा रही है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक सार्वजनिक सभा में भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि यह चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा नेताओं के वाहनों की जांच की मांग भी उठाई. दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने TMC के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.
चुनाव आयोग की चुप्पी, मामले ने पकड़ा सियासी तूल
पूर्व भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने कहा कि यह पूरा मामला या तो एआई से बना हुआ है या फिर मनगढ़ंत स्क्रीनशॉट है, जिसे जनता की सहानुभूति पाने के लिए फैलाया जा रहा है. साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को किसी भी राजनीतिक नेता के वाहन की जांच करने का पूरा अधिकार है और इसमें कोई भेदभाव नहीं है.
भाजपा ने आरोप लगाया कि TMC हार के डर से इस तरह के मुद्दे उठा रही है और अब वह बैकफुट पर है. भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर चुनाव आयोग जांच कर रहा है तो इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. इस पूरे विवाद पर अब तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. फिलहाल इस कथित व्हाट्सऐप चैट और वाहन जांच के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है. चुनाव के बीच यह मुद्दा अब दोनों पार्टियों के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने की संभावना है.